मनमोहन मिश्र

मनमोहन मिश्र
"राजनैतिक विश्लेषक"

बुधवार, 28 दिसंबर 2011

अन्ना हजारे जी कम से कम अब तो सही रास्ते पर आ जाइये


अन्ना हजारे जी कम से कम अब तो सही रास्ते पर आ जाइये देस की यही मांग है की आप, बाबारामदेव, सुब्रमनियम स्वामी मिल कर भ्रष्टाचार, कालाधन, और ब्यवस्था परिवर्तन के मुद्दे को एकजुटता के साथ उठाइए पूरा देस आप के साथ खड़ा रहेगा फिर पूंजीपतियो, काले धन कुबेरों, देशद्रोहियो, भ्रष्टाचारियो और कांग्रेसियो को कोई नहीं बचा पायेगा
ॐ जय भारत जय हिंद बन्दे मातरम

मूल मुद्दा बनाम अन्नाहजारे

कांग्रेस संसद में, और अन्ना हजारे आजाद मैदान में जो भी कर रहे है वह पूर्व नियोजित है पूंजीपतियो, काले धन कुबेरों, देशद्रोहियो, भ्रष्टाचारियो और कांग्रेसियो की योजना ही पुरे देश को लोकपाल जैसे छोटे और हल्के मुद्दे पर उलझा कर रखना जिससे देस की मूल समस्या, सड़ चुकी ब्यवस्था को बदलने का, और कालाधन वापस लाने के बारे में, देस की आवाज को दबाया जा सके लेकिन देस अब जाग चूका है, बहकावे में नहीं आएगा जरुरत है बाबा रामदेव के फिर से और पूरी ताकत से सामने आने की, पूरा देस साथ देगा ॐ बंदेमातरम जयहिंद      
ॐ जय भारत जय हिंद बन्दे मातरम

शनिवार, 24 दिसंबर 2011

१८८५ में पैदा हुई कांग्रेस का इतिहास २०१४ में पूरी तरह से ख़त्म हो जायेगा

१८८५ में पैदा हुई कांग्रेस का इतिहास २०१४ में पूरी तरह से ख़त्म हो जायेगा, संसद में कांग्रेस लालू जैसे जोकरों को सी बी आई का डर दिखा कर जो कबड्डी करवा रही है इसे जनता भलीभाति देख और समझ रही है, भ्रष्टाचार, कालाधन और ब्यवस्था परिवर्तन के मुद्दे पर चाहे जितनी भी मिटटी डाले कांग्रेस को सफलता नहीं मिलेगी ॐ जयहिंद बंदेमातरम ॐ जय भारत जय हिंद बन्दे मातरम

सोमवार, 19 दिसंबर 2011

"मेरी आवाज सुनो" अन्ना हजारे गद्दार है, गद्दार है, गद्दार है, कांग्रेसी है

पूंजीपतियो, काले धन कुबेरों, देशद्रोहियो, भ्रष्टाचारियो और कांग्रेसियो की अनब्याहता अर्धांगिनी मीडिया "कालेधन एवं ब्यवस्था परिवर्तन जैसे भीषण और ज्वलंत समस्याओ अर्थात बाबा रामदेव" के साथ सौतेला ब्यवहार करके और अपने अन्नदाता को बचाने की कोशिश करके राष्ट्र एवं राष्ट्रधर्म से गद्दारी कर रही है, मीडिया अपने लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ होने का दाइत्व भूल चुकी है, अपने अन्नदाता के इशारे पर अन्नाहजारे जैसे कुटिल आदमी को आसमान पर पहुचाने की कोशिश में लगी हुई है १८५७ और १९४७ की तरह एक बार फिर छल हो रहा है, अन्नाहजारे द्वारा छले जाने के बाद देश का आम आदमी एक बार फिर समग्र क्रांति से हटकर सशस्त्र क्रांति की और यदि निकल पड़ा तो इसके लिए जिम्मेदार लोकतंत्र के दो स्तम्भ (बिधाइका और मीडिया) होंगे इतिहास इन दोनों को कभी माफ नहीं करेगा, कोई माने या न माने मै अपना नागरिक और भारत माता का सच्चा सपूत होने का धर्म जरुर निभाऊंगा एक बार नहीं सौ बार कहूँगा अन्नाहजारे कांग्रेसी है, अन्नाहजारे गद्दार है, गद्दार है, गद्दार है, पूंजीपतियो, काले धन कुबेरों, देशद्रोहियो, भ्रष्टाचारियो और कांग्रेसियो ने जिसदिन से अन्नाहजारे को मोहरा बना कर बाबारामदेव के पीछे लगाया उसी दिन से मै ये बात कह रहा हु, बाबारामदेव की ऊँगली पकडकर दिल्ली पहुचते ही पीठ में छुरा मारा बाबारामदेव को दिल्ली से हरिद्वार फेकवा दिया खुद कांग्रेस का झुन झुना लोकपाल बिल ले कर अनसन की नौटंकी सुरु कर दिया और जब मीडिया साथ हो तो काहे का रोना दिन को रात और आम का इमली बनना सुरु हो गया, ख़ैर मेरी आवज तो नक्कार खाने में तूती जैसी है फिर भी मै बजाये जा रहा हूँ अपना धर्म निभाए जा रहा हूँ, कहते है सोने वाले को जगाया जा सकता है लेकिन सोने का नाटक करने वाले को नहीं जगाया जा सकता है और मेरा देस भारत तो ६०० साल से सोने का नाटक कर रहा है ये सोच कर की कोई मसीहा आएगा और देस बचाएगा हो रहा है उल्टा, लुटेरे आ रहे है देस लूट रहे है फिर भी देस सो रहा है ॐ बंदेमातरम जयहिंद                        
ॐ जय भारत जय हिंद बन्दे मातरम

रविवार, 18 दिसंबर 2011

"अन्ना" नहीं हथियार है, "देस" का गद्दार है,

अब ये बात बिलकुल साफ और साबित हो चुकी है कि कांग्रेस अपने अंतिम चरण की लड़ाई लड़ रही है और अन्नाहजारे सबसे अंतिम मोहरे बन कर कांग्रेस के हांथो एक हथियार कि तरह इस्तेमाल हो रहे है, भ्रष्ट्राचार, कालाधन, ब्यवस्था परिवर्तन जैसे मुद्दों से पूरी तरह से घिर चुकी सरकार लोकपाल बिल रूपी अंग्रेजी दवा के सहारे अन्नाहजारे को सबसे बड़ा डाक्टर साबित करवाने में जुटी है, कभी "हाँ" तो कभी "ना" देस कि जनता कि आँखों में धुल झोकने के लिए है और वैसे भी जितना लम्बा खिचेगा उतना ही महात्मा अन्नाहजारे का भाव बढेगा जो कांग्रेस का मूल मकसद है, अन्नाहजारे कि आड़ में सबकुछ पीछे धकेलना, उधर भारतीय जनता पार्टी सबकुछ जानते और समझते हुए भी अन्नाहजारे को दुधारू गाय होने के भ्रम में सौ सौ लात खा के भी लिपटने कि कोशिश में लगी हुई है देस कि बाकी पार्टियो का भी कमो बेस वही हाल है बहती गंगा में लुटिया डुबो लिया जाय भले ही हाँथ कि लुटिया भी चली जाय, अन्नाहजारे शुद्ध कांग्रेसी है और कांग्रेस के मिसन २०१४ के लिए काम कर रहे है ये बात जनता को जानना बहुत जरुरी है, कांग्रेस २०१४ तक ये भ्रम लोगो में बना कर रखेगी अंत में अन्नाहजारे कांग्रेस के उड़न खटोले मे बैठ लोकपाल का झुन झुना हाँथ में पकड़ कर लोगो से कांग्रेस के लिए वोट मांगेंगे तब क्या करेगा देस का आम आदमी, यु तो अन्ना हजारे कई बार कई मौको पर ये बात दुहरा चुके है कि "यदि कंग्रेस लोकपाल बिल लेकर आती है तो मै कांग्रेस और राहुल के लिए वोट मागुंगा" इसके बाद भी देस का आम आदमी अन्नाहजारे कि हकीकत और गद्दारी को समझने को तैयार क्यों नहीं है, पूंजीपतियो, काले धन कुबेरों, देशद्रोहियो, भ्रष्टाचारियो और कांग्रेसियो द्वारा संचालित मिडिया अपने आकाओ के निर्देस पर अपनी पूरी ताकत लगा चुकी है अन्नाहजारे को महात्मा बनाने के लिए, ख़ैर पूंजीपतियो, काले धन कुबेरों, देशद्रोहियो, भ्रष्टाचारियो और कांग्रेसियो के इस खेल को देस के तीन लोग "बाबारामदेव" नरेंद्र मोदी, और सुब्रमनियम स्वामी यदि मिल जाय तो रोक सकते है एसा मेरा मानना है देश हित में येसा करना भी चाहिए ॐ बंदेमातरम जयहिंद                      

शनिवार, 17 दिसंबर 2011

"क्रिकेट" से जुड़े किसी भी ब्यक्ति को भारत रत्न देने का अर्थ "बिग बास" बाला शन्नी लिओन को देना होगा

"क्रिकेट" से जुड़े किसी भी ब्यक्ति को भारत रत्न देने का अर्थ "बिग बास" बाला शन्नी लिओन को देना होगा "क्रिकेट" एक पूर्णतया घटिया ब्यवसाइक, भारतीय गुलामी का प्रतिक, देश के राष्ट्रिय खेल हाकी सहित सभी खेलो का बिनाशक, बिदेसी कम्पनियो का प्रस्तुत कर्ता और तमाम आर्थिक अपराधो की जड़ है इसे खेल कहना किसी भी खेल या फिर खेल भावना की तौहीन होगी, यदि भारतीय क्रिकेट की तुलनात्मक विवेचना की जाय तो शुशील, सुंदर, धनाढ्य, बहुचर्चित पूरी तरह से समर्पित ब्यवसाई "बिग बास" बाला कुमारी शन्नी लिओन से ही की जा सकती है, ख़ैर छोडिये अगर सच कहा जाय तो भारत रत्न के हक़दार सिर्फ तीन छेत्र से होने चाहिए पहला अन्नदाता "किसान", दूसरा सर ढकने को, तन ढकने को देने वाला "मजदूर" और तीसरा देश की रक्छा करने वाला "जवान" पर अफसोस इस देस में इनके बारे में सोचने की किसी को फुरसत ही नहीं है        
ॐ जय भारत जय हिंद बन्दे मातरम

मंगलवार, 13 दिसंबर 2011

"कुमार बिस्वास की पहचान सायद हिन्दू"

"कुमार बिस्वास की पहचान सायद हिन्दू" हिन्दू धर्म को सबसे ज्यादा नुकसान हिन्दुओ ने ही पहुचाया है श्रीमान कुमार बिस्वास आप उन्ही हिन्दुओ में से एक हो आप खुद का और अपने साथ ताली बजाने वालो का डी. एन. ए. परिक्छ्न करवा लो बाप की पहचान तो हो जाएगी कम से कम पता तो चले बोलते बोलते मर्यादाओ का उलंघन किसने सिखाया आगे से धार्मिक मर्यादाओ और प्रतिको पर ऊँगली उठाने से पहले सौ बार सोच लेना वर्ना .... ॐ जयहिंद बंदेमातरम  
ॐ जय भारत जय हिंद बन्दे मातरम

सोमवार, 12 दिसंबर 2011

"अन्ना हजारे, पूंजीपतियो, काले धन कुबेरों, देशद्रोहियो, भ्रष्टाचारियो, और कांग्रेसियो द्वारा काले धन और ब्यवस्था परिवर्तन जैसे बिशाल मुद्दों को दबाने की साजिस का हथियार है लोकपाल बिल"

"अन्ना हजारे, पूंजीपतियो, काले धन कुबेरों, देशद्रोहियो, भ्रष्टाचारियो, और कांग्रेसियो द्वारा काले धन और ब्यवस्था परिवर्तन जैसे बिशाल मुद्दों को दबाने की साजिस का हथियार है लोकपाल बिल" अन्ना हजारे सुरु से ही पूंजीपतियो के मोहरे के रूप में काम कर रहे है, पूरी की पूरी गतिबिधि उसका संचालन, और उसके लिए प्रयोग में आनेवाला धन सभी कुछ पूंजीपतियो द्वारा प्रायोजित है, कल ११ दिसेम्बर के सांकेतिक अनसन में आनेवाले सभी राजनैतिक दलों ने जो भी बोला उनमे उनका "वोट" प्रलोभन तो दीखता था लेकिन सच्चाई नहीं सिर्फ ब्रिंदा करात ने पूंजीपतियो और भ्रष्टाचार का कोना पकड़ कर छोड़ दिया, कांग्रेस लोकपाल बिल के साथ जो भी कर रही है, मानना, मुकरना, लटकाना, दो कदम आगे एक कदम पीछे सब कुछ जान बूझ कर अन्नाहजारे की सहमती से कर रही है, इसके तिन बड़े और तीनो पक्छो को फायदा है, पहला अन्नाहजारे को इस लोकपाल बिल में जितनी नाटक नौटंकी होगी लम्बा खिचेगा उतने ही बड़े महात्मा और बापू कहलायेगे, दूसरा कांग्रेस को अन्ततोगत्वा अन्नाहजारे के समर्थन से "लोलू बाबा युवराज" के ताजपोशी में आसानी होगी, और तीसरा "पूंजीपतियो, काले धन कुबेरों, देशद्रोहियो, भ्रष्टाचारियो" को कालेधन और ब्यवस्था परिवर्तन जैसे देस की मूल समस्याओ को पीछे धकेलने में कामयाबी मिल जाएगी, देस फिर कुछ सालो के लिए गुलाम का गुलाम रह जायेगा, मै नहीं जानता की आप मेरी बात को कितना समझ पाते है अगर ठीक लगे तो दुसरो तक भी पहुचाये बस डरता हु कही देर न हो जाये ॐ जयहिंद बंदेमातरम                
ॐ जय भारत जय हिंद बन्दे मातरम

शनिवार, 10 दिसंबर 2011

"अन्ना हजारे की देस से गद्दारी और अवाम से धोका"

अन्ना हजारे जी आज न चाहते हुए भी आपको देस का गद्दार और धोखेबाज कहने को दिल करता है, आपने फिर एक बार रालेगावं से निकलते ही इंदिरा गाँधी से लेकर, राजीव, सोनिया, यहाँ तक की राहुल तक की बिसेस रूप से प्रसंसा की, यदि नेहरु, इंदिरा, राजीव, या फिर कांग्रेसी अच्छे ही होते तो आज आपको रामलीला मैदान में अनसन की लीला क्यों करनी पड़ती, और दिल्ली पहुँच कर तो आपने हद ही कर दी, "आपकी मर्जी का जन लोकपाल बिल पास हो जाता है तो आप अगले चुनाव में राहुल का साथ देगे मतलब प्रधानमंत्री बनवा देगे" तो क्या यही आपकी और कांग्रेस की डील है जिसे पूंजीपतियो ने मिल कर बना रक्खी है, लोकपाल बिल का नाटक अगले संसदीय चुनाव तक चलेगा और ठीक पहले लोकपाल बिल पास हो जायेगा बदले में आप राहुल गाँधी के पच्छ में वोट मांगेंगे तो क्या देस से गद्दारी और अवाम के साथ धोका नहीं होगा, लोकपाल बिल से पहले काला धन और ब्यवस्था परिवर्तन जरुरी है और यही पूंजीपतियो की साजिस है लोकपाल बिल के पीछे "काला धन और ब्यवस्था परिवर्तन" जैसे बड़े गंभीर मुद्दे को धकेलना ॐ जयहिंद बंदेमातरम
ॐ जय भारत जय हिंद बन्दे मातरम

गुरुवार, 8 दिसंबर 2011

"मुद्दा" १८५७ बनाम "मुद्दा" २०१२ (कालाधन, ब्यवस्था परिवर्तन, भ्रष्टाचार)

आज २०१२ के प्रथम चरण को छूते छूते हम एक बार फिर १८५७ के चौराहे पर आ खड़े हुए है, अंग्रेजो के बंसज "कांग्रेस" अत्त्याचार, भ्रष्टाचार, दुराचार, कुब्य्वस्था का पर्याय बन कर वैसे ही नंगी खड़ी है जैसे उनके पूर्वज "अंग्रेज" १८५७ में खड़े थे, लोगो में रोष ज्वालामुखी के लावे की तरह उबल कर बाहर आने को बेताब था हम, १८५७ में आजाद हो गए होते लेकिन देसी और बिदेसी पूंजीपतियो की गद्दारी भरी साजिश का सिकार हो गए हमारे तत्कालीन जननायक, "मुद्दों" के आधार पर बिखेर कर रख दिया हमारे जननायको को पूंजीपतियो ने, जैसा आज हो रहा है चोर हमारे सामने है, कांग्रेस बड़ी बेहयाई से बेपर्दा बीच चौराहे पर खड़ा हो कर ताल ठोक कर कह रहा है "मै हु चोर" पकड़ना तो दूर अंगुली तो उठाओ, और हमारे जननायक अपना पिछवाडा एक दुसरे की ओर करके हवा में हाँथ लहरा कर आम मजलूमों को बरगलाने में लगे है, नारा है मै हु "नायक", पूंजीपतियो, भ्रष्टाचारियो, देसद्रोहियो, के हाँथ तुरुप का एक पत्ता अन्नाहजारे के रूप में लग गया है, ख़ैर छोडिये दो दो बाते सीधे नायको से, बाबा रामदेव - "बाबा जी सही जा रहे हो लगे रहो देस आपके साथ है", सुब्रमनियम स्वामी - "एक अकेला चना भी भाड़ फोड़ सकता है आपने साबित कर दिया बीर तुम बढे चलो हम तुम्हारे साथ है" श्री श्री रविशंकर - "शर्माने से काम नहीं चलेगा अभी नहीं तो कभी नहीं" आशाराम बापू - "सुहाग की सेज से प्रवचन और गोबर पिलाना छोडिये देस खतरे में है हथियार उठाइए देस को आपसे बहुत उम्मीदे है" मुरारी बापू - "राम कृष्ण की कथा कुछ दिनों के लिए छोडिये धनुष ओर सुदर्शन उठाइए आज की पुकार यही है देश की दरकार यही है " महात्मा श्री अन्नाहजारे जी - "आपका मुद्दा देश का मुद्दा हमारा मुद्दा एक नहीं तीन कालाधन, ब्यवस्था परिवर्तन, और भ्रष्टाचार समय रहते सभल जाइये बापू बनने के चक्कर में कही मुलाकात गोडसे से हो गई तो आपतो बापू बन जाओगे लेकिन बापू के रामराज्य के सपने को देशद्रोही फिर एक बार नोटों तक समेट देगे                      
आज २०१२ के प्रथम चरण को छूते छूते हम एक बार फिर १८५७ के चौराहे पर आ खड़े हुए है, अंग्रेजो के बंसज "कांग्रेस" अत्त्याचार, भ्रष्टाचार, दुराचार, कुब्य्वस्था का पर्याय बन कर वैसे ही नंगी खड़ी है जैसे उनके पूर्वज "अंग्रेज" १८५७ में खड़े थे, लोगो में रोष ज्वालामुखी के लावे की तरह उबल कर बाहर आने को बेताब था हम, १८५७ में आजाद हो गए होते लेकिन देसी और बिदेसी पूंजीपतियो की गद्दारी भरी साजिश का सिकार हो गए हमारे तत्कालीन जननायक, "मुद्दों" के आधार पर बिखेर कर रख दिया हमारे जननायको को पूंजीपतियो ने, जैसा आज हो रहा है चोर हमारे सामने है, कांग्रेस बड़ी बेहयाई से बेपर्दा बीच चौराहे पर खड़ा हो कर ताल ठोक कर कह रहा है "मै हु चोर" पकड़ना तो दूर अंगुली तो उठाओ, और हमारे जननायक अपना पिछवाडा एक दुसरे की ओर करके हवा में हाँथ लहरा कर आम मजलूमों को बरगलाने में लगे है, नारा है मै हु "नायक", पूंजीपतियो, भ्रष्टाचारियो, देसद्रोहियो, के हाँथ तुरुप का एक पत्ता अन्नाहजारे के रूप में लग गया है, ख़ैर छोडिये दो दो बाते सीधे नायको से, बाबा रामदेव - "बाबा जी सही जा रहे हो लगे रहो देस आपके साथ है", सुब्रमनियम स्वामी - "एक अकेला चना भी भाड़ फोड़ सकता है आपने साबित कर दिया बीर तुम बढे चलो हम तुम्हारे साथ है" श्री श्री रविशंकर - "शर्माने से काम नहीं चलेगा अभी नहीं तो कभी नहीं" आशाराम बापू - "सुहाग की सेज से प्रवचन और गोबर पिलाना छोडिये देस खतरे में है हथियार उठाइए देस को आपसे बहुत उम्मीदे है" मुरारी बापू - "राम कृष्ण की कथा कुछ दिनों के लिए छोडिये धनुष ओर सुदर्शन उठाइए आज की पुकार यही है देश की दरकार यही है " महात्मा श्री अन्नाहजारे जी - "आपका मुद्दा देश का मुद्दा हमारा मुद्दा एक नहीं तीन कालाधन, ब्यवस्था परिवर्तन, और भ्रष्टाचार समय रहते सभल जाइये बापू बनने के चक्कर में कही मुलाकात गोडसे से हो गई तो आपतो बापू बन जाओगे लेकिन बापू के रामराज्य के सपने को देशद्रोही फिर एक बार नोटों तक समेट देगे                      

