तथा कथित एवं छतिग्रस्त "लोकतंत्र" दुनिया के किसी भी "तानाशाही" ब्यवस्था से ज्यादा भयानक, खतरनाक, और बिध्व्न्सक होता है, हमारा भारतीय लोकतंत्र इसका सबसे बड़ा उदाहरन है, कहने के लिए तो हम स्वतंत्र है लेकिन मात्र पांच लाख से भी कम लोग (पूंजीपती, दलाल, और बिधाइका, कार्यपालिका, न्यायपालिका, और सुचना तंत्र से जुड़े कुछ भ्रस्ट देशद्रोहियो, भ्रष्टाचारियो, कालेधनकुबेरो) १२१ करोड़ देश के आम नागरिकों (इमानदार, सच्चे, कर्तब्य परायण, निष्ठावान) पर बर्बर, तानाशाही, षड्यंत्र कारी, दमनकारी, और शोसनकारी ब्यवस्था थोप कर सासन कर रहे है, चाह कर भी देस की आम जनता बस सिसक कर जीने के लिए मजबूर है, यदि "बाबा रामदेव जी" जैसे लोग ब्यवस्था परिवर्तन के लिए झंडा उठाते है तो जान बचाना मुस्किल होता है किसी तरह बच जाते है तो कुचलने का षड्यंत्र रचा जाता है, अग्निवेस जैसे दलालों को पीछे लगाया जाता है, अन्नाहजारे जैसे लोगो से खोखले गाँधीवादी अहिंसावाद का नारा लगवाकर आम लोगो को बरगलाने की कोशिश की जाती है, दुनिया को अँधेरे में रखने के लिए "३२ रूपये का स्लम डाग मिलेनियर" और "२६ रूपये का विलेज डाग मिलेनियर" बनाया जाता है, आम आदमी भूख, गरीबी, बदहाली में जीने को मजबूर है, लोग आत्महत्या तक कर लेते है, और अगर कही गलती से आँख दिखाने की कोसिस कर दिए तो नक्सलवादी, माओवादी (माओवाद ने चीन को दो साल बाद आजाद होने के बाद भी हमसे दो सौ साल आगे पहुंचा दिया है) और पता नहीं कौन, कौन, से वादी बता कर मार देगे मतलब ये की देश का आम आदमी मरने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है, एक आम आदमी बिन मागी मुराद की तरह पैदा होते ही कुपोषण का सिकार होकर मरने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है, अगर जीता रहा तो दोहरी सिक्छा निति के कारण असिक्छित रहने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है, अगर मेहनत मजदूरी करके कुछ कमा भी ले तो सरकार द्वारा हर नुक्कड़ पर बिक रही सराब पीकर मरने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है, वैसे तो मरने के लिए और भी ब्यस्था है जैसे सिगरेट, बीडी, तम्बाखू, गुटखा, इत्यादि फिर भी कुछ पैसे लेकर अगर घर पहुच भी गया तो परिवार का पेट तो भर नहीं सकता भूखे रहकर प्यार के सहारे मरने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है, मरे यां न मरे लेकिन एक और आम आदमी बिन मागी मुराद की तरह पैदा कर देगा मरने के लिए, यहाँ कि बेटियां भी चंद पेसो में अस्मत तक बेच देती है परिवार का पेट भरने के लिए और ये सब कुछ उस देश में होता है जहाँ घोटाले भी अब "लाखो करोड़" से कम के नहीं होते, इन सब के लिए जिम्मेदार है तथा कथित एवं छतिग्रस्त "लोकतंत्र"
ॐ जय भारत जय हिंद बन्दे मातरम
ॐ जय भारत जय हिंद बन्दे मातरम
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