सोमवार, 28 नवंबर 2011

पञ्च तत्व का आत्मविलय और बिघटन दोनों ही सत्य है

मेरे पूज्य पिता का देहावसान २३ नवम्बर को होने के कारण ३० नवम्बर से लेकर ७ दिसम्बर तक उत्तेर प्रदेश अपने गावं में रहूँगा तबतक के लिए अपने शुभ चिंतको से छमा चाहता हूँ अगला सम्पर्क ७ दिसम्बर के बाद होगा|
ॐ जय भारत जय हिंद बन्दे मातरम

शुक्रवार, 25 नवंबर 2011

पेप्सी, कोकाकोला और वाल मार्ट जैसी कम्पनिया कोई और नहीं भारतीय कालेधन कुबेरों, पूंजीपतियो, भ्रष्टाचारियो की नाजायज सम्पत्ति, बेनामी दौलत, या यु कहे कि भारत का ही लुटा हुआ काल धन है

पूर्व काल में भी तत्कालीन धनाढ्यो एवं अविवेकशील राजाओ द्वारा "इस्ट इंडिया कंपनी" बुलाई गई थी, आई नहीं थी, कालान्तर में "इस्ट इंडिया कंपनी" देस की गुलामी का कारण बनी, हम आज तक उस गुलामी से आजाद होने के लिए संघर्ष कर रहे है, पेप्सी, कोकाकोला जैसी कम्पनिया हमें बीमार करने में पहले से ही लगी हुई थी अब "वाल मार्ट" जैसी कम्पनिया हमारे नमक रोटी पर हमला करने के लिए बुलाई जा रही है, दरअसल पेप्सी, कोकाकोला और वाल मार्ट जैसी कम्पनिया कोई और नहीं भारतीय कालेधन कुबेरों, पूंजीपतियो, भ्रष्टाचारियो की नाजायज सम्पत्ति, बेनामी दौलत, या यु कहे कि भारत का ही लुटा हुआ काल धन है, अब ये देस को तय करना होगा कि इन्हें आने से रोके या आने के बाद कब्जा करे..???..ॐ बन्दे मातरम जय हिंद            
ॐ जय भारत जय हिंद बन्दे मातरम

गुरुवार, 24 नवंबर 2011

कालेधन कुबेर, देशद्रोही, भ्रष्टाचारियो की सजा सिर्फ और सिर्फ "मौत" है

कालेधन कुबेर, देशद्रोही, भ्रष्टाचारियो द्वारा बिदेसी बैंको में पैसा जमा करना सिर्फ एक आर्थिक अपराध नहीं है, देस का धन बिदेसो में छुपा कर रखने वाले चोर नहीं बल्कि कातिल है, ये हत्यारे देस के लाखो किसानो को आत्महत्या करने के लिए मजबूर किये है, ये कातिल गरीबी, बदहाली, मजबूरी, लाचारी के हथियार से करोडो लोग का क़त्ल किये है, ये देशद्रोही देस की हर छोटी से छोटी और बड़ी से बड़ी मौतों के लिए जिम्मेदार है, ये देशद्रोही देस का धन लूटकर बिदेसो में जमा करके जो भयानक अपराध किया है उसकी सजा सिर्फ और सिर्फ "मौत" है, अगर भारतीय लोकतंत्र इन देसद्रोहियो को सजा देने में नाकाम होता है, तो देस की मजलूम जनता लीबिया की तर्ज पर इन "गद्दाफियो" को सजा दे तो कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा ॐ जयहिंद बंदेमातरम
ॐ जय भारत जय हिंद बन्दे मातरम

बुधवार, 23 नवंबर 2011

"अहिंसा वादी महात्मा गाँधी ने लंगोटी से नोटों तक का सफर लाखो बेगुनाह लासो से गुजर कर किया था, अब अहिंसा वादी महात्मा अन्ना हजारे भी कुछ येसा ही गुल खिलायेगे राष्ट्रपति भवन तक पहुचने के लिए

कमलेश उपाध्याय आपके जोश की और उबलते हुए कुछ कर गुजरने की ललक को समझते हुए हम आपकी कद्र करते है लेकिन अन्नाहजारे जैसे धोखेबाज और गद्दार की तुलना युग पुरुष बाबा रामदेव से कभी नहीं की जा सकती, अन्ना हजारे भ्रष्टाचारियो, पूंजीपतियो, कालेधनकुबेरो और कांग्रेसियो के प्रायोजित आदमी है उनको सुरक्छा दी गई है और बाबा रामदेव को जान से मारने की कोशिश की गई थी, अन्ना हजारे को बारह बजे दिन गिरफ्तारी का नाटक किया गया था क्युकी अधिक से अधिक प्रचार हो, बाबा रामदेव पर बारह बजे रात में हमला हुआ था क्युकी जान से मार देना चाहते थे, अन्ना हजारे को रामलीला मैदान जिन्होंने सजा के दिया था उन्हीने रामलीला मैदान आधीरात को हमला करके सोते हुए निर्दोशो पर जुल्म ढाकर खाली करवा लिया था, अन्नाहजारे बाबारामदेव की ऊँगली पकड़ के दिल्ली आये थे लेकिन बाबा की पीठ में छुरा मारकर कांग्रेस की साजिस में सामिल हो गए, बाबारामदेव पांच साल से गली गली गाव गाव जाकर अलख जगा रहे है, और आज भी लगे हुए है, वो मिडिया को नहीं दिखाई देता लेकिन "अन्ना बाथरूम के अंदर" "अन्ना का बैल हरियाणा में" "अन्ना की गाय पंजाब में" "अन्ना का गधा कश्मीर में" दिखाई देता है, अन्नाहजारे ने किया क्या है देश के लिए धोके के सिवा और आज भी वही कर रहे है, रालेगावं को "रहट" चला कर पानी पिलाया है जो की आज गली नुक्कड़ के हर छुटभैये नेता से लेकर कांग्रेसियो के धुरन्धरो तक यही तो कर रहे है, रही बात पलायन की तो याद रहे चाणक्य कभी सहीद नहीं होते क्युकी  उन्हें चन्द्रगुप्त का निर्माण करना होता है, "धैर्य रखिये जल्द ही चन्द्रगुप्त भी बाहर आएगा" दुबारा फिर कभी बाबारामदेव की तुलना अन्नाहजारे जैसो से मत करना और अंतिम बात "अहिंसा वादी महात्मा गाँधी ने लंगोटी से नोटों तक का सफर लाखो बेगुनाह लासो से गुजर कर किया था, अब अहिंसा वादी महात्मा अन्ना हजारे भी कुछ येसा ही गुल खिलायेगे राष्ट्रपति भवन तक पहुचने के लिए...ॐ बन्दे मातरम जयहिंद                                                

शनिवार, 19 नवंबर 2011

देस पर पड़ेगा भारी" अन्ना हजारे कि गद्दारी,

"गाँधी" का दर्शन, रामराज्य की परिकल्पना स्वराज्य, स्वदेसी, सुशासन से ओत प्रोत था पर उनकी भूमिकाये और उनका निर्णय उनके खुद के दर्शन से कोसो दूर था, गाँधी द्वारा दिया गया अहिंसा का दर्शन तो जैसे देश के लिए अभिशाप और पूंजीपतियो के लिए बरदान साबित हुआ, पूंजीपतियो से मेरा मतलब अंग्रेजी सल्तनत और देसी धनपतियो से है, गाँधी के विवेकहीन निर्णयों के परिणामस्वरूप देस को ६४ साल की बर्तमान गुलामी उपहार स्वरुप मिली है और इसके लिए अकेले गाँधी कि हि जिम्मेदारी होती है, क्यों कि १९१५ से लेकन १९४७ तक तो देस को "अहिंसावाद" शब्द से अपाहिज कर देने का श्रेय उनको हि जाता है, आज भी गाँधीवादी अहिंसा का इस्तेमाल बिस्व के दुसरे देस हमको गाँधी के तिन बन्दर बनाने के लिए हि करते है उदाहरण के लिए यूरोपीय देसों का ब्यवहार इराक, लीबिया, अफगानिस्तान इत्यादि के मामलो में देखा जा सकता है, यहाँ सवाल गड़े मुर्दे उखाड़ने का नहीं है, बल्कि १९१५ से १९४७ के इतिहास कि पुनराब्रित्ति का है, एक बार फिर एक नासमझ गाँधीवादी अन्ना हजारे को हथियार बनाकर देसी बिदेसी पूंजीवादी पूंजीपतियो ने साजिस के तहत देस को गाँधी के तिन बन्दर बनाने कि कोशिश में लगे हुए है और कुछ हद तक सफल भी हुए है क्युकी सुचना तंत्र आज भी उनके हि हाथ में है, बड़े दुःख के साथ ये लिखना पड़ रहा है कि देश ९५ साल पहले पूर्णतया (वास्तविक आजादी) आजाद हो गया होता काश? देश में गाँधी न होते, ख़ैर देश फिर एक बार ९५ साल पहले के चौराहे पर खड़ा है इस बार भी देसी बिदेसी पूंजीपतियो का हथियार है सुचना तंत्र और मोहरे बने है "गाँधीवादी अन्नाहजारे", पांच साल के अथक परिश्रम से बाबा रामदेव ने घर घर जाकर जन जागरण कर अभियान चलाकर पुरे देस को कालेधन, ब्यवस्था परिवर्तन और भ्रष्टाचार के बारे अलख जगाकर उठाया तो देसी बिदेसी पूंजीपतियो ने अपने अंजाम से बौखला कर तुरुप के पत्ते कि तरह अन्नाहजारे को आगे कर दिया खुद को बचाने के लिए, सायद अन्नाहजारे को लगता हो कि वो सही काम कर रहे है लेकिन देस को डरना चाहिए अगले सौ साल कि गुलामी से जिसके लिए एक मात्र गाँधी कि तरह अन्न्हाजारे जिम्मेदार होगे, लोकपाल बिल भले हि देस को सुधारने के लिए हो लेकिन कालाधन और ब्यवस्था परिवर्तन देश को उठ खड़ा होने के लिए है, यदि देस उठ कर खड़ा हि नहीं होगा तो जमीन पर पड़े पड़े सुधर कर क्या करेगा इतनी छोटी सी बात अन्नाहजारे नहीं समझ रहे है एसा देस नहीं मान सकता इससे बात साफ है कि अन्नाहजारे देश से जानबूझ कर धोका कर रहे है, ब्यक्तित्ववादी मह्त्वाकांछा कि भूख मिटाने के लिए देस से गद्दारी कर रहे है यदि मेरे आरोप गलत है तो अन्नाहजारे जबाब दे, या फिर कालाधन, ब्यवस्था परिवर्तन के साथ लोकपाल बिल का मामला उठाये..ॐ जयहिंद बंदेमातरम                        
ॐ जय भारत जय हिंद बन्दे मातरम

गुरुवार, 17 नवंबर 2011

"प्रमोद तिवारी के गोडसे"

प्रमोद तिवारी जी, इटली का raul vincy (राहुल गाँधी) कल का छोरा आपको उत्तर प्रदेश के स्वाभिमानी मजदूर से महाराष्ट्र और पंजाब का भिखारी बना देता है, बगल में बैठ कर आप तालिया बजाते है ये भूल जाते है कि हमारे आज के लिए "गाँधी", नेहरु खानदान, और कुछ चोर कांग्रेसी ही  जिम्मेदार है, फिर भी? ख़ैर बाबा रामदेव और देश के बाकि भारतियो कि सोच के बारे में बोलने का हक़ तो मुझे नहीं है लेकिन जितना गर्व मुझे "सहीद" गाँधी जी के स्वप्न द्रष्टा और रामराज्य कि परिकल्पना कार के रूप में है उतना ही गर्व "वीर सहीद" गोडसे जी के यथार्थवादी देस भक्त के रूप में है...ॐ जयहिंद बंदेमातरम            
ॐ जय भारत जय हिंद बन्दे मातरम

"अन्ना हजारे और बिग बास"

स्वामी रामदेव जी जैसे युग पुरुष कभी "बिग बास" जैसी सस्ती सोच के बारे में सोच भी नहीं सकते हाँ स्वामी अग्निवेस की सही जगह जरुर "बिगबोस"(bigbos) ही है भांट, भाटीनो के बीच, लेकिन मंडली मालिक अन्नाहजारे तथा बाकी के गुरुभाई अरविन्द, सिस्योदिया, किरण, और प्रसान्त भी साथ हो तो देस का भला न सही मनोरंजन तो होता और सायद ब्यक्तित्ववादी अन्नाहजारे की ब्य्क्तित्वता की भूख भी मिट जाती, "जहाँ चेला वहां गुरु" ...ॐ बंदेमातरम
ॐ जय भारत जय हिंद बन्दे मातरम

"अन्ना हजारे और बिग बास"

स्वामी रामदेव जी जैसे युग पुरुष कभी "बिग बास" जैसी सस्ती सोच के बारे में सोच भी नहीं सकते हाँ स्वामी अग्निवेस की सही जगह जरुर "बिगबोस"(bigbos) ही है भांट, भाटीनो के बीच, लेकिन मंडली मालिक अन्नाहजारे तथा बाकी के गुरुभाई अरविन्द, सिस्योदिया, किरण, और प्रसान्त भी साथ हो तो देस का भला न सही मनोरंजन तो होता और सायद ब्यक्तित्ववादी अन्नाहजारे की ब्य्क्तित्वता की भूख भी मिट जाती, "जहाँ चेला वहां गुरु" ...ॐ बंदेमातरम

मंगलवार, 15 नवंबर 2011

तुम्हारे खून में नहीं है क्रांति की बाते

तुम्हारे खून में नहीं है क्रांति की बाते तुम्हारी अचकन पर लाल गुलाब ही फबते है मत करो तुम हमसे अहिंसा की बाते हम गाँधी को हमारी जेब में रखते है तुम कभी जान न पाओगे प्रेम की परिभाषा तुम्हारी नजरो में सिर्फ देह के सांचे नपते है गर तुम्हे गर्व है की तुम गांधी के वंशज हो तो हमारे सिलसिले भी सुभाष से मिलते है तुम घर में सजा कर रखते हो बन्दुक और तलवार हम हमारी कलम को भी तलवार सी पैनी रखते है,,लेखक राजबाला ...धन्यवाद राजबाला बहन आपकी कबिता दिल को छू गई 
ॐ जय भारत जय हिंद बन्दे मातरम

सोमवार, 14 नवंबर 2011

"शर्म आने की जगह गुस्सा आता है (raul vinci) राहुल गाँधी को" क्यों?

"शर्म आने की जगह गुस्सा आता है (raul vinci) राहुल गाँधी को" क्यों? गोरो ने हम भारतीयों को हमेसा भिखारी ही समझा, आज भी यही समझते है, तुमने भी भारतीयों को भिखारी कहकर साबित कर दिया की तुम भी गोरे हो ये बात देस अच्छी तरह जनता है, "ये सच है की हम मजदूर है जिस पर हमें गर्व है पर भिखारी नहीं, फिर भी हमारे आज के लिए "गाँधी", तुम्हारा खानदान, और कुछ चोर कांग्रेसी जिम्मेदार है, इस बात पर तो शर्म आनी चाहिए आपको, गुस्सा क्यों? और हाँ जिस दिन हम भारतीय अपने पैसे (चोरो द्वारा बिदेसो में छिपाया कला धन) लेने में कामयाब हो गए तो गोरो के हाथ में बस कटोरा ही बचेगा जो आज नहीं कल तो होना हि है.. ॐ बन्दे मातरम जय हिंद      
ॐ जय भारत जय हिंद बन्दे मातरम

शुक्रवार, 11 नवंबर 2011

भारतीय जनता पार्टी के लिए बिहार में कमजोर "लोकायुक्त"

भारतीय जनता पार्टी के लिए बिहार में कमजोर "लोकायुक्त" के मुद्दे पर नीतिस कुमार के स्वयम्भू निर्णय पर नीतिस कुमार को सबक सिखाने का, खुद को भ्रष्टाचार बिरोधी देश भक्त साबित करने का और अन्नाहजारे के न चाहते हुए भी उनकी नौटंकी का लाभ उठाने का इससे अच्चा मौका नहीं मिलेगा "एक तीर से तीन सिकार" यैसे मौके बार बार नहीं आते ॐ बंदेमातरम
ॐ जय भारत जय हिंद बन्दे मातरम

मंगलवार, 8 नवंबर 2011

स्वामी अग्निवेस की सही जगह "बिगबोस"

स्वामी अग्निवेस की सही जगह "बिगबोस"(bigbos) ही है भाटीनो के बीच, लेकिन मंडली मालिक अन्नाहजारे तथा बाकी के गुरुभाई अरविन्द, सिस्योदिया, किरण, और प्रसान्त भी साथ हो तो देस का भला न सही मनोरंजन तो होता...ॐ बंदेमातरम
ॐ जय भारत जय हिंद बन्दे मातरम

रविवार, 6 नवंबर 2011

"अन्नाहजारे देश से "धोका" और "गद्दारी" कर रहे है"

अन्नाहजारे कांग्रेस से सासबहू का तूतू मैमै और देस के साथ धोका कर रहे है यह धोका ठीक वैसा ही है जैसा १९४७ में कांग्रेस का अंग्रेजो के साथ सासबहू का तूतू मैमै और देस के साथ धोका किया था "ब्यवस्था का हस्तांतरण" (Transfer of power) के जरिये आजादी को मान कर वैसे तो देस के क़त्ल से लेकर ६४ साल की गुलामी तक बहुत से दुष्परिणाम निकले उस एतिहासिक भूल से, लेकिन अन्नाहजारे की आज के "धोके" और "गद्दारी" का दुष्परिणाम उससे भी भयानक होगा अगले सौ सालो तक फिर कटोरा लेकर अंतर्राष्ट्रीय बिरादरी में घूमता फिरेगा भारत अपनी छोटी से छोटी जरूरतों के लिए सर्वोपरी होने का भारत का सपना मिटटी में मिल जायेगा, देसी और बिदेसी पूंजीपतियो के मोहरे है अन्नाहजारे और इस बात को मै कही भी और कभी भी साबित कर सकता हूँ, अगर अन्नाहजारे मुझ जैसे आम आदमी का जबाब देने की जरुरत नहीं समझते या समय नहीं निकालते तो उन्हें प्रधानमंत्री से सवाल पूछने का हक़ किसने दिया और अगर पूंजीपतियो की नुमाइन्दगी करनी ही है तो देश के आम आदमी की आँखों में धुल क्यों झोक रहे है...ॐ बंदेमातरम जय हिंद
ॐ जय भारत जय हिंद बन्दे मातरम

बुधवार, 2 नवंबर 2011

एक पत्र अन्नाहजारे के नाम


श्रीमान अन्नाहजारे जी सादर प्रणाम, आप हमेसा पत्र लिखते ही रहते है खास करके प्रधानमंत्री जी को लिखने को तो प्रधानमंत्री जी को मै भी पत्र लिख सकता हूँ भले ही आम आदमी हूँ, लेकिन जानता हु मनमोहन सिंग जी जब अपने दिल की ही आवाज नहीं सुन पाते तो आपकी या हमारी आवाज क्या सुनेगे, फिर मैने आपको ही लिखना उचित समझा क्युकी आखिर में आप तो महात्मा बन ही गए जो आपकी सबसे बड़ी ख्वाहिस थी और आज नहीं तो कल "राष्ट्र भ्राता" और भारत रत्न बन जायेगे देस के राष्ट्रपती भी बन जायेगे, आपने अच्छी गठजोड़ बना रक्खी है पूंजीपतियो और कांग्रेसियो से, दिग्बिजय सिंह जैसे जोकरों से तो यु ही ठिठोली करते रहते है देश की आम जानता को उल्लू बनाने के लिए, पूंजीपतियो के पालतू ,,,,, डुग डुगी मिडिया जो अभी "अन्ना बाथरूम के अंदर" "अन्ना का बैल हरियाणा में" "अन्ना की गाय पंजाब में" "अन्ना का गधा कश्मीर में" दिखा कर देश को पका रही है क्यों? ये आप भी जानते है और पूंजीपती भी, कुछ कुछ हम भी, माफ कीजियेगा मै आपको ही आपके बारे में बताने लगा, मै तो आपको पत्र लिख रहा हूँ, जैसा की आपने प्रधानमंत्री को लिखे अपने पत्र में लिखा है की मजबूत जन लोकपाल बिल पास होने से ६०% भ्रष्टाचार मिट जायेगा, बस इतनी सी बात पे पूंजीपतियो के भांट(मिडिया) आपको "महात्मा" "दुसरे गाँधी" और न जाने क्या क्या साबित करने पर तुले हुए है ख़ैर मेरा सवाल आपसे है क्या? मजबूत जन लोकपाल बिल पास होने पर कांग्रेस के लिए वोट मागेगे??? जबकि एसा करने के लिए आप अपना मुह मिडिया के सामने फाड़ चुके है की यदि शीतकालीन सत्र में कांग्रेस मजबूत जन लोकपाल बिल पास करवा देती है तो कांग्रेस के लिए वोट मागेगे, येसा आप कैसे कर सकते है ??? क्या? कांग्रेस के लिए वोट मांगना देस के साथ धोका नहीं होगा ??? महात्मा अन्ना हजारे यदि मजबूत जन लोकपाल बिल पास हो गया तो आप किसके साथ धोका करेगे "देस" या "कांग्रेस" ??? एक न एक के साथ तो आपको धोका करना ही पड़ेगा, महात्मा अन्ना हजारे जहाँ देश में यह माहौल है कि यदि कांग्रेस काले धन, ब्यवस्था परिवर्तन और लोकपाल बिल तीनो मुद्दों का हल एक साथ निकाल ले तो भी २०१४ में कांग्रेस कि पुरे देस में जमानत नहीं बचनी चाहिए, वही आप कांग्रेस के लिए वोट मागने कि बात करके देस कि आँखों में धुल झोक रहे है, रही बात लोकपाल बिल की तो यदि १००, ५००, १०००, की नोट बंद कर दिया जाय और वापस ले लिया जाय तो ७०% भ्रष्टाचार ख़त्म हो जायेगा, ४०% घरेलु काला धन बाहर आ जायेगा और ३०% अपराध(नकली नोटों से लेकर क़त्ल तक) ख़त्म हो जायेगा फिर लोकपाल बिल ही क्यों ??? महात्मा अन्नाहजारे कही लोकपाल बिल से पूंजीपतियो को बचाने की कोसिस तो नहीं कर रहे है आप ??? क्युकी लोकपाल बिल से पूंजीपतियो का एक पैसे का नुकसान नहीं होगा उल्टा फायदा होगा सरकारी दफ्तरों में काम के एवज में घुस देने से बच जायेगे तो क्या? ये सच नहीं है की लोकपाल बिल का खेल आप पूंजीपतियो के इशारे पर तो नहीं कर रहे है और इसी लिए पूंजीपतियो के भांट(मिडिया) आपको सर पे बिठा रक्खा है ??? क्या? आपने बाबारामदेव से दूरी पूंजीपतियो के कहने पर ही बना रक्खी है, कालेधन और ब्यवस्था परिवर्तन के मुद्दे से सीधा नुकसान पूंजीपतियो या नेतागिरी से बने पूंजीपतियो का होगा जिसके कारण पूंजीपती और चोर नेता बाबा रामदेव को मिटा देना चाहते है और आप भी पर्दे के पीछे से उनका साथ दे रहे है ??? क्या? आपके आन्दोलन को देसी और बिदेसी दोनों पूंजीपतियो द्वारा पैसा मिल रहा है ??? आर यस यस को आप क्या समझते है देशद्रोही या देशभक्त ??? यदि देशभक्त मानते है तो साथ खड़े होने में आना कानी कैसी और यदि देशद्रोही मानते है तो राष्ट्र भक्त कौन है "कांग्रेस" ??? भारत की जनता भेडचाल में बिस्वास रखती है जिसके चलते ४०० साल तक मुट्ठी भर मुग़ल और गिनती के गोरे गुलाम बनाकर रखने में सफल हो गए, कालांतर में "गाँधी" कांग्रेस, पूंजीपति और अंग्रेज मिलकर देस का क़त्ल कर दिया और ६४ साल की बर्तमान गुलामी सौगात में दे दी अब वही काम आप कर रहे है "देसी बिदेसी पूंजीपतियो" काले धनपतियो" और कांग्रेसियो से मिलकर सैकड़ो साल की गुलामी फिर देस को देना चाहते है क्यों ??? सदीओ में एक बार ही कोई रामदेव जैसा युगपुरुष अवतरित होता है जो देस को पूर्ण आजादी दिलाने के लिए तन मन धन से काले धन, भ्रष्टाचार और ब्यवस्था परिवर्तन को मुद्दा बनाकर लड़ाई छेड़ रक्खी है लेकिन बीच में आप अपने आकाओ के इशारे पर कालीबिल्ली की तरह रास्ता काट कर लोकपाल जैसा मुद्दा लेकर देस को गुमराह करने में लगे है, यदि आप में जरा सी भी राष्ट्रभक्ति है तो काले धन, भ्रष्टाचार और ब्यवस्था परिवर्तन जैसे तीनो मुद्दों पर साथ आगे बढिए या रास्ते से हट जाइये, राले गावं में "रहट" चलाइए लोगो को पानी पिलाइए, अन्नाहजारे जी ब्यक्तित्ववादी इन्सान अपनी महत्वाकान्छाओ से इतना ग्रसित होता है की न जाने कब आम इंसानों के अरमानो को कुचल कर आगे निकल जाता है उसे भी पता नहीं चलता एसा आपके गुरु "गाँधी" ने भी किया था और अब आप भी उसी रास्ते पर है, मेरी बाते आपको कडवी लगती होगी लेकिन सच जो है कडवी तो होगी ही, अन्नाहजारे जी अपने दिल पर हाँथ रख कर अपने जमीर को जगाइए और मेरे इस पत्र का जबाब दीजिये फिर प्रधानमंत्री के जबाब का इंतजार नहीं करना पड़ेगा, ॐ बन्दे मातरम, जयहिंद
धन्यवाद मनमोहन मिश चेन्नई 9543280008

ॐ जय भारत जय हिंद बन्दे मातरम

मंगलवार, 18 अक्टूबर 2011

"अन्ना हजारे देश से धोखा कर रहे है, भ्रष्टाचारी, दलाल, देशद्रोही, गद्दार, और लुटेरो से लबा लब भरी पार्टी के लिए २०१२ के पांच राज्यों के चुनाव में कांग्रेस के लिए वोट मागेगे एसा अन्ना हजारे का कहना है मेरा नहीं"

"अन्ना हजारे देश से धोखा कर रहे है, भ्रष्टाचारी, दलाल, देशद्रोही, गद्दार, और लुटेरो से लबा लब भरी पार्टी के लिए २०१२ के पांच राज्यों के चुनाव में कांग्रेस के लिए वोट मागेगे एसा अन्ना हजारे का कहना है मेरा नहीं" अन्ना हजारे ने एक पत्रकार से पूछे गए सवाल "क्या कांग्रेश और प्रधानमंत्री अपने ख़त में लिखे अनुसार सीत कालीन सत्र में मजबूत लोकपाल बिल लाते है तो आप उनके लिए २०१२ के चुनाव में वोट मागेगे ?" अन्ना हजारे का जबाब था हाँ पांचो राज्यों में कांग्रेश के पच्छ में वोट डालने के लिए लोगो से अपील करूँगा" यही असली चेहरा है अन्ना हजारे का, संघ जैसे राष्ट्रवादी व आध्यात्मवादी संघटन अन्ना हजारे के लिए अछूत है और बाबा रामदेव जैसे युगपुरुष अछूत है जो सही मायने में ब्यवस्था परिवर्तन और काले धन की लड़ाई लड़ रहे है, प्रसान्त भूसन जैसे देशद्रोही देश का सर काटने की इच्छा रखने वाले आपके सहयोगी आज भी आपके साथ है फिर भी आप देश भक्त है, भ्रष्टाचार सौ समस्याओ में से देश की एक बड़ी समस्या जरुर है लेकिन "लोकपाल बिल" उसका पूर्ण समाधान कत्तई नहीं है फिर आप लोकपाल के लालीपाप पर देश को कैसे दाव पर लगा सकते है, आपको कांग्रेस का चुनाव प्रचार करना है करिए, आपको "गाँधी" बनना है बनिये लेकिन देश को बकरा बनाकर कांग्रेस के हांथो कटवाना क्यों चाहते है आप, हिसार चुनाव तो एक भूमिका थी आपकी "गाँधी" बनने की आकान्छाओ और कांग्रेस को २०१२ में बिधानसभाओ के चुनाव और २०१४ लोक सभा के चुनाव में जिताने की, आप रालेगावं से कांग्रेस के इशारे पर बाबा रामदेव की ऊँगली पकड़ कर दिल्ली पहुँच गए तो कांग्रेस को इशारा करके बाबा रामदेव को उठवा कर हरिद्वार फेकवा दिया तो क्या ये धोका नहीं था ?, "गाँधी" बनने की नौटंकी में कांग्रेस के इशारे पर मिडिया देश को मुर्गा बना कर आपके लिए बाँग लगवाया और आपको गाँधी बनाया अब आपका देस की गर्दन काटने की कोसिस करना देस के साथ धोका नहीं तो क्या है ?, अब आपको किसी की जरुरत नहीं है कांग्रेस के लिए वोट मागिये, कोई बात नहीं वो तो आपको करना ही था क्युकी आप कांग्रेसी है, गाँधी बनना था सो बन गए कोई बात नहीं आम आदमी के लिए लड़ने से आम आदमी के लिए लड़ने का ढोंग करना आसान होता है, लेकिन देश को १९४७ के चौराहे पर लाने की कोशिश मत कीजिये क्युकी उस चौराहे से निकला कोई भी रास्ता उजाले की और नहीं गया था | ॐ बन्दे मातरम जयहिंद
ॐ जय भारत जय हिंद बन्दे मातरम

शनिवार, 15 अक्टूबर 2011

क्या? तथा कथित एवं छतिग्रस्त "लोकतंत्र" और "कालाधन" ही भारतीय महाद्वीप की "दुर्दशा" के लिए जिम्मेदार है ?

क्या? तथा कथित एवं छतिग्रस्त "लोकतंत्र" और "कालाधन" ही भारतीय महाद्वीप की "दुर्दशा" के लिए जिम्मेदार है ? तो इसका एक ही जबाब है "हाँ, हाँ, हाँ, एकमात्र, भ्रष्टाचारियो द्वारा देश में तथा बिदेशी बैंको में छुपाया "कालाधन" ही जिम्मेदार है प्रत्येक घंटे में हो रहे दो किसानो की आत्महत्या के लिए", "हाँ, हाँ, हाँ, एकमात्र, भ्रष्टाचारियो द्वारा देश में तथा बिदेशी बैंको में छुपाया "कालाधन" ही जिम्मेदार है प्रत्येक घंटे में ८३३ आम नागरिको के भूख और कुपोषण से मरने के लिए", "हाँ, हाँ, हाँ, एकमात्र भ्रष्टाचारियो द्वारा देश में तथा बिदेशी बैंको में छुपाया "कालाधन" ही जिम्मेदार है ८४ करोड़ देश वासिओ को २० रूपये से कम आय में जीवन की मुलभुत सुभिधाओ से वंचित जीवन जीने के लिए", "हाँ, हाँ, हाँ, एकमात्र भ्रष्टाचारियो द्वारा देश में तथा बिदेशी बैंको में छुपाया "कालाधन" ही जिम्मेदार है ११५ करोड़ लोगो के कम पढ़े लिखे, तथा ६० करोड़ लोगो के अनपढ़ होने के लिए" "गरीबी, बेरोजगारी, अशिक्छा, अभाव, जैसी सारी समस्याओ के लिए सिर्फ और सिर्फ दलालों, भ्रष्टाचारियो द्वारा देश का धन बिदेशो में छुपा कर रखना है, और देश के सारे भ्रष्टाचारी, दलाल, देशद्रोही, तथा गद्दार अनैतिक उपज है हमारे तथा कथित एवं छतिग्रस्त "लोकतंत्र" के या यु कहे तो ठीक रहेगा की जिस तंत्र में हम जी रहे है वो अंग्रेजो द्वारा हमें गुलाम बनाये रखने के लिए बनाया गया था, दुर्भाग्य बस सिक्छा, कानून, वितरण, न्याय और स्वास्थ सारी ब्यव्स्थाये ज्यू की त्यु आज भी लागु है तथा उसका परिणाम भी वही है जो १९४७ से पहले था "लुट की खुली छुट" फर्क बस इतना है कि पहले गोरे लूटते थे अब काले लूटते है, गोरे लुट कर अपने देश ले जाते थे अब काले लुट कर भी उन्ही के देश ले जाते है आज भी गोरे हमारे पैसे से यैस कर रहे है हम भूख और गरीबी झेल रहे है, ये भ्रष्टाचारी, दलाल, देशद्रोही, गद्दार, और लुटेरे कितने भयानक, न्रिसंस, निर्दई और दुर्दांत है कि आप के सुन कर रोंगटे खड़े हो जायेगे, अफजल गुरु, अजमल कसाई, दाउद इब्राहीम, जैसे सारे खूंखार अपराधी मिल कर भी अब तक कि अपनी उम्र में प्रत्यक्छ या परोक्छ दोनों तरह से जितने आम लोगो को मारा होगा उतने आदमी तो देश के ये भ्रष्टाचारी, दलाल, देशद्रोही, गद्दार, और लुटेरे हर एक दिन मार देते है, हर घंटे में ८३५ आदमी और हर एक दिन में २००४० आदमी मार देते है, देश के भ्रष्टाचारी, दलाल, देशद्रोही, गद्दार, और लुटेरे प्रतिदिन बीस हजार चालीस भारतियो को मौत के घाट उतार देते है, हमारे जैसे आम आदमी के लिए तो ये प्रतिदिन अजमल, अफजल, दाउद बन कर उतर आते है, देश के भ्रष्टाचारी, दलाल, देशद्रोही, गद्दार, और लुटेरे किसी भी आतंकवादी, नसलवादी,.से अधिक क्रूर और भयानक है और हमारी न्याय ब्यवस्था उनको बचाने में तथा उनकी सुरक्छा में लगी हुई है, हममे से ही कुछ लोग उनके जैकार के नारे लगा रहे है हमारी इसी नासमझियो का फायदा देश के भ्रष्टाचारी, दलाल, देशद्रोही, गद्दार, और लुटेरे, काले धन कुबेर उठाते है...जरी..ॐ जयहिंद बंदेमातरम
ॐ जय भारत जय हिंद बन्दे मातरम

गुरुवार, 13 अक्टूबर 2011

"बाबारामदेव को काले झंडे और अंग्रेजी दलालों, गद्दारों, देशद्रोहियो, काले धनकुबेरो, और भ्रष्टाचारियो की जै"


"बाबारामदेव" इतिहास से उपर उठकर अध्यात्म के दरवाजे पर खड़े एक यैसे "युगपुरुष" है जिनकी उपमा के लिए तिन सौ सालो के इतिहास में कोई नहीं मिलता, मानव परिपूर्ण तभी होता है जब कर्म, धर्म, योग, और ज्ञान चारो समान रूप से समाहित हो, वो सिर्फ बाबारामदेव मे है, "सतयुग" में भी अत्याचारी राक्छ्सों का आतंक बढ़ जाने पर भगवान विष्णु को धरती पर रामावतार लेना पड़ा था और उन्हें भी राक्छ्सों का अंत सारी मानव लीलाओ के तहत करना पड़ा था फिर ये तो "कलियुग" है तो "रामदेव" की राह इतनी आसन कैसे हो सकती है, बाबारामदेव देश के लिए जो भी कर रहे है वो देशभक्ती की पराकाष्ठा है और बहुत सी मुस्किलो को झेलते हुए उन्हें सफलता जरुर मिलेगी, देश वास्तव में आर्थिक और सामरिक दोनों मायनो में आजाद होगा, रहा कुछ लोगो के रामदेव को काले झंडे दिखाने का सवाल तो यदि कांग्रेस रामदेव जैसे योगी को जान से मार देने के षड्यंत्र तक कर सकती है वहां काले झंडे दिखाना कोई मायने नहीं रखता, इस देश के हम जैसे आम लोगो का क्या, चार सौ सालो तक मुठ्ठी भर मुगलों और दो सौ सालो तक गिनती के गोरो की गुलामी हमने यू ही नहीं झेली है, हमेसा से हमको ही हमारे खिलाफ इस्तेमाल किया गया है अगर हमने मुगलों के लिए अपनों पर तीर, तलवार और तोपे चलाई है, तो अंग्रेजो के लिए अपनों पर लाठी, गोली, और गोले चलाये है और फिर आज भी तो वही कर रहे है, जिस तरह अंग्रेजों ने देश पर हुकूमत करने के लिए भारतियों के हाथों में डंडे थमा दिए और कन्धों पर बंदूक रख दिए उसि तरह वैचारिक तथा सामाजिक दमन के लिए क्रान्तिकारिओं के बढते दबाव को खत्म करने के लिए अंग्रेजों ने कुछ दरबारी, चाटुकार, भारतियों को मिलाकर अपनी हि अध्यछ्ता में संस्थागत दलालों का एक समूह खड़ा कर दिया जो समय समय पर क्रान्तिकारिओं के आजादि कि ओर बढ़ते कदमों को रोकने से लेकर अंग्रेजों के हर मंसूबों को पूरा करने में सहभागि रहे, कालान्तर मे सुबाश चन्द्र बोश जैसे क्रान्तिकारिओं के जीवन कि सौदेबाजि से लेकर भगत सिंह जैसे क्रान्तिकारिओं कि मौत तक का सौदा बडी बेरहमि और बेसर्मि से किया, आजादि का सपना तो सपना हि रह गया देश का बिभाजन शौगात में मिला अंग्रेजों ने जाते जाते दरबारी, चाटुकार, दलाल भारतियों का एक ऎसा जाल बना दिया कि देश "आजादि के एक दिन" तो क्या "आजादि के एक पल" के लिये तरस गया, लेकिन दलालों ने खूब धन कमाया देश तो नहि बिदेशी बैंको को पाट दिया, अंग्रेज भले हि दूर हो गये पर दलाल अंग्रेजी और एक अंग्रेजन कि जी हुजुरी से खुश हैं, कोशिश मे है कि फिर से ईटलि कि महारानि भारत कि गद्दि सभालें, हम आज भी एसे लोगो के लिए "जैकार" लगा रहे है और बाबारामदेव जो जान हथेली पर लेकर देश के गद्दारों, देशद्रोहियो, काले धनकुबेरो, और भ्रष्टाचारियो से लोहा ले रहे है उन्हें काले झंडे दिखा रहे है, इस्वर यैसे लोगो को सद्बुद्धि दे .... ॐ जयहिंद बंदेमातरम                          


ॐ जय भारत जय हिंद बन्दे मातरम

प्रसान्त भूसन पर किया गया हमला अलोकतांत्रिक है, तो देश कि एकता, अखंडता, संप्रभुता पर प्रसान्त भूसन का हमला क्या है ?

प्रसान्त भूसन पर किया गया हमला अलोकतांत्रिक है, तो देश कि एकता, अखंडता, संप्रभुता पर प्रसान्त भूसन का हमला क्या है ?, क्या? महात्मा अन्ना हजारे देश के एक और बिभाजन के मुद्दे पर अपने सिस्य का समर्थन करते है ?, क्या? महात्मा अन्ना हजारे के बाकी सिस्य केजरीवाल, किरण बेदी, सिस्योदिया इत्यादि भी अपने सहयोगी प्रसान्त भूसन से सहमत है ? अगर नही तो अब तक चुप क्यों है ?, अगर हाँ तो फिर कोई आश्चर्य कि बात नहीं महात्मा अन्नाहजारे के आदर्श महात्मा गाँधी ने भी तो यही किया था | कांग्रेसी सोच, कांग्रेसी विचारधारा और कांग्रेसी नीतियों पर चलते हुए महात्मा अन्ना हजारे और उनकी कम्पनी देश को कबतक भ्रस्टाचार बिरोधी नारे से गुमराह करती रहेगी कहना मुस्किल है, क्युकी भ्रस्टाचार एक बड़ी समस्या है येसी ही सौ समस्याओ या यु कहिये देश कि सारी समस्याओ कि जड़ है "कालाधन" और सारी समस्याओ का हल है "कालाधन" लेकिन बड़े अफसोस के साथ कहना पड़ता है कि मिडिया कि सहायता से अन्नाहजारे जैसे लोगो को आगे करके कांग्रेस बड़ी आसानी से देस को गुमराह करने में कामयाब हो रही है ख़ैर चाहे जो भी हो प्रसान्त भूसन कि घटना से एक बात तो साफ हो गई है कि देश को अब अन्नाहजारे जैसे गाँधीवादी अफीम से सुलाया नहीं जा सकता हाँ बात समझ में आने कि देर है, देश कि सारी समस्याए "कालेधन" से सुरु होकर "कालेधन" पर ख़त्म होती है, "कालेधन" को रखने वाला, "कालेधन" से हटकर किसी भी मुद्दे पर बात करने वाला, मुद्दे को भटकाने वाला देशद्रोही है और "कालेधन" को वापस लाने कि बात करने वाला, "कालेधने" को मुद्दा बनाने वाला ही एक मात्र देश भक्त है | जारी..... जयहिंद बंदेमातरम                            
ॐ जय भारत जय हिंद बन्दे मातरम

शुक्रवार, 30 सितंबर 2011

"खेल सोनिया मैडम और अन्ना हजारे का"

१० जनपथ रोड (सोनिया मैडम के घर) पर एक प्रतियोगिता आयोजित की गई है "कौन बनेगा प्रधानमंत्री" और खेल है सतरंज का, एक तरफ के हाट सिट बैठकर सोनिया मैडम मनमोहन सिंग (राजा) सहित सारे मंत्रिमंडल को गोटियो की जगह सजा रक्खा है, प्रधानमंत्री की ख्वाहिश रखने वाले सभी मंत्रियो को क्रमशः "वजीर" (प्रणव मुखर्जी) "हांथी" (चिदम्बरम और शरद पवार) "घोड़े" कपिल सिब्बल और पवन कुमार बंसल) "ऊंट" (बिलास राव देशमुख और सलमान खुर्शीद) और "प्यादों" के खानों में (राजा, कलमाड़ी, कनिमोझी, दयानिधि, थरूर, सिंदे, इत्यादि) सजा रक्खा है इस सतरंज के खेल की सबसे दिलचस्प बात है कि खेल तो सात साल से सुरु है लेकिन अभी तक सामने वाली हाट सिट के लिए खिलाडी ही तय नहीं हो पाया है उस पर बैठने के लिए अंतरिम प्रतियोगिता जारी है, सोनिया मैडम ने सर्त लगा रक्खी है "पहले जो सबसे अधिक हमारी तरफ के "वजीर" से लेकर "प्यादों" तक को मारेगा (बाहर करेगा) वही हाट सिट पर बैठेगा और पूरा "बिपक्छ" बेचारा कभी आपस में तो कभी मैडम के "प्यादों" पर हमले में लगा है हाँ कुछ "प्यादों" को आउट भी किया है लेकिन इससे क्या होगा और इस खेल में "बिपक्छ" कि सबसे बड़ी मज़बूरी है मैडम कि धमकी "जो हमारे प्यादों पर हमला नहीं करेगा उसे अमरसिंह कि तरह सी बी आई से बोल कर अन्दर करवा दूंगी" कहने के लिए तो सारी लड़ाई "राजा" (मनमोहन सिंह) को बचाने के लिये है लेकिन "बली" के सबसे बड़े और अंतिम बकरे तो वही है ख़ैर कुछ बाते संछेप में बता देता हु, सवाल-सतरंज का ये खेल क्यों ? उत्तर-राहुल गाँधी को प्रधानमंत्री बनाने के लिए बिपक्छ के हांथो अपने ही मंत्रियो (प्रधानमंत्री के बड़े दावेदारों और सहयोगी पार्टियो के मंत्रियो) को रास्ते से हटवाना या कमजोर करना, अब अगर उपरोक्त सारे खेल के खेल को सीधे शब्दों में कहा जाय तो सभी कांग्रेसी और यु पि ए का हर मंत्री, प्रधानमंत्री सहित सभी प्रत्यक्छ या परोक्छ घोटाले किये है या सामिल है और घोटालो का सबसे बड़ा हिस्सा १० जनपथ सीधे या घुमाकर राबर्ट इत्यादि से होते हुए गया है, कुछ सामने आ चूका है और कुछ निकट भविष्य में आएगा जिनकी पोल खुल चुकी है वो अपने आपको बचाने में लगे है जिनकी खुलनी बाकि है वो अपने आपको छुपाने में लगे है, और ए बात जान कर किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए कि घोटालो का पर्दाफाश भी सोनिया मैडम कि मेहरबानी से ही हो रहा है क्युकी राहुल गाँधी के प्रधानमंत्री बनने के रास्ते के काँटों को भी तो साफ करना है, उधर सोनिया मैडम ने "अन्ना हजारे" को राहुल गाँधी के प्रमोसन पर लगा रक्खा है, अन्ना हजारे का पाकिस्तानी सपना और कश्मीर मुद्दे पर प्रेस से मिलिए कार्यक्रम में दिया प्रसान्त भूसन का बयान भी इसी कड़ी का एक हिस्सा है "महात्मा गाँधी" ने भारत का खून (दो टुकड़े) करके गद्दी जवाहर लाल नेहरु को दे दी थी अब "गाँधीवादी" अन्नाहजारे भारत का सर काटकर गद्दी राहुल गाँधी को देना चाहते है, सोनिया मैडम अगर भारतियो को इंडियन (मुर्ख) बनाती है तो बात समझ में आती है सैकड़ो साल तक अंग्रेजो ने यही तो किया था, लेकिन अन्ना हजारे और प्रसान्त भूसन जैसे लोग देश को मुर्गा बना लेते है और देश भी कुकड़ू कु करके बाँग देने लगता है, अंतिम बात "पाषाण युग से लेकर परमाणु युग तक दुश्मनों से जीतकर भी इन्सान हमेसा दोस्तों के पक्छाघात से ही हारा है"
ॐ जय भारत जय हिंद बन्दे मातरम

सोमवार, 26 सितंबर 2011

छतिग्रस्त "लोकतंत्र" दुनिया के किसी भी "तानाशाही" ब्यवस्था से ज्यादा भयानक, खतरनाक, और बिध्व्न्सक होता है, भाग ३


"अनिवार्य मतदान" का कानून ही क्यों ? भ्रष्टाचार पर बोलने, सोचने और समझने के लिए कुछ बचा ही नहीं है इस देश की सरकार पूरी कि पूरी भ्रष्टाचार में डूबी हुई है प्रधान मंत्री से लेकर सन्तरी तक, और सरकार से बाहर रहने वाले भी दूध के धुले नहीं है क्युकि पूंजीवादी अर्थब्यवस्था के इस विकृत लोकतंत्र का स्वरूप ही एसा होता है, भ्रष्ट सरकार और पूंजीवादी अर्थब्यवस्था से देस अगर किसी जनहित कानून बनाने कि उम्मीद करता है तो सदी का सबसे रुचिकर चुटकुले से बढ़ कर कुछ नहीं हो सकता, कहने का मतलब पूरी ब्यवस्था को बदलने कि जरुरत है और एसा तभी हो सकता है जब पूरी संसद बदली जाय और संसद बदलने के लिए हमें अपने आप को बदलना होगा और हम यानि इस देस का आम आदमी तो बदलना जानता ही नहीं वर्ना "खून से इतिहास लिखने वाली कांग्रेस सत्ता में नहीं होती" फिर बदलाव के लिए "अनिवार्य मतदान" के कानून के आलावा कोई रास्ता नहीं बचता, "अनिवार्य मतदान" न सिर्फ संसद को साफ करेगा बल्कि मतदान में हो रहे सारे अपराध, अपराध के बल पर मतदान, मतदान के लिए समाज को बाटने अपराध, अपराध और मतदान का घालमेल स्वयम ख़त्म हो जायेगा, आज औसतन ५० प्रतिसत मतदान होता है, १५ प्रतिसत मतदान हासिल करने वाली पार्टी सरकार चलाती है उसमे भी मात्र १ प्रतिसत मतदान मत का अर्थ समझने वालो का होता है बाकि १४ प्रतिसत मतदाता तो मतदान का गूढ़ार्थ तो छोडिये मतदान का शाब्दिक अर्थ भी नहीं जानता और ये मै नहीं इस "विकृत लोकतंत्र" के चौपाये ही समय समय पर आकडे पेस करते रहते है, और मात्र यही वो १ प्रतिसत आदमी इस देश की दसा और दिसा तय करते है, ख़ैर जो ५० प्रतिसत मतदाता मतदान से दूर रहते है वो मध्यवर्गीय, सिक्छित, ही नहीं मतदान का गूढ़ार्थ तो छोडिये मतदान का शाब्दिक अर्थ भी जानते है लेकिन मतदान से दूर रहते है, कारण बहुत से है, कारण को छोडिये, उन्हें तो जगाने की भी जरुरत नहीं है वो जागे हुए है लेकिन दुर्भाग्य से "गाँधी" के तिन बन्दर है, और उनको "अनिवार्य मतदान" का कानून ही मतदान केंद्र तक ला सकता है, एक बार ये ५० प्रतिसत लोग मतदान के लिए आगे आ गए तो मुह, कान और आंख से हाँथ तो वो खुद ही हटा लेगे......जारी..ॐ बन्दे मातरम जयहिंद                                    
ॐ जय भारत जय हिंद बन्दे मातरम

रविवार, 25 सितंबर 2011

"लोकतंत्र" दुनिया के किसी भी "तानाशाही" ब्यवस्था से ज्यादा भयानक, खतरनाक, और बिध्व्न्सक होता है, भाग २

"१०० प्रतिसत मतदान" ही एक मात्र रास्ता बचा है, देश को बचाने, ब्यवस्था परिवर्तन करने, पूंजीवादी अर्थब्यवस्था के इस विकृत लोकतंत्र को ख़त्म कर सच्चे लोकतंत्र की स्थापना करने, पूर्ण स्वराज्य, समग्र विकास ऐवं आध्यात्मिक समाजवाद को कायम करने और देश की दुर्दशा, के लिए जिम्मेदार लोगो को सजा देने के लिए, लेकिन जन जागरण और अनुनय बिनय से देश "१०० प्रतिसत मतदान" का महत्त्व समझने से रहा, क्युकी सदीओ से ९० प्रतिसत से अधिक आवादी तो "गाँधी के तिन बंदरो" की रही है वर्ना क्या मजाल थी की मुट्ठी भर मुग़ल, या फिर गिनती के गोरे सदीओ सासन कर लेते, ख़ैर "१०० प्रतिसत मतदान" सुनिश्चित करने के लिए "अनिवार्य मतदान" का कानून होना जरुरी है, देश के आम आदमी और देशभक्त नायको को पूरा जोर लगाके "अनिवार्य मतदान" का कानून बनवाने का प्रयास करना चाहिए क्युकी यदि "अनिवार्य मतदान" का कानून बन गया तो एक भी पूंजीपती, दलाल, काला धन कुबेर, देशद्रोही, भ्रष्टाचारी और देश का गद्दार संसद तक नहीं पहुँच पायेगा फिर तो बाबारामदेव जी जैसे देश भक्त देश हित में जो भी कानून बनवाना चाहेगे बनवा सकते है, उन्हें चार जून की रात नहीं देखनी पड़ेगी, अन्ना हजारे जी के लोकपाल बिल की आवश्यकता ही नहीं होगी जब संसद में इमानदार, सच्चे, कर्तब्य परायण, निष्ठावान, सद्चरित्र लोग होगे तो वो सारे सपने पुरे होगे जो देश का हर आम आदमी देखेगा, मसखरो, अपराधियो, भांडों, दलालों, देशद्रोहियो और पूंजीपतियो को संसद में पहुँचने से रोकना होगा, एसा तभी होगा जब "अनिवार्य मतदान" का कानून होगा, देश का हर आम और खास इस सच्चाई से वाकिफ है की आज मतदान कौन, ? क्यूँ, ? और कैसे ? करता है, लेकिन ये भी उतना ही सच है की यदि "मतदान अनिवार्य" कर दिया जाय तो अपने आप ही तथा कथित एवं छतिग्रस्त "लोकतंत्र" ख़त्म हो जायेगा और उसके बदले स्वस्थ, सुदृढ़, सुब्य्वस्थित, और सच्चे लोकतंत्र की स्थापना होगी.....जारी...ॐ बंदेमातरम जयहिंद                                          
ॐ जय भारत जय हिंद बन्दे मातरम

शनिवार, 24 सितंबर 2011

छतिग्रस्त "लोकतंत्र" दुनिया के किसी भी "तानाशाही" ब्यवस्था से ज्यादा भयानक, खतरनाक, और बिध्व्न्सक होता है, "भाग १"

हम जिस ब्यवस्था में रहते है उसे लोकतंत्र तो कत्तई नहीं कहा जा सकता, हाँ मुगलों के बर्बर सासन से लेकर अंग्रेजो की दमनकारी ब्यवस्था सहित, पुजीपतियो के शोसनकारी नीतिओ तक का मिलाजुला क्रूर एवं संवेदनहीन पूंजीवादी ब्यवस्था को लोकतंत्र मान कर हम चलरहे है, इस विकृत लोकतंत्र का परिणाम आपके सामने है "भारत के सतप्रतिसत लोग इमानदार है कोई भी बेईमान नहीं है" लेकिन इस ब्यवस्था का लाभ जिनको मिल रहा है, वो इसे बदलना नहीं चाहते, उनकी संख्या भले हि दशमलव सुन्य पांच प्रतिसत है लेकिन १२१ करोड़ पर भारी पड़ रहे है क्युकि ब्यवस्था उनके हाँथ में है, हमें, यानि आम आदमी को इस ब्यवस्था को जड़ से उखाड़ फेकना होगा, भारतीय उप महाद्वीप में सिर्फ एक मात्र  एक आदमी "बाबारामदेव जी" हि सही दिशा में ब्यवस्था परिवर्तन के लिए कार्य कर रहे है, दिग्भ्रमित करने के लिए "अन्नाहजारे" जैसे लोग भी सामने लाये जायेगे जो टुकडो में बदलाव की बात करेगे, चुकी इस "ब्यवस्था" को टुकडो में बदला ही नहीं जा सकता इस लिए एसे लोगो से या तो दूर रहना है या फिर उनको अपनी बात समझानी पड़ेगी, वैसे तो पूंजीवादी अर्थब्यवस्था अर्थात विकृत लोकतंत्र अमानवीयता के चरम पर पहुँच चूका है इस ब्यवस्था की पराकाष्ठ ही इसके विनास का द्योतक है, "भ्रष्टाचार और कालेधन के खिलाफ यस आई टी गठित करने के कोर्ट के आदेश को कोर्ट में चुनौती देना" इस ब्यवस्था के नंगेपन का एक छोटा सा उदाहरन भर है, विकृत लोकतंत्र का सबसे अधिक लाभ उठाने वाली कांग्रेस के नंगेपन का तमासा तो सारा देश देख रहा है, बाकी भी कमोबेस येसे हि है, अब ये पूरी तरह साबित हो चूका है की इस विकृत लोकतंत्र को मिटा कर सच्चे लोकतंत्र की स्थापना भी इसी लोकतंत्र मे है, और वो है "१०० प्रतिसत मतदान" यह एक मात्र येसा ब्रह्मास्त्र है जो पूंजीवादी अर्थब्यवस्था के इस विकृत लोकतंत्र को ख़त्म कर सच्चे लोकतंत्र की स्थापना कर सकता है....जारी....ॐ बंदेमातरम जयहिंद                    
ॐ जय भारत जय हिंद बन्दे मातरम

शुक्रवार, 23 सितंबर 2011

छतिग्रस्त "लोकतंत्र" दुनिया के किसी भी "तानाशाही" ब्यवस्था से ज्यादा भयानक, खतरनाक, और बिध्व्न्सक होता है

तथा कथित एवं छतिग्रस्त "लोकतंत्र" दुनिया के किसी भी "तानाशाही" ब्यवस्था से ज्यादा भयानक, खतरनाक, और बिध्व्न्सक होता है, हमारा भारतीय लोकतंत्र इसका सबसे बड़ा उदाहरन है, कहने के लिए तो हम स्वतंत्र है लेकिन मात्र पांच लाख से भी कम लोग (पूंजीपती, दलाल, और बिधाइका, कार्यपालिका, न्यायपालिका, और सुचना तंत्र से जुड़े कुछ भ्रस्ट देशद्रोहियो, भ्रष्टाचारियो, कालेधनकुबेरो) १२१ करोड़ देश के आम नागरिकों (इमानदार, सच्चे, कर्तब्य परायण, निष्ठावान) पर बर्बर, तानाशाही, षड्यंत्र कारी, दमनकारी, और शोसनकारी ब्यवस्था थोप कर सासन कर रहे है, चाह कर भी देस की आम जनता बस सिसक कर जीने के लिए मजबूर है, यदि "बाबा रामदेव जी" जैसे लोग ब्यवस्था परिवर्तन के लिए झंडा उठाते है तो जान बचाना मुस्किल होता है किसी तरह बच जाते है तो कुचलने का षड्यंत्र रचा जाता है, अग्निवेस जैसे दलालों को पीछे लगाया जाता है, अन्नाहजारे जैसे लोगो से खोखले गाँधीवादी अहिंसावाद का नारा लगवाकर आम लोगो को बरगलाने की कोशिश की जाती है, दुनिया को अँधेरे में रखने के लिए "३२ रूपये का स्लम डाग मिलेनियर" और "२६ रूपये का विलेज डाग मिलेनियर" बनाया जाता है, आम आदमी भूख, गरीबी, बदहाली में जीने को मजबूर  है, लोग आत्महत्या तक कर लेते है, और अगर कही गलती से आँख दिखाने की कोसिस कर दिए तो नक्सलवादी, माओवादी (माओवाद ने चीन को दो साल बाद आजाद होने के बाद भी हमसे दो सौ साल आगे पहुंचा दिया है) और पता नहीं कौन, कौन, से वादी बता कर मार देगे मतलब ये की देश का आम आदमी मरने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है, एक आम आदमी बिन मागी मुराद की तरह पैदा होते ही कुपोषण का सिकार होकर मरने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है, अगर जीता रहा तो दोहरी सिक्छा निति के कारण असिक्छित रहने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है, अगर मेहनत मजदूरी करके कुछ कमा भी ले तो सरकार द्वारा हर नुक्कड़ पर बिक रही सराब पीकर मरने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है, वैसे तो मरने के लिए और भी ब्यस्था है जैसे सिगरेट, बीडी, तम्बाखू, गुटखा, इत्यादि फिर भी कुछ पैसे लेकर अगर घर पहुच भी गया तो परिवार का पेट तो भर नहीं सकता भूखे रहकर प्यार के सहारे मरने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है, मरे यां न मरे लेकिन एक और आम आदमी बिन मागी मुराद की तरह पैदा कर देगा मरने के लिए, यहाँ कि बेटियां भी चंद पेसो में अस्मत तक बेच देती है  परिवार का पेट भरने के लिए और ये सब कुछ उस देश में होता है जहाँ घोटाले भी अब "लाखो करोड़" से कम के नहीं होते, इन सब के लिए जिम्मेदार है तथा कथित एवं छतिग्रस्त "लोकतंत्र"
ॐ जय भारत जय हिंद बन्दे मातरम

सोमवार, 19 सितंबर 2011

"मीडिया से तिन सवाल जिन्दा है जमीर तो दे जबाब"


देशद्रोहियो, भ्रष्टाचारियो, कालेधनकुबेरो, पूंजीपतियो, द्वारा चलाये जा रहा "मीडिया" जिसे दुर्भाग्य से तथाकथित लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ भी कहा जाता है, अपने मालिको की डुगडुगी के अलावा भाड़ो का प्रचारक, देश की संस्कृति का बिध्वन्स्क, और देस के आम आदमी को बरगलाने का काम कर रहा है, देश में कुछ करने वालो की तो वैसे ही कमी है और जो करते है उनकी टांग खीचना ही अपना धंधा बना लिया है, इस देश का आम आदमी देश के तथाकथित लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ "मीडिया" से शिर्फ तिन सवाल पूंछता है, यदि कही उसका जमीर थोडा बहुत जिन्दा है तो जबाब दे, "पहला" युगपुरुष बाबारामदेव जो देशद्रोहियो, भ्रष्टाचारियो, कालेधनकुबेरो, पूंजीपतियो, से युद्ध छेड़ रक्खा है देस के आम आदमी के लिए पूरी सच्चाई और ईमानदारी से स्वदेशी, स्वराज्य, सुब्यव्स्था सुशासन देने के लिए योग और अध्यात्म से कर्तब्य परायणता के साथ प्रण और प्राण को लेकर अग्रसर है, यदि हम अध्यात्म में न जाकर ३०० साल के इतिहास को देखे तो "उपदेशक" बहुत मिल जायेगे लेकिन एसा कर्मयौद्धा कोई नहीं मिलता जो सीधे आम आदमी से जुड़ कर समग्र विकास कि क्रांति लाया हो यदि हाँ तो बताये ? वरना साथ दे या न दे बाबारामदेव के बिरुद्ध दुष्प्रचार करना बंद करे.. "दूसरा" विकिलीक्स द्वारा छोड़े गए सगुफो (बिस्वस्नियता संदेहास्पद है) को खूब उछालता है यहाँ तक की मायावती के सैंडल तक निकाल कर उछाल देता है, लेकिन बिदेसी बैंको में जमा काले धन के नामो की एक लिस्ट भी मीडिया के पास है उनका नाम मीडिया के जुबान पर क्यों नहीं आ रहा है क्या वो नाम उन्ही के मालिको का है ? कम से कम एक सवाल तो मीडिया पूंछ ही सकता है और अगर नहीं तो क्यों ?????? "तीसरा" नरेन्द्र मोदी जिस दिन से गुजरात के मुख्यमंत्री बने है उसी दिन से मीडिया दुष्प्रचार में लगी हुई है, तिसपर गुजरात के दंगो के बाद तो बस उसे जैसे समय ही रुक गया हो "मिडिया बनाम मोदी" का तृतीय बिस्व युद्ध अभी तक ख़त्म नहीं हुआ जबकि नरेंद्र मोदी भारत के पहले मुख्यमंत्री है जिन्होंने अपने काम का लोहा अपने दुश्मनों से भी मनवा लिया और "माई बाप कांग्रेश भी कहने को मजबूर हो गई की "बिकास की बात छोडिये लासो के सौदागर की बात कीजिये" ख़ैर ये निर्विवाद साबित हो चूका है की नरेंद्र मोदी देस के सबसे काबिल मुख्यमंत्री है लेकिन मीडिया चाहती है की "नरेंद्र मोदी माफी मांगे" लगभग हर मीडिया वाले ने ये सवाल मोदी से किया, हजारो बार यही सवाल, देश का आम आदमी मीडिया से जानना चाहता है कि किस बात के लिए नरेंद्र मोदी माफी मागे ? गोधरा में नर पिचासो ने पूरी योजना बनाकर निहत्थे यात्रिओ को ट्रेन की एक बोगी में बंद करके जला दिया इस अमानवीय "क्रिया" को मोदी प्रसासन रोकने में नाकाम रहा तो अब उसका कोई ओचित्य नहीं है क्युकी गुजरात का विकास करके मोदी ने गोधरा के उन सहिदो से, और गुजरात की जनता से माफी माग ली और जनता ने उन्हें माफ करके दोबारा मुख्यमंत्री बनाया, रही बात बाद में हुई "प्रतिक्रिया" की तो दुनिया के किसी धर्म, या इतिहास में कभी किसी के माफी मागने का उदाहरन नहीं मिलता क्युकी "क्रिया" की "प्रतिक्रिया" तो प्राकृतिक नियम है जिसके लिए कोई जिम्मेदार नहीं होता बल्कि "प्रतिक्रिया" ही "क्रियाओं" कि पुनाराब्रित्ति के न होने को सुनिश्चित करता है ??????? ॐ बंदेमातरम जयहिंद                                                                                                              


ॐ जय भारत जय हिंद बन्दे मातरम

बुधवार, 14 सितंबर 2011

"गाँधीवादी" श्री अन्नाहजारे जी सच

"गाँधीवादी" श्री अन्नाहजारे जी को कल एक टी. वी. चैनल से कहते देखा "मनमोहन सिंह बड़े अच्छे है" "सोनिया गाँधी बड़ी अच्छी है" "कांग्रेस में सभी बड़े अच्छे है" कुछ लोगो से उन्हें सिकायत है जैसे दिग्बिजय सिंह "वो भी बड़े अच्छे थे साथ में वर्षो काम भी किये अब न जाने क्या हो गया है" हाँ ये अलग बात है की "चेहरे की मुस्कराहट और आँखों का संतोष बिना शब्दों के दिग्बिजय, कपिल, तिवारी, जैसे लोगो को अपनी टी. आर. पि. बढ़ाने के लिये सहृदय धन्यवाद और "कांग्रेस कि विजय" के लिए आशीर्वाद दे रहा था" ख़ैर आगे अपने ब्याख्यान में बुरे लोगो के बारे में भी प्रकाश डालते हुए कहा "अडवाणी को रथयात्रा कि क्या जरुरत है लोकपाल बिल बनवा देते" चुटकी लेते हुए इस बात को तो बस जुमले कि तरह इस्तेमाल किया सिर्फ अगले बुरे आदमी "बाबा रामदेव" पर प्रहार करने के लिए "मैने तो बाबारामदेव से उसी दिन फोन करके रिश्ता तोड़ लिया था जिसदिन अपनी सेना बनाने कि बात बोली थी" ख़ैर "गाँधीवादी" श्री अन्नाहजारे जी आपने बहुत अच्छा किया रालेगावं से जिस बिचारधारा (आदमी) कि ऊँगली पकड़ कर दिल्ली तक आये थे उसे दिल्ली से उठवा कर हरिद्वार फेकवा दिया बहुत अच्छा किया, अगर आप एसा न करते तो इतिहास अधुरा रह जाता, कहते है दोस्त का दुसमन कभी दोस्त नहीं होता और बाबा रामदेव ने तो आपके कुनबे से ही दुश्मनी कर ली, कोई बात नहीं "गाँधीवादी" श्री अन्नाहजारे जी अब तो ये देश ही तय करेगा कि उसे २०१४ में वर्णशंकर के "युवराज" की ताजपोशी एक "गाँधीवादी" के हाथो देखना मंजूर है या एक कर्मबीर, समग्र बिकास, सम्पूर्ण स्वतंत्रता, के पथ पर अग्रसर बाबा रामदेव जी जैसे के साथ अपने उचित हक़ के लिए लड़ना
ॐ जय भारत जय हिंद बन्दे मातरम

मंगलवार, 13 सितंबर 2011

आज़ादी की दूसरी लड़ाई(?)


आज़ादी की दूसरी लड़ाई(?)....शीषर्क से लिखा नगेश कुमार नेहरा का लेख तात्कालिक परिस्थितियो, पात्रो, और घटनाओ को आधार मान कर प्रथम दृष्टया काफी अच्छा है लेकिन दृष्टिकोण गलत है, "कांग्रेस" और "गांधीजी" को अलग कर के देखना ही दिन के दोपहर में आंख बंद करके चाँदनी रात की अनुभूति करने जैसा है, "कांग्रेस" के बिना "गांधीजी" और "गांधीजी" के बिना "कांग्रेस" की परिकल्पना करना ही असम्भव है, "कांग्रेस" की यु. पि. ये. सरकार और "गाँधीवादी" श्री अन्नाहजारेजी दोनों एक दुसरे के पूरक एवं एक ही सिक्के के दो पहलु है, कहते है इतिहास हमेसा खुद को दोहराता है, एक बार फिर १९१७ से १९४७ के तिन दसक का इतिहास लिखा जाने वाला है, यदि समय रहते आम आदमी को बात समझ में नहीं आई तो २०१४ में वर्णशंकर के "युवराज" की ताजपोशी एक "गाँधीवादी" के हाथो देखना देश की मज़बूरी बन जाएगी, क्युकि पूंजीपतियो, कालेधनकुबेरों, और देशद्रोहियो ने "चक्रब्यूह" कि संरचना कर दी है, आम आदमी कि आशाएं और देश हित रूपी "अभिमन्यु" को कर्ण, क्रिपाचार्य, और द्रोणाचार्य रूपी "कार्यपालिका" के घेरे में लेकर भीष्म रूपी "बिधयाका" के सहयोग और समर्थन से "अश्वस्थामा" रूपी "पूंजीपतियो, कालेधनकुबेरों, और देशद्रोहियो" द्वारा एक बार फिर मार दिया जायेगा और संजय रूपी "पूंजीपतियो, कालेधनकुबेरों, और देशद्रोहियो" कि डुगडुगी "मीडिया" ध्रितराष्ट्र रूपी "न्यायपालिका" को संसोधित परिद्रिस्य दिखा कर गुमराह करता रहेगा, ख़ैर जो भी हो आम आदमियो को अपने हितो कि रक्छा खुद साहस, धैर्य, एकता, और विवेक से किसी आक्रामक, क्रांतिदूत, सम्पूर्ण ब्यवस्था परिवर्तन, पूर्ण स्वराज्य, के लिए कटिबद्ध को आगे करके लड़ना होगा, चलते चलते एक सवाल आपसे, क्या १९४७ में हम आजाद हुए थे ? यदि हाँ तो कोई बात नहीं, बस मुझे माफ करना, और यदि नहीं तो एक बार फिर १९१५ से १९४७ का इतिहास पढना तथा उस दौरान हुई गलतियो को मत दोहराना | ॐ बंदेमातरम जयहिंद


ॐ जय भारत जय हिंद बन्दे मातरम

सोमवार, 12 सितंबर 2011

श्री बाबा रामदेव जी को "कहिये जनाब"


श्री बाबा रामदेव जी को "कहिये जनाब" कार्यक्रम में बोलते देख बहुत संतोष हुआ, बाबा काफी आक्रामक लगे कुछ समय पहले तक लम्बे सवाल होते थे और बहुत छोटा सा बाबा का जबाब जो कुछ लोगो को तो समझ में आती थी, बहुत लोगो को नहीं, लेकिन अब आपकी बात "गुरुकुल" वाले भी समझेगे "और कान्वेंट वाले भी" ख़ैर "गीता" में लिखा है "आक्रमण ही सुरक्छा का प्रथम उपाय है" इसको तो कान्वेंट, कैम्ब्रिज, और हावर्ड वाले भी समझ जायेगे
ॐ बन्दे मातरम जय हिंद              

ॐ जय भारत जय हिंद बन्दे मातरम

शनिवार, 10 सितंबर 2011

"सात सितम्बर के सहीदो को कोटि कोटि नमन, और नपुंसक सरकार और उनके कर्णधारो को साधुवाद"

"सात सितम्बर के सहीदो को कोटि कोटि नमन, और नपुंसक सरकार और उनके कर्णधारो को साधुवाद" दिल्ली हाईकोर्ट के सामने मारे गए सहीद देस के यैसे सिपाही थे जिन्हें बिना हथियार और बिना सुरक्षा के "हथियार बंद आतंकियो" से लड़ने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है, आतंकियो और उनके हिमायतियो को खुला छोड़ दिया गया है और जो पकडे गए है उनकी खातिरदारी की जा रही है, १९४७ से पहले की तरह सजा कम, सजा का नाटक किया जा रहा है जो अंग्रेज अपने "अंग्रेज" गुनहगारो को बचाने के लिए किया करते थे, "देश के कायर कर्णधारो ने तो कमांडो के बीच खड़े हो कर अफसोस जताने की खानापूर्ती की, लासो और आंसुओ की कीमत भी तय कर दी और देस को और भी आंसू बहाने पड़गे रोका नहीं जा सकता बोल कर अपना कर्तब्य भी निभा दिया" जो भी हो इससे ज्यादा की उम्मीद देश को इनसे करनी भी नहीं चाहिए, लेकिन देश के बीर जन नायको, कर्णधारो से मेरा अनुरोध है की आप अपनी या अपने परिवार की सुरक्छा हटा दीजिये, आधे से ज्यादा सुरक्छा ब्यवस्था को आपने कुछ हजार अपने लोगो के लिए फसा रखा है, आप बीच से हट जाइये देश की सेना और देश की पुलिश पूरी तरह से समर्थ है देश की रक्छा के लिए, और देश के हर गावं, गली, मोहल्ले में माँ भारती के लालो को हथियार देकर पुलिश के संरक्छन में "बंदेमातरम" सुरक्छा टोली तैयार कीजिये, किसी भी भारतीय का एक बूंद खून धरती पर गिर जाय तो ..............?
ॐ जय भारत जय हिंद बन्दे मातरम

मंगलवार, 6 सितंबर 2011

"अहिंसावाद" कायरो की ढाल और पूंजीपतियो की तलवार


"मै अहिंसावादी नहीं हूँ" हाँ ये अलग बात है कि कभी जानबूझ कर एक चीटी भी नहीं मारा, फिर इस तरह से देखा जाय तो मै हिंसावादी भी नहीं हूँ, बात १९१४ कि है मेरी उम्र १५ साल कि है मेरा घर एक धार्मिक किन्तु छोटे सहर के अंग्रेजों कि छावनी के करीब है पिता किशान और मै आवारा (पिता कि निगाह में) बंदेमातरम, इन्कलाब जिन्दावाद, अंग्रेजो भारत छोडो के नारे लगाने वाला, रोज कही न कही भीड़ में सामिल हो कर यही करते, तबतक, जबतक गोरे अंग्रेज अफसर कि अगुआई में काले अंग्रेज हमें भगाते नहीं, एक दिन काले अंग्रेज ने "गोरे" से हमारी पहचान बता दी फिर क्या था एक गोरा अंग्रेज अफसर चार गोरे सिपाही और २० काले अंग्रेज सिपाही मेरे कर्मो की सजा मेरे परिवार को देने के लिए घर पे धावा बोल दिए घर में माँ के आलावा दो बहने भी थी एक मुझसे बड़ी १६ साल की सादी हो गई थी बिदाई नहीं हुई थी, दूसरी १३ साल की मुझसे छोटी, मुझे और मेरे पिता को मेरे आंगन में ही बांध दिया और हमें खूब मारा इतना मारा की पिता जी कब मर गए पता ही नहीं चला बस आवाज आनी बंद हो गई, गाँव के नौजवान आगे आने की कोसिस की तो काले अंग्रेजो ने डरा कर भगा दिया फिर भी कुछ नौजवान आगे आना चाहते थे लेकिन "गांधीवादियो" ने अहिंसा परमोधर्म का पाठ पढ़ा कर कायर बना दिया जुल्म की इन्तहां तो तब हुई जब हमारे सामने ही मेरी माँ और बहनों पर अंग्रेज भूखे भेड़िये की तरह टूट पड़े उस एक छण में ही "गांधीवाद" का अर्थ और परिणाम दोनों सामने था अब तो मेरे पास न मेरा गाल बचा था दूसरा थप्पड़ खाने के लिए और ना हि दूसरी माँ और बहन उन्हें लाकर देने के लिए मै "गाँधी" के आदेश का कैसे पालन करता "मरता क्या न करता" फिर क्या था माँ भारती का नारा लगाया "बंदेमातरम" और रन चंडी बिन्ध्य्वासनी का घोष इतनी जोर से किया कि रस्सियो का बंधन कब टूटे पता नहीं कोई कुछ समझ पाता उससे पहले ही मै रसोई में भागा मिटटी के तेल से भरा डब्बा और माचिस उठा कर बाहर भागा काले और गोरे सिपाही सोच रहे थे की मै जान बचाने के लिए इधर उधर भाग रहा हूँ लेकिन मेरे दिमाग ने तो रणचंडी का नाम लेते ही एक छण में सोच लिया था की आगे क्या करना है बाहर निकलते ही दरवाजे पर लगी छप्पर में आग लगा दी घर के चारो तरफ छप्पर लगी थी पसुओ को बाधने के लिए, बस मै तेल डालता गया आग ने पुरे घर को घेर लिया कोई नहीं बचा सारे के सारे २५ सिपाही काले और गोरे दोनों जल कर राख हो गए, लेकिन उस आग ने मेरे पिता, मेरी माँ, और बहनों को भी जला डाला मेरे मन कि आस्था "अहिंसावाद" और "गांधीवाद" को भी जला कर राख कर दिया अब मै अकेला नहीं था मेरे साथ सात और नौजवान हो लिए थे आपस मै परिचय बस "बंदेमातरम" था अंग्रेजो का हमला हमारे घर पांच बजे सुबह सुरु हुआ था और उपरोक्क्त सारी घटनाये आधे घंटे मे घट चुकी थी हम पागल हो चुके थे हमारे हाथो मे मिटटी के तेल के डब्बे और जलती हुई मशाले थी "बंदेमातरम" का नारा लगाते हुए छ बजते बजते हमने अंग्रेजो कि छावनी पर धावा बोल दिए अब तक हमारी संख्या पचासों के उपर पहुँच चुकी थी ज्यादातर हमारे गावं के नौजवान ही थे लगभग एक किलोमीटर के दायरे मे बसी पूरी छावनी को हमने आग के हवाले कर दिया, हमारे कुछ साथी भी अपनी जान गवा चुके थे, साम होते होते हमारे सभी साथी अलग अलग भूमिगत हो गए, पूरा गावं ख़ाली हो चूका था अंग्रेजो ने बाहर से सेनाये बुलाकर साम होने से पहले मेरे गावं पर धावा बोलकर जला डाला लेकिन तबतक इन्सान तो क्या कुत्ते भी गावं छोड़ चुके थे बस और बस मै अकेला अपनी माँ और बहन कि लाश के पास बैठ कर रो रहा था अंग्रेज फिर मेरे घर के करीब भी नहीं आये कब तक रोता ? सोचा पिता, माता और बहनों कि अस्थिया ले कर गंगा मे बहा दू पर चाह कर भी येसा कर न सका, सरीर ने साथ नहीं दिया फिर मुझे अहसास हुआ कि मेरा तो सरीर ही मेरे साथ नहीं है मै बस एक सोच हु बस एक आत्मा अपने सवालों के साथ आज भी भटक रहा हु, मेरी आत्मा ने मेरे सरीर को कब?, क्यों?, कैसे? और कहाँ छोड़ा?, मैने तो आजादी मागने कि गलती कि थी पर मेरे पिता, माँ,  और बहनों ने कौन सी गलती कि थी? मै तो "अहिंसावादी" "गाँधीवादी" था फिर ये सब मेरे साथ क्यों हुआ? गांधीजी ने तो हिंसावादी कह कर हमसे नाता ही तोड़ लिया पास ही नहीं आने देते आखिर क्यों? मैने जो भी किया अगर वो न करता तो क्या करता? अंत मे, हमारे साथ लाखो आत्माए हमारी तरह ही इन्ही सवालों के साथ भटक रही है क्युकी भारत के लाखो गावो मे लगभग येसी ही घटनाये दुहराई गई है, और अब आखिरी सवाल आपसे (जिन्दा इंसानों से) "अहिंसावाद" का शाब्दिक अर्थ और पर्यायवाची शब्द शिर्फ़ और शिर्फ़ "कायरता" होता है यदि नहीं तो बताये?                  


ॐ जय भारत जय हिंद बन्दे मातरम

शनिवार, 3 सितंबर 2011

"मुद्दा" बनाम "तथाकथित लोकतंत्र"

तथाकथित भारतीय लोकतंत्र (पूजीवादी अर्थ ब्यवस्था) अब सक्रमण काल से गुजर रहा है, अपने अंतिम चरण में होने के कारण, ख़त्म होते आस्तित्व को बचाने के लिए पूरी ताक़त झोंक चूका है ईस लिए आम आदमी तथा उनके नायको (स्वामी रामदेवजी जैसे लोगों) को भयभीत और त्रसित किया जायेगा, तथाकथित भारतीय लोकतंत्र (पूजीवादी अर्थ ब्यवस्था)लोकतंत्र के चारो खम्भों (बिधाइका, कार्यपालिका, न्यायपालिका, और सुचना तंत्र) को दीमक की तरह चाट कर खोखला कर दिया है, तथाकथित भारतीय लोकतंत्र (पूजीवादी अर्थ ब्यवस्था) आज कुछ हजार लोगों (पूंजीपतियो) द्वारा काले धन के बल पर बंधक बना लिया गया है अब युद्ध सीधे "आम आदमी" जो झंडा उठा कर सड़क पर उतर चूका है और "पूंजीपतियो" जो अपने बंधकों (बिधाइका, कार्यपालिका, न्यायपालिका, और सुचना तंत्र) को आगे करके लड़ रहा है, के बीच छिड चूका है, ये लड़ाई अब नहीं रुकेगी जीत आम आदमी की हि होगी, ईस धर्मयुद्ध में भले हि लड़ाई "आम आदमी" और "पुजिपतिओं" के बीच हो, लेकिन कुल सात पक्छ होंगे १-आम आदमी, २-आम आदमियो के संचालक, मार्गदर्शक व् नायक ३-बिधाइका, ४-कार्यपालिका, ५-न्यायपालिका, ६-और सुचना तंत्र, ७-पूंजीपती

उपरोक्त सातो पक्छ से मेरा अनुरोध है कि युद्ध को रोका तो नहीं जा सकता लेकिन धर्मयुद्ध मानकर लड़ा जाय तो समय और हानि दोनों को कम किया जा सकता है


१-पहला अनुरोध आम आदमी से है बेचारा, गरीब, लाचार, मजबूर, असहाय, किसान जैसी उपाधिया हमें देने वाले भी पूंजीपती है और बनाने वाले भी, हमारी लड़ाई सदीओ से फले फूले घाघ देश द्रोहियो से है जो समाज के बहुतेरे सिखंडियो कि आड़ में छुपकर हमारा खून चूसते रहे है अब सीधी लड़ाई पर उतर आये है, काले धन के बल पर कुछ तो संसद, राज्यसभा, बिधानसभा, बिधानपरिसद, होते हुए सत्ता पर काबिज हो गए और कुछ परदे के पीछे से नियंत्रण कर रहे है एसे हालात में आम आदमी को अपने "मुद्दों" (काले धन को राष्ट्रिय संपत्ति घोषित करना, देश से लूटे हुए पैसे को बिदेशो में जमा करने को देशद्रोह करार देना, ब्यवस्था परिवर्तन जैसे शिछा, चिकत्सा, कानून, अर्थ और कृषि के मामले में शम्पूर्ण क्रांति, टुकडो में कुछ भी नहीं चाहिए) को समझकर, अपने "नायको" (क्रांति दूत श्री बाबा रामदेवजी के अलावा कोई हो ही नहीं सकता) को पहचानकर और एक जुट होकर देश के मजबूत तिरंगे झंडे के साथ सडक पर उतरना होगा


२-दूसरा अनुरोध आम आदमियो के संचालको, मार्गदर्शको, नायको, देश की सभी स्वयम सेवी संस्थाओ के संचालको और देश हित में काम करने वाले स्वयम सेवको से है की यदि आप देश भक्त है, देश हित को सर्वोपरि मान कर चलते है, आम आदमी और देश का मुद्दा ही आपका लक्ष्य है, "यदि आप को इस देश का दूसरा गांधीजी नहीं बनना है", यदि आप को भगतसिंह को, शुभाष चन्द्र बोश को, और चन्द्रसेखर आजाद जैसे क्रान्तिकारियो को अपना आदर्श बनाना है तो बिना किसी मतभेद के अविलम्ब भारत स्वाभिमान से जुड़कर श्री बाबारामदेव जी के नेत्रित्व में एकमत होकर समग्र क्रांति का आवाहन करे, देश का हर आम आदमी आपके साथ होगा


३-तीसरा अनुरोध बिधाइका से है, कहने को तो समाज सेवक है आप, देश के नायक है आप, देश के कर्णधार है आप, देश के बिधाता है आप, लेकिन चोर, गद्दार, देशद्रोही, भ्रष्टाचारी, अत्याचारी, जैसे नामो से अब देश की जनता आप को बुलाती है और इसके लिए आप खुद जिम्मेदार है सच तो ये है की आपके बीच मात्र ३०% ही चोर, गद्दार, देशद्रोही, भ्रष्टाचारी, अत्याचारी है जिनमे से १५% को आपने खुद अंदर बुला लिया और १५% लोग सत्ता के नशे में चूर होकर चोर, गद्दार, देशद्रोही, भ्रष्टाचारी, अत्याचारी बन गए, मेरा अनुरोध सिर्फ उन ७०% लोगो से है की आप देश की आम जनता का साथ दे, सत्ता का लोभ त्यागकर बाहर आयें और देश की लाज बचाये, देश को २०२० तक बिश्व का नेता बनायें, अगला एक दसक बिस्व के हजारो साल के इतिहास पर भारी होगा आपको तय करना है इतिहास में अपना अस्थान


४-चौथा अनुरोध कार्यपालिका से है जो हमेसा से चोरो, गद्दारों, देशद्रोहियो, भ्रष्टाचारियो, अत्याचारियो, तानाशाहों के हाँथो एक निर्जीव हथियार की तरह इस्तेमाल होते रहे है, चाहे इतिहास के अत्याचारी तानाशाह रहे हो, क्रान्तिकारियो से लेकर आम आदमी तक का दमन करने वाले अंग्रेज रहे हो या फिर आज सत्ता के नशे में चूर देशद्रोही और भ्रष्टाचारी सबने आपको(कार्यपालिका) हमारे (आम जनता) खिलाफ इस्तेमाल किया है लेकिन हम जानते है की आप निर्जीव नहीं सजीव है हमारे अंग है हम पर लाठी या गोली चलाने के बाद भले ही तानाशाही जस्न मनाये, पर घर जाकर आपने माँ की टूटी हड्डिया देख कर आंसू रोक नहीं पाए होगे, बाप का फुटा सर देख कर दिल चीख उठा होगा, भाई की लाश देख कर पागल हो गए होगे और फिर आत्मा की आवाज नहीं दबा पाए, परिणामस्वरूप पुलिस और सेनाओ में होने वाले बिद्रोह को इतिहाश देखा है, ख़ैर आगे हम आपके विवेक पर छोड़ते है इस धर्मयुद्ध में आप अपनी भूमिका खुद तय करे हा इतना जरुर कहेगे की भारत के संबिधान में भी "आधी रात को सोये हुए माताओ, बहनों, बेटियो, बुजुर्गो, संतो, साधुओ, सन्यासियो पर लाठी और गोली चलाना किन्ही भी परिस्थितियो में जायज है" नहीं लिखा है


५-पांचवा अनुरोध न्यायपालिका से है कि मंदिर के बाद यही वो जगह बची है जहा भ्रष्टाचार रूपी संक्रामक बीमारी के असर से ९०% तक बचा है १०% जिन्हें आप राज्यसभा और लोकसभा में चल रहे महाभियोग के रूप में देखा जा सकता है ख़ैर आम आदमी तो बस न्याय मंदिर में जल रही न्याय कि "लौ" को ही अपना अंतिम सहारा समझता है और आशा ही नहीं बिस्वास भी है कि आप इस "लौ" को बुझने नहीं देगे


६- छठा अनुरोध सुचना तंत्र से है, कि हम जानते है इस धर्मयुद्ध में सबसे ज्यादा धर्म संकट में आप ही होगे एक तरफ आपका दर्शक (आम नागरिक) होगा दूसरी तरफ आपका अन्नदाता (आपका मालिक पूंजीपती), आपकी आत्मा आम आदमी के साथ होगी क्युकि न्याय आम आदमी के साथ होगा लेकिन आपका सरीर नमक के बोझ तले दबा मालिक का साथ देने को मजबूर करेगा और इस अंतर्द्वंद से लड़ते हुए आप क्या करेगे हम आप पे छोड़ते है, हाँ इतना जरुर कहेगे की अब इस देश को एक और गाँधीजी की जरुरत नहीं है "ब्यक्तित्ववाद" के तले आम आदमी का "मुद्दा" दब कर रह जाता है, नया उदहारण ले लीजिये श्री अन्नाहजारे जी के निचे आम आदमी का मुद्दा दबा कर मार डाला आपलोगों ने, अब देश को अन्नाहजारे जी कि दिनचर्या दिखा कर पका रहे है जिसका आम आदमी की समस्याओ से कोई मतलब ही नहीं है ये अलग बात है की येसा करने के लिए आपके मालिको का सक्त निर्देश होगा, फिर भी यदि आप देश हित चाहते है देश भक्त है तो किसी भी ब्यक्ति को मुद्दे से ऊपर उठाने कि कोशिश न करे


७-सातवा सन्देश पूंजीपतियो, देशद्रोहियो, और भ्रष्टाचारियो को (यहाँ अनुरोध शब्द का इस्तेमाल नहीं कर सकता क्युकि कसाई और "गाय" के बिच ये शब्द अपना अर्थ खो चूका होता है) दुनिया का कोई भी तानाशाह हाँथ में देश का झंडा लिए नारे लगाती भीड़ के लहर में खुद को टिका कर रख नहीं पाया है क्युकि बर्दास्त कि हद जिस दिन ख़त्म हो जाती है उस दिन झंडा सर पे और डंडा हाँथ में होता है इतिहास बनते देर नहीं लगती, समय रहते लाचारो, गरीबो, बेचारो, मजदूरो, किसानो, को उनका जायज हक़ छोड़ दे तो ही अच्छा होगा
ॐ जय भारत जय हिंद बन्दे मातरम

सोमवार, 29 अगस्त 2011

जस्न?????????

क्या जस्न अग्निवेश की साजिश की सफलता के लिये मनाया जा रहा है तब तो ठीक नहीं है क्युकी अग्निवेश तो तिन दसक से सरकारी गलियारों में "नीरा राडिया" बन के घूम रहे है दलाली ही उनका धंधा है, उनकी उपस्थिति ही साजिश का होना प्रमाणित हो जाता है, तिस पर उनके पीछे खिलाडियो के खिलाडी कपिल सिब्बल जो थे, बात भी की और विडियो भी चलवा दिया, दलाली के इस धंधे में तो यैसा होता ही रहता है जस्न जैसी तो कोई बात नहीं है! क्या जस्न आम आदमी की जीत को लेकर है तो भी ठीक नहीं है क्युकी देश और देश का "मुद्दा" तो छ महीने पहले जहा खड़ा था वहा से एक कदम भी आगे नहीं बढ़ा है, रहा नारा लगाने, खुश होने तो आंसू पीकर सैकड़ो साल से देस की जनता यही तो करती आ रही है उम्मीद बस उम्मीद लेकिन धूर्तो से प्रार्थना है अवाम की भावनाओ से मत खेलो बस वर्ना भीड़ का कोई चेहरा नहीं होता भड़क जाय तो दुनिया के बड़े से बड़े तानासाह को पंचतत्व में मिला दिया है! क्या जस्न श्री अन्नाहजारे जी की जीत का है तो भी बात समझ में नहीं आ रही है क्युकी "गाँधीवादी" श्री अन्नाहजारे जी को आज नहीं तो कल इस बात का जबाब देश को देना ही पड़ेगा की पुजीपतियो की बपौती सरकार की डुगडुगी (मिडिया) २४ घंटे "अन्ना" दर्शन बिलाश राव देशमुख के निर्देसन में अनचाहे ही कराती रही और सच्चाई तो अब अनचाहे ही देशमुख जी के ही मुखारबिंद से ("परदे के पीछे हर पल मै सुरु से अन्ना जी से जुड़ा रहा") बाहर आ चुकी है ! हाँ आज चाहे तो कांग्रेस जरुर जस्न मना सकती है क्युकी मुद्दा न तो लोकपाल का था और न ही देस की भोली भाली जनता के हित का था, मुद्दा सिर्फ और सिर्फ कांग्रेस मुक्ति का था (जो घोटालो, भ्रष्टाचारो, दलालियो, में सभी शीर्ष नेताओ के नाम उन्ही के सिपहसालारो जो अब जेल में है द्वारा भरी अदालत में लिया जाने लगा था) और "अन्ना" बंदना (श्री अन्नाहजारे जी को "अन्ना" बनाने में फायदा सिर्फ और सिर्फ कांग्रेस को हुआ है) का था उसमे कांग्रेस पूरी तरह से सफल रही है नाचे गाये बल्ले बल्ले करे अंत में इस्वर 
"किरन बेदी",  "अरविन्द केजरीवाल" और "देश की आम जनता" को दिल टूटने पर सहन करने की छमता प्रदान करे क्युकि यही तीनो तो गांधीजी के त्रिमूर्ति सिधान्तो को गाँधीवादी अन्नाहजारे जी का आशीर्वाद मान कर ढो रहे है


ॐ जय भारत जय हिंद बन्दे मातरम

शुक्रवार, 26 अगस्त 2011

श्री अन्नाहजारे जी अब बस भी करो

"श्री अन्नाहजारेजी" आप कइ दिनो से अनसन पर है अब हमारे जैसे आम आदमी को भि आपके स्वास्थ कि चिन्ता होने लगी है, भले हि हम आपके सामने बैठने वाली भीड मे से एक आम आदमि है, पर आपकि बगल मे बैठकर तस्वीर लेकर उसका फ़ायदा उठाने वालो मे से तो बिलकुल नहि है, इसलिये इस्वर से प्रार्थना है कि ओ आपको अनसन छोड देने कि प्रेरणा दे, क्युकि आपको, आम आदमी को, सत्ताधारी कान्ग्रेस को, और सत्ता कि आश लगाये बिपक्छ को जो मिलना था वो मिल चुका है अगर इस बात को खुल कर बोले तो "देश के आम आदमी को न कुछ मिलना था न मिला है न मिलेगा" "आप तो गान्धीवादी है आपको देश का "अन्ना" बनना था सो बन हि गये है" "बिपक्छ पर कान्ग्रेस पहले हि ब्रह्मास्त्र (साम, दाम, दन्ड, भेद) चला कर मूक, बधिर, और द्रिश्टि हीन बना चुकि है" "रही बात कान्ग्रेस कि तो वो सात सालो से एक सूत्री कार्यक्रम में लगी हुई है वर्ण शंकर के युवराज को देश की गद्दी सौपना, क्युकी कौरवो (कांग्रेश) के खेमे बाकि सब सिखंडी ही बचे है ये हम नहीं कहते ये कांग्रेसी खुद कहते है, पचास पचास साल के अनुभवी योधा (हम तो उन्हें भीष्म पितामह, या फिर ध्रितराष्ट ही मानते है) जिश सेना में हो पर खुद को लाचार मान ले तो हम क्या कहेगे, ख़ैर आज के संसद की कार्यवाही के कुछ अंश देखे तो हमारी बात समझ जायेगे" "श्री अन्नाहजारेजी"......


ॐजय भारत जय हिंद बन्दे मातरम

पांचवा पैगाम श्री अन्नाहजारे के नाम

"श्री अन्नाहाजारेजी" आपके स्वस्थ रहने कि कामना करते हुए इस्वर से प्रार्थना है कि आपको लम्बी उम्र प्रदान करे, आपका अदम्भ्य साहस, आपका गाँधीवादी ब्यक्तित्व, और आपका अहिंसावादी सिद्धांत हमेसा आपको अमर रखेगा, इश देश के लिए तो आप "अन्ना" है ही कांग्रेस के लिए तो आप प्राणदायी, जीवनदायी, मुक्तिदाता है, माफ़ कीजियेगा जब भी हम आपसे अपने दिल की बात कहना चाहते है तो श्री गांधीजी का सहारा लेना ही पड़ता है क्युकि आप गाँधीवादी है गाँधी का ब्यक्तित्व आसमान से भी ऊँचा, महानता हिमालय से भी बिशाल और दिल शागर से भी चौड़ा था, लेकिन जब उनके शिद्धान्तो, और नीतिओ को राष्ट्रवादी निगाह से आम आदमी के हितो को सामने रख कर देखा जाय तो लगता है गाँधीजी अपने पुरे राजनैतिक जीवन में अपने आप से ही लड़ते रहे, खुद को बनाते और बिगाड़ते रहे, अपने शिद्धान्तो को लोगो से मनवाते और खुद तोड़ते रहे जिसका परिणाम है हमारी आज की गुलामी और "आपका अनशन मानना और मनवाना सब कुछ" इतिहास के रोचक पन्ने को पढने जैसा लगता है, "कांग्रेस और आप" आज जो भी कर रही है थोडा बहुत इतिहास जानने वाला भी क्या? कैसे? और क्यों? को समझ सकता है "अहिंसा परमोधर्म" सबसे बड़ा सिद्धांत गाँधीजी का था लेकिन दोनो विश्वयुद्धों में अंग्रेजों का साथ देने, भारत की स्वतंत्रता के बाद नेहरू को प्रधानमंत्री का दावेदार बनाने के परिणाम स्वरूप देश का बटवारा इत्यादि उनके अपने ही सिद्धांतो की धज्जिया बिखेर देता है पुरे भारतीय उपमहाद्वीप में जितने लोग १६०० से लेकर १९४७ तक स्वतंत्रता संग्राम में नहीं मरे थे उससे ज्यादा गाँधीजी के अहिंसावादी राजनैतिक फैसलों से मारे गए और ये हम नहीं इतिहास कहता है चौरी चौरा कांड का बिरोध, शुबास चन्द्र बोस का बिरोध, इरविन समझोता, क्रान्तिकारियो का बिरोध, खिलाफत आन्दोलन इत्यादि बहुत से उनके निर्णयों को उनके अपने ही शिद्धान्तो को कुचलता हुआ लगता है ठीक उसी तरह आज २०११ में एक क़ानूनी मसले को लेकर जो देश कि लगभग १०० समस्याओ कि एक पूरक समस्या है, आपका आगे आना देश की आम जनता को तो कुछ नहीं बल्कि कांग्रेस को ही जीवन दान दिया है, दुसरे शब्दों में कहा जाय तो देश कि समस्याओ के बट ब्रिक्ष के समूचे पेड़ से एक टहनी तोड़ने कि कोशिश कर रहे है और आप जानते ही नहीं मानते भी है कि इससे ६५% तक भ्रष्टाचार ख़त्म होगा, आप भ्रष्टाचारी को सजा दिलाने कि बात कर रहे है जिसके लिए लोकपाल बिल चाहते है लेकिन देश कि समस्या भ्रष्टाचारी नहीं भ्रष्टाचार है, आपके कारण "समग्र ब्यवस्था परिवर्तन और काले धन का मुद्दा जो आम आदमी के लिए पूर्ण स्वराज्य के बरार है बाबारामदेव द्वारा की हुई सालो की मेहनत लोगो में जग रहा समग्र क्रांति का उत्साह सब कुछ पर आपने पानी फेर दिया, अगर आपने दो अनसन और एक साल में लोकपाल बिल बनवा भी लेते है (जो की असंभव है ये आप भी जानते है और कांग्रेस भी) तो एसी ही १०० समस्याओ के लिए २०० बार अनसन और १०० साल की जरुरत होगी क्या देश इस बात के लिए तैयार है देश की जनता २१११ तक इस ब्यवस्था को झेलेगी ?, आप गाँधीवादी है, "श्री अन्नाहाजारेजी" किशी के ब्यक्तित्व की महानता या उसके द्वारा किये राजनैतिक निर्णय किसी देश को पूरी धरती पर छिड़े पूजीवादी युद्ध में एक कदम भी आगे नहीं ले जा सकता, यदि आप गाँधीवादी है, गाँधीजी जितने महान और आदर्शवादी है तो आप द्वारा किये गए निर्णयों का असर भी उतना ही प्रभावसाली होगा, "श्री अन्नाहाजारेजी" आपसे छमा मागते हुए अंतिम लाइन लिखना चाहता हु कि मै सिर्फ एक राजनैतिक बिष्लेसक हु इस नाते बहुत सीधे शब्दों में कहू तो बाबा रामदेवजी द्वारा चलाया जा रहा आन्दोलन ही इस देश को पूर्ण स्वराज्य दिला सकता है और उनसे आप पहले जुड़े भी रहे है, अगर इतिहास कि नजर से देखे तो आप गाँधीजी और बाबा रामदेवजी श्री सुबाश चन्द्र बोश कि भूमिका है आप महान गाँधीवादी है लेकिन गाँधीजी द्वारा कि हुई भूल न दुहराए यही देश हित मै होगा | जाय हिंद बंदेमातरम
ॐ जय भारत जय हिंद बन्दे मातरम

बुधवार, 24 अगस्त 2011

चौथा पैगाम अन्नाहजारे के नाम

"श्री अन्नाहाजारेजी" के स्वस्थ रहने कि कामना करते हुए इस्वर से प्रार्थना है कि उन्हें लम्बी उम्र प्रदान करे क्युकि "गाँधीवादी" देश में बहुत कम ही बचे है, ये और बात है कि उनकी मुर्तियो पर मालाये चड़ा कर उनके आदर्शो का खून करने वालो का ही आज बोलबाला है, हो सकता है मेरी सोच गलत हो, वैसे दिल से मै भी चाहता हु की मेरी सोच गलत हो लेकिन आंदोलनों के इतिहास को अतीत में जब भी पलट कर देखते है तो साफ दीखता है कि हमेसा यही हुआ है जो आज हो रहा है, बहुत पीछे १६०० के ब्रिटिश ईस्ट इण्डिया कम्पनी से लेकर फ़्रांसिसी, प्लासी, टीपू सुल्तान, मराठा, और सिख, युद्ध के पन्ने पलटकर देखे तो, तब भी यही हुआ था जो आज हो रहा है, लेकिन १८५७ कि हकीकत बताने वाले हर घर में अपने पिता द्वारा बताये तथ्यों के जानने वाले होगे, भारतीय स्वतंत्रता का प्रथम संग्राम १८५७ जिसने अंग्रेजो को अंदर तक हिला कर रख दिया था, अंग्रेजो को उनका सूर्यास्त लगने लगा था इस आन्दोलन कि तिन मुख्य विशेसताये थी पहला ये आन्दोलन अहिंसावादी सत्याग्रह नहीं, सशस्त्र बिद्रोह था, दूसरा पुरे भारतीय उपमहाद्वीप में एक साथ सुरु हुआ था, तीसरा नेत्रित्व से लेकर आर्थिक ब्यवस्था तक सब कुछ क्रान्तिकारियो के हाथो हुआ था जो आम आदमी थे, १८५७ का भारतीय विद्रोह के पांच मुख्य कारण थे राजनैतिक, आर्थिक, धार्मिक, सैनिक तथा सामाजिक (ब्यवस्था) लेकिन बहुत दुःख होता है जान कर कि जिन कारणों को लेकर इतनी बड़ी क्रांति हुई उन्ही कारणों को लेकर असफलता हाँथ लगी और अगले ९० सालो तक गोरे अंग्रेज हम पर अत्याचार करने में कामयाब रहे, असफलता के कारणों को थोडा बिस्तार से लिखना चाहता हु क्युकि तभी आप १८५७ और २०११ कि समानता को समझ पायेगे, पहला राजनैतिक:- क्रान्तिकारियो और बिद्रोहियो के मकसद एक होते हुए भी तथाकथित नायको (न क्रन्तिकारी थे और नहीं ही बिद्रोही थे) के "मुद्दे" अलग अलग थे, जैसा कि आज २०११ में है, दूसरा आर्थिक;- काले अंग्रेज (गोरे तो करने से रहे) पुजीपतियो ने एक रूपये कि मदत नहीं कि बल्कि गोरो के साथ मिलकर क्रांति का दमन करने में पूरी ताकत झोक दी क्युकि बिद्रोह में उन्हें अपना आर्थिक नुकसान दिखाई दे रहा था, जो आज २०११ में भी हो रहा है, तीसरा धार्मिक:- गोरो द्वारा सभी धार्मिक आस्थाओ पर चोट पहुचाने के कारण क्रांति हुई लेकिन "फूट डालो राज्य करो" के सिधांत को लागु करने में धर्म ही गोरो का सबसे बड़ा हथियार बना, जो आज २०११ में भी हो रहा है, चौथा सैनिक:- सिपहिओ और सैनिको में उठे बिद्रोह को सबसे ज्यादा उनके अधिकारिओ ने दबाया जो गोरो से ज्यादा काले थे, २०११ में भी वही हो रहा है किसानो के भूमि अधिग्रहण से लेकर रामलीला मैदान तक लाठिया और गोलिया चला रहे लोग और चलवाने वाले हमारे अपने ही काले अंग्रेज है हमारे लिए आन्दोलन करने से तो रहे हां घाव पर नमक छिडकने के लिए साथ बैठ कर नमक रोटी खाकर फोटो खिचवाने जरुर आ जाते है, पांचवा सामाजिक (ब्यवस्था):- गोरो द्वारा स्थापित ब्यवस्था दमनकारी, सोसनकारी तथा पुरे सामाजिक ढाचे को नष्ट कर देने वाली थी १८५७ का क्रन्तिकारी बिद्रोह मूलतया ब्यवस्था परिवर्तन को लेकर ही हुआ था लेकिन बड़े अफ़सोस के साथ कहना पड़ता है कि आज तक हम उसी ब्यवस्था में जी रहे है यहाँ तक कि पूरी कि पूरी सबैधानिक ब्यवस्था १८५७ से लेकर १९४७ के बिच प्रतिपादित और स्थापित कि हुई है जिसका मकसद ही पूजीवादी अर्थतंत्र को पोषित और सुरछित रखना था जिसे आज २०११ में हम तथाकथित लोकतंत्र कहते है


आज भी हमारी लड़ाई पूरी कि पूरी ब्यवस्था परिवर्तन को लेकर होनी चाहिए लेकिन एक अनुच्छेद, तथा कुछेक कड़े कानून को बनाकर हम क्या कर लेगे, पूजीवादी अर्थतंत्र द्वारा उत्पादित "कालेधन" कि ताकत जब तक भ्र्स्ताचारियो, देशद्रोहियो, के हाँथ में है, तब तक आदमी का हाँथ खाली ही रहेगा जिस काले धन के बल पर पूरे लोकतंत्र को बंधक बना कर रक्खा है उसी काले धन से लोकपाल को भी बड़ी आसानी से खरीद लेगे, लोकपाल बिल पर "गाँधीवादी" "श्री अन्नाहाजारेजी" कि लड़ाई उतनी ही निरर्थक है जितनी "श्री महात्मा गांधीजी" द्वारा स्वीकृत १९४७ कि स्वतंत्रता


देश के काले अंग्रेज कांग्रेसियो ने १२७ साल गोरे अंग्रेजो के बगल में बैठ कर के कूटनीति सीखी है, १८८५ में स्थापित कांग्रेस और गोरो कि नीतिओ कि समानता आम आदमी और क्रान्तिकारियो को समझ में आने लगा था तभी कांग्रेसियो ने १९२१ में गांधीजी को आगे करके कांग्रेस कि कमान सौप दी गांधीजी युगपुरुष तो थे ही उनकी देव वाणी पूरा देश सुनने लगा लेकिन सबसे दुखद बात है कि गांधीजी द्वारा संकल्पित सौ वादों (नारी उत्थान, ब्यवस्था परिवर्तन, साकाहार, गोरक्षा, भाषा, सिक्छा, स्वास्थ इत्यादि) में से एक वादा भी आज तक पूरा नहीं किया सिर्फ और सिर्फ उनके ब्यक्तित्व का इस्तेमाल किया ख़ैर एक बार फिर कांग्रेस को एक और गाँधी कि जरुरत महसूस हुई, जब २००७ से लेकर २०११ तक भ्रस्ताचार और घोटाला कि बाढ़ आ गई उधर बाबारामदेव ने गांधीजी द्वारा संकल्पित सभी वादों को मुद्दा बनाकर कालेधन भ्रस्ताचार, और दूषित ब्यवस्था को जड़ से उखाड़ फेकने के लिए कमर कश कर खड़े हो गए तो बैठे बिठाये गाँधीवादी "श्री अन्नाहजारेजी" कांग्रेस के हाथो में गांधीजी कि लाठी बन कर आ गए, ब्यक्तित्व एक बार फिर जित गया, आम आदमी का "मुद्दा" हार गया, देश को एक और गाँधी भले ही मिल गया हो लेकिन आजादी और गांधीजी के सपनों का रामराज्य कुछ दूर और खिसक गया
ॐ जय भारत जय हिंद बन्दे मातरम

सोमवार, 22 अगस्त 2011

तीसरा पैगाम श्री अन्नाहजारे जी के नाम

"श्री अन्नाहजारे जी" आप गाँधीवादी है, और धीरे धीरे बात साफ होती जा रही है कि आप कांग्रेसी भी है, जिस तरह गांधीजी युगपुरुष, महात्मा, और देश के बापू बन गये अपने गांधीवाद के चलते, बल्कि उनकी तुलना देवता से कि जाय तो कम है, लेकिन "वो" नहीं कर पाये जो करना चाहिए था, या वो खुद करना चाहते थे, क्युकी गांधीवाद किशी ब्यक्ति के ब्यक्तित्व को आसमान कि ऊंचाई तो दे सकता है पर किसी देश को कुछ नहीं दे सकता, आम आदमी का भला नहीं कर सकता, आम आदमी कि मुलभुत समस्याओ का समाधान नहीं कर सकता | "श्री अन्नाहजारे जी" आप जो भी कर रहे है, और आपका ये गांधीवाद आपके ब्यक्तित्व को तो भले ही सातवे आसमान पर पहुचादे लेकिन देश का हाँथ फिर भी खाली रह जायेगा १८५७, १९४२-४७ और १९७५ कि तरह २०११ का भी इतिहाश एक बार कागज के पन्नो में सिमट कर रह जायेगा, मै ऐ नहीं कहना चाहता कि आप जो भी कर रहे है उसके पीछे कांग्रेश का दिमाग है लेकिन आप वही कर रहे है जो कांग्रेस चाहती है ये बिलकुल साफ है कांग्रेस आपसे नहीं बाबा रामदेव जी द्वारा उठए गये मुद्दों से डरती है अगर सीधे कहा जाय तो चार साल से जिन मुद्दों को लेकर बाबा रामदेव जी पुरे देश में घूम घूम कर अलख जगा रहे थे तो पुरे देश कि मिडिया सो रही थी क्युकी कांग्रेश एसा चाहती थी, बाबा रामदेव जी का आन्दोलन जब अंतिम चरण में था तो आप लोकपाल बिल जो सैकड़ो समस्याओ में से एक है को लेकर अनसन पर बैठ गये जिसे देश कि मिडिया ने हाथो हाथ उठा लिया और आपको मना भी लिया, और आप मान भी गये क्युकि कांग्रेस एसा चाहती थी, लेकिन बाबा रामदेव जी द्वारा चलाये आन्दोलन को ४ जून कि रात को बर्बरता से कुचल दिया गया और देश का दुर्भाग्य ये कि मिडिया उल्टा रामदेव को ही निशाना बनाने लगी क्युकि कांग्रेस एसा चाहती थी, आज आप अनसन पर बैठे है देश कि मिडिया ने हाथो हाथ उठा लिया है आपको सामियाना लगा के सरकार ने दिया और लोकपाल बिल के मुद्दे पर गोल गोल घुमा रही है और आज नहीं तो कल कुछ आप पीछे आकरके कुछ सरकार आगे बढकर मान भी जायेगे क्युकि कांग्रेस एसा चाहती है, ख़ैर अब तो आप समझ गये होगे कि बाबा रामदेव जी द्वारा उठाये गये मुद्दे और आप द्वारा उठाया मुद्दा कांग्रेस के लिए क्या अहमियत रखता है जो भी हो कांग्रेस और देश कि मिडिया आप पर मेहरबान है तो क्यों न बाबा रामदेव जी द्वारा उठाये गये मुद्दे पर आप अपना आन्दोलन केन्द्रित करे या फिर देश को ये बता दे कि बाबा रामदेव जी द्वारा उठाये गये मुद्दे गलत है देश हित में नहीं है, मै जनता हु आप एसा नहीं बोल सकते क्युकि आप गाँधीवादी है आप भी जानते है आम आदमी अपने सपनो को लेकर आशा भरी निगाह से आपकी और देख रहा है वो इस अकेले लोकपाल बिल से पूरा नहीं हो सकता इस देश का सपना इश और देश कि आशाये सिर्फ और सिर्फ बाबा रामदेव जी द्वारा उठाये गये मुद्दों को पूरा का पूरा एक साथ लागू करने से ही हो सकता है आगे आप खुद सोचिये और अग्निवेश जी से बचिए...
ॐ जय भारत जय हिंद बन्दे मातरम

दूसरा पैगाम श्री अन्नाहजारे जी के नाम

मोहनदास करमचंद गाँधीजी को ये देश युगपुरुष, महात्मा, और बापू तो बना लिया लेकिन इस देश को पूर्ण स्वराज्य, पूर्ण आजादी नहीं दिला पाये, येसा गाँधीजी ही मानते थे, चरखा कात कर स्वदेशी का नारा देने वाले गाँधीजी के टूटे दिल के दिये की ज्योति तो वैसे ही डगमगा रही थी की काल की आँधी के ऐक झोके ने पूरी तरह बुझा दिया देश बहुत रोया और आज भी रो रहा है, देश के चाचाओ ने गाँधीजी को देश के चोराहो से लेकर नोटों तक बिठा कर उनके सपनो का खून किया, उनके आदर्शो को रोंद डाला, उनकी आत्मा (चरखा) तक को देश के किसी संग्रहालय में पंहुचा दिया देश का वो हाल कर दिया कि गाँधीजी खुद को इस देश में ढूढ़ते रह जायेगे लेकिन ? ख़ैर कल ये देश आपको देश का अन्ना(बड़ा भाई) भले ही बनाले आम आदमी का हाँथ तो फिर भी खाली रहेगा क्युकी श्री अन्नाहजारे जी आप, जहाँ आकर समस्याए ख़त्म होती है वहां से आपने लड़ाई कि सुरुआत कि है दुसरे शब्दों में कहा जाय तो देश कि समस्याओ के बट ब्रिक्ष के समूचे पेड़ से एक टहनी तोड़ने कि कोशिश कर रहे है और आप जानते ही नहीं मानते भी है कि इससे ६५% तक भ्रष्टाचार ख़त्म होगा, आप भ्रष्टाचारी को सजा दिलाने कि बात कर रहे है जिसके लिए लोकपाल बिल चाहते है लेकिन देश कि समस्या भ्रष्टाचारी नहीं भ्रष्टाचार है जो देश कि लगभग १०० समस्याओ कि एक पूरक समस्या इसको और साफ शब्दों में कहे तो देश कि समस्याओ को एक बट ब्रिक्ष मान लिया जाय तो "कालाधन इस ब्रिक्ष कि जड़े है और उसकी बेले जो टहनियो से जमीन तक लटकी रहती है वो है काले धन का श्रोत, इस ब्रिक्ष का तना है इस देश कि ब्यवस्था और टहनी फूल पत्ते सभी है इसके पोषक काले अंग्रेज अब आप सोचिये अपने अभियान के बारे में ? सो श्री अन्नाहजारे जी एक बार फिर सोचिये और देश कि समस्याओ के बट ब्रिक्ष को जड़ से उखाड़ने का संकक्ल्प लीजिये |ॐ जय भारत जय हिंद बन्दे मातरम

शुक्रवार, 19 अगस्त 2011

एक पैगाम श्री अन्नाहजारे जी के नाम

श्री अन्ना हजारे जी, आज पूरे देश का एक साथ उठ खड़े होना, देशद्रोहियो और भ्रष्टाचारियो के जुल्म की पराकास्ठा को दर्शाता है, १८५७ के क्रांति की ज्वाला और १९४७ के स्वतंत्रता की ललक दोनों एक साथ देश वासिओ की आँखों में देखा जा सकता है, ध्यान से देखा जाय तो १५४ सालो में आम आदमी के लिए कुछ भी नहीं बदला है बल्कि लोगो के विस्वास और भावनाओ को छला ही गया है

श्री अन्ना हजारे जी, आप गाँधीवादी है लेकिन आप १९४७ की सशर्त आजादी लेने वाली गलती नहीं करेगे जिशका परिणाम देश आज भी भुगत रहा है और आपको अनसन पर बैठना पड़ा है, जनलोकपाल बिल एक प्रभावशाली कानून हो सकता है भ्रष्टाचार पर रोक लगाने के लिए, जिसे आप भी मानते है कि ६५% तक कारगर हो सकता है, लेकिन यदि आप श्री बाबा रामदेव जी द्वारा उठाये गए मुद्दे जैसे काले धन को राष्ट्रिय संपत्ति घोषित करना, देश से लूटे हुए पैसे को बिदेशो में जमा करने को देशद्रोह करार देना, ब्यवस्था परिवर्तन (शिछा, चिकत्सा, कानून, अर्थ और कृषि) इत्यादि को अपनी मागो में आत्मसात कर लेते तो न केवल १००% देश को पूर्ण आजादी मिल जाती बल्कि देश को देशद्रोहियो और भ्रष्टाचारियो से हमेसा के लिए छुटकारा मिल जाता, फिर कभी आप जैसे महापुरुषों को जेल और रामलीला मैदान कि खाक न छाननी पड़ती और श्री महात्मा गाँधी जी द्वारा देश के लिए देखे हुए "रामराज्य" के सपने भी साकार हो जाते, आशा ही नहीं पूर्ण विस्वास है कि आप देश के आम आदमी कि प्रार्थना स्वीकार करेगे क्युकी आप गाँधीवादी है


आपका सेवक और समर्थक

आम आदमी (मनमोहन मिश्र)

ॐ जय भारत जय हिंद बन्दे मातरम

शुक्रवार, 12 अगस्त 2011

baba ramdev or anna hajare

आज देश के हर आम आदमी को आगे आकर अपनी भूमिका तय करना होगा क्योकि पूंजीवादी अर्थब्यवस्था और लोकतंत्र के बीच युद्ध सुरु हो चूका है सदीओ में कोई ऐसा पैदा होता है जो गुलामी के किलाफ आवाज उठता है बाबा रामदेवजी ऐसे ही एक आम आदमी है जिन्होंने इतने बड़े पूंजीवादी साम्राज्य से लोहा लिया है आज देश के हर आदमी को बाबा रामदेव कोन है? जानने के बजाय, क्या कर रहे है और क्यों कर रहे है जान कर, कंधे से कन्धा मिलाकर इस लड़ाई में सामिल होना चाहिए वर्ना इस देश के पूंजीवादी चोर, भ्रस्त्ताचारी, दलाल रामदेव जी को ख़त्म करदेगे हमे फिर सदीओ किसी और रामदेवजी का इंतजार करना होगा और इसी भ्रष्ट ब्यवस्था में सिसक कर मरना होगा



१- अन्ना हजारे जी और उनके साथियो द्वारा आन्दोलन, अनसन, सफलता और असफलता और अब आने वाला १६ अगस्त का अनसन सब कुछ, भ्रस्टाचार के खिलाफ देश भर मे चलाये जा रहे बहु आयामी ब्यापक आन्दोलन और आम आदमी में भ्रस्टाचार के खिलाफ उबलते गुस्से को ख़त्म करने की कांग्रेसियो ने साजिश रची है, रामदेव जी द्वारा चलाये जा रहे देश ब्यापी आन्दोलन की धार को कुंद करना चाहते है कांग्रेसी


२- रामदेव जी का आन्दोलन भ्रस्टाचार के पुरे पेड़ को जड़ सहित उखाड़ देने की ही नहीं बल्कि पूरी ब्यवस्था में परिवर्तन लाने

की है यदि रामदेव जी सफल हो जायं तो ज्यदातर कांग्रेसी या तो देश छोड़ कर भाग जायेगे या फांसी चडेगे या बाकी उम्र जेल में गुजारेगे
आन्दोलन का दमन करना कांग्रेसियो द्वारा आत्मरक्षा में उठाया गया कदम था कांग्रेसियो ने ये बात बिलकुल सच बोली थी पूजीवादी अर्थब्यवस्था बिना काले धन के चल ही नहीं सकती और काला धन जिसके पास है वही अपने लिए फांसी का फन्दा कैसे बनाते


३- अन्ना हजारे जी एक इमानदार समाजसेवक है इसमें कोई दो राय नहीं है लेकिन कांग्रेसियो को १२६ साल का अंग्रेजी नीति का अनुभव है उन्होंने कब और कैसे अन्ना जी का हथियार की तरह इस्तेमाल कर लिया इसका पता रामदेव जी को और लोगो को तो क्या अन्ना हजारे जी को ही नहीं चला, अन्ना जी का इस्तेमाल करके बाबा रामदेव के आन्दोलन को कुछ महीने पीछे करने में भले ही कामयाब हो गयी लेकिन एक अन्नाहजारे जैसे गाँधीवादी हठी को छेड़ कर कांग्रेस अपने ही बनाये षड्यंत्र में बुरी तरह से फँस गई है, अन्ना हजारे जी और रामदेव जी आज एक साथ नहीं है इसके पीछे भी कांग्रेसियो की साजिश है जबकि ओ किसी की भी बात मानने की स्थिति में नहीं है


४- अन्ना हजारे जी अगर १५ अगस्त को आन्दोलन करेगे तो कांग्रेश ४ जून से भी आगे बढ़ कर दमन करेगी लाठी आंशु गैश गोली कुछ भी चलाएगी लेकिन आन्दोलन को सफल नहीं होने देगी, कांग्रेश सोचती है दमन करना उसका अधिकार भी है और जीत भी, लेकिन ये घटना गाँधीवादी अन्ना हजारे की चेतना जगाने के लिए काफी होगा तब उन्हें भगतसिंह, शुभाष चन्द्र बोश और चन्द्रसेखर आजाद जैसे क्रान्तिकारियो की बहुत याद आयेगी और अन्ना हजारे जी को अहसास भी होगा जाने अनजाने की हुई गलतियो का और अनचाही कही बातो का


५- जो भी हो बाबारामदेव जी को आगे आना ही होगा फिर क्या, पूरा देश जब एक साथ भ्रस्टाचार के खिलाफ आन्दोलन में उतर जायेगा तब कांग्रेस "एमरजेंशी" लगा देगी ये उसका अंतिम वार होगा भ्रस्ताचारियो को बचाने के लिए, और यही कांग्रेश का अंत होगा


६- रामदेव जी तथा अन्ना हजारे जैसे मार्गदर्शको को, भ्रष्टाचारी नेताओ के बीच अपनी अंतरात्मा का गला घोटकर बैठे नेताओ को तथा देश के हर आम आदमी को एक साथ मिल कर इस लम्बी लड़ाई को लड़ना होगा क्युकी भ्रस्ताचारी काले धनकुबेर किसी भी पार्टी में होगे या जहा कही भी होगे लड़ाई में सामने आयेगे इसलिए ये युद्ध जीतना ही होगा


बुधवार, 10 अगस्त 2011

" हमेसा से भ्रष्ट कम्पनी "कांग्रेस" के सबसे भ्रष्ट आदमी "मन मोहन सिंह"" है

में कहू या न कहू, आप कहे या न कहे, कुछ लोग माने या न माने पर मन मोहन सिंग जानते भी है, कहते भी है, और मानते भी है की वे ही देश के सबसे भ्रष्ट आदमी है

पहला तथ्य- देशी कहावत है "मोनम स्वीकार लक्षणं" देश जलता है जल जाय, लुटता है लुट जाय, बिकता बिक जाय वो चुप रहेगे
दूसरा तथ्य- सवा सो साल से देश को लूटने, बेचने, दलाली करने वाली कम्पनी "कांग्रेस" के वर्तमान मुखिया है
तीसरा तथ्य- भ्रष्टाचारी, दुराचारी, अत्याचारी, चोरी दलाली, बेईमानी में लिप्त अपनी कम्पनी "कांग्रेस" के कारिंदों को जानते हुए छुपाते है और बचाते भी है
चौथा तथ्य- भ्रष्टाचार, अत्याचार, दुराचार, और दलाली, में सर तक डूबी अपनी कम्पनी "कांग्रेस" की तरफ कोई उगली तो क्या आँख उठा कर देखे उन्हें बर्दास्त नहीं होता चाहे बाबा रामदेव हो या अन्नाहजारे बस क्या दिन का दोपहर हो या आधी रात, ओरत हो या मर्द, सबका सबकुछ तोडवा देते है और शर्माते भी नहीं
पांचवा तथ्य- उपरोक्त सभी घटनाओ दुर्घटनाओ के बावजूद मौन होकर कुसासन की डोर थामे देस के न जाने किसका किसका क्या क्या लूट लेने को आतुर दुसासनो को खुली छुट देकर धिर्त्राष्ट्र रूपी मनमोहन सिंह आसन पर बैठ कर इस देश के सौ करोड़ लोगो को आंख बंद रखने, मुह न खोलने, और कान में ऊँगली डालने के लिए सलाह भी दे रहे है और धमकी भी दे रहे है


क्या अब भी आप नहीं मानेगे कि " हमेसा से भ्रष्ट कम्पनी "कांग्रेस" के सबसे भ्रष्ट आदमी "मन मोहन सिंह"" है


मंगलवार, 9 अगस्त 2011

"देश के गद्दार, देश द्रोही"

"देश के गद्दार, देश द्रोही" -- देश हित की बात न सोचे, गरीबो, मजदूरो, मेहनत कस लोगो, यहा तक की भिखारिओ से भी टेक्स के रूप में उगाही कर के बिदेसी बेंको में पैसा जमा करे, देश को बिदेसियो और बिदेसी कंपनियो के हाथो में बेचे, देश के १२० करोर आम आदमी को, उनके हितो को बिदेसियो के हाथो में बेच दे, जमाखोरी, कालाबाजारी, मिलावट, दलाली, अपराध, भ्रस्ताचार को सुरक्छा प्रदान करे तथा उक्त बातो का बिरोध करने वालो पर लाठी, आँसुगेश, और गोली चलवाए, दमन करे, अनेको प्रकार से सताये, भारत में येसा कोन है? बताने की जरुरत नहीं फिर भी बता देता हु, १२६ साल पहले एक अंग्रेज द्वारा अस्थापित कांग्रेस का गठन ही इसी काम के लिए किया गया था, उस अंग्रेज से लेकर आज की एक अंग्रेजन तक, अगर ध्यान से देखा जाय तो कांग्रेसियों ने अपनी जिम्मेदारी निभाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है, क्रान्तिकारियो के जीवन की सोदेबाजी से लेकर देश के अंतिम आम आदमी के म्रत्यु तक में दलाली तक, समय गुजरने के साथ साथ नाम बदले, पार्टी बदली लेकिन काम वही किया आज देखा जाय तो लगभग हर पार्टी में कांग्रेसी ही शीर्ष पर बैठे है


कहने की जरुरत नहीं है आज दलाली, चोरी भ्रस्ताचार, जमाखोरी, कालाबाजारी के खिलाफ चलाये जा रहे बाबा रामदेव और अन्ना हजारे के मुहीम के बिरोध में खड़ी कांग्रेश तो नंगी हो चुकी है साथ में ओ भी नंगे हो चके है जो मोन है भले ही दूसरी पार्टियो में है पर चुप है क्युकी ओ भी कांग्रसी है ओ भी देश के गद्दार, और देश द्रोही है आज देश देख और समझ रहा है पूरा देश दो भाग, दो सम्प्रदाय, दो जाती, दो सोच, दो धर्म में बट चूका है पहला है बाबारामदेव, अन्नाहजारे का दूसरा है कांग्रेस और दुसरे दलों में छुपे कांग्रेसियो का
जितना चाहे जोर लगालो, जुल्म ढालो, ओ दिन आने वाला है जब तुम्हे आना ही पड़ेगा तिहार जेल में या जाना ही पड़ेगा अपने आकाओ के देश...

शनिवार, 6 अगस्त 2011

"sheela"

देश को मांगने की आदत हो गयी है कुछ भी मांग लेते है कर्ज, शान्ती, और इस्तीफा भी ये जानते हुए भी की मिलना तो है नहीं ख़ैर लोगो का क्या "कुछ तो लोग कहेंगे, लोगो का काम है कहना" लेकिन चोरो, दलालों, भ्र्स्ताचारियो का भला है चुप रहना अगर छोटी मोती बातो पर इस्तीफा देने लगे तो हो चूका, ये अलग बात है की यदि इस देश में कानून होता, देश स्वतंत्र होता तो सारे कंग्रेशी साथ में उनके भाई बंद भी जेल में ब्यास्थित हो गए होते, २०१४ आते आते सारे कंग्रेशी तिहर जेल में होगे और बाबा रामदेव इन्हें वहा भी नहीं छोड़ेगे योग की कच्छा लगायेगे का .....

शुक्रवार, 5 अगस्त 2011

"भारत के केंसर"

"भारत के केंसर" को केंसर कभी नहीं हो सकता होँ २०१४ आते आते भ्रष्टाचारी, दलाल, जमाखोर, चोर, इलाज के बहाने भारत जरुर छोड़ देगे

लोकपाल बिल का भूत कांग्रेसी दलालों को इमरजेंसी लगाने पर मजबूर कर देगा, इस देश की १२१ करोर जनता बाबा रामदेव और अन्ना हजारे बनकर इन दलालों पर टूट पड़ेगी फिर दुनिया की कोई ताकत इन्हें बचा नहीं पायेगी इनकी उलटी गिनती सुरु हो चुकी है

मंगलवार, 2 अगस्त 2011

'शर्मिंदगी भरे राज'

मनमोहन सिंह जी आपने आज ना ही कुछ नया किया है, ना ही कुछ नया कहा है और ना ही इसमें आपकी कोई गलती है आप जिस कम्पनी के मुखिया है वो १२६ सालो से इसी दलाली के धंधे में लगी है

आप तो जानते है ईस्ट इंडिया कम्पनी के कलान्तरिय कारिंदे द्वारा स्थापित कांग्रेस का गठन ही 'शर्मिंदगी भरे राज' छुपाने बेचने और सौदे बाजी करने के लिए किया गया था और कांग्रेस ने समय समय पर क्रान्तिकारिओं के आजादि कि ओर बढ़ते कदमों को रोकने से लेकर अंग्रेजों के हर मंसूबों को पूरा करने में सहभागि रहे, कालान्तर मे सुबाश चन्द्र बोश जैसे क्रान्तिकारिओं के जीवन कि सौदेबाजि से लेकर भगत सिंह जैसे क्रान्तिकारिओं कि मौत तक का सौदा बडी बेरहमि और बेसर्मि से किया
मनमोहन सिंह जी आपने इतनी बड़ी बात 'शर्मिंदगी भरे राज' का उपयोग बहुत छोटे से सन्दर्भ में करके आपने कांग्रेसी होने का सबूत तो दे दिया लेकिन उनके दिल को ठेस जरुर लगेगी जो आपके बारे में अच्छे ख्याल रखते है मेरा मतलब उनसे है जिन्होंने आपको "बेईमान सरकार के इमानदार प्रधानमंत्री" कहा था ख़ैर कोई कुछ भी कहे ए देश जान चूका है "सारे राज" आपका भी और आपकी कांग्रेश का भी तथा साथ में आपके मोसेरे भाई (बिरोधी पार्टियों) का भी
मनमोहन सिंह जी आप तो मोन रहते है............