मनमोहन मिश्र

मनमोहन मिश्र
"राजनैतिक विश्लेषक"

शनिवार, 24 सितंबर 2011

छतिग्रस्त "लोकतंत्र" दुनिया के किसी भी "तानाशाही" ब्यवस्था से ज्यादा भयानक, खतरनाक, और बिध्व्न्सक होता है, "भाग १"

हम जिस ब्यवस्था में रहते है उसे लोकतंत्र तो कत्तई नहीं कहा जा सकता, हाँ मुगलों के बर्बर सासन से लेकर अंग्रेजो की दमनकारी ब्यवस्था सहित, पुजीपतियो के शोसनकारी नीतिओ तक का मिलाजुला क्रूर एवं संवेदनहीन पूंजीवादी ब्यवस्था को लोकतंत्र मान कर हम चलरहे है, इस विकृत लोकतंत्र का परिणाम आपके सामने है "भारत के सतप्रतिसत लोग इमानदार है कोई भी बेईमान नहीं है" लेकिन इस ब्यवस्था का लाभ जिनको मिल रहा है, वो इसे बदलना नहीं चाहते, उनकी संख्या भले हि दशमलव सुन्य पांच प्रतिसत है लेकिन १२१ करोड़ पर भारी पड़ रहे है क्युकि ब्यवस्था उनके हाँथ में है, हमें, यानि आम आदमी को इस ब्यवस्था को जड़ से उखाड़ फेकना होगा, भारतीय उप महाद्वीप में सिर्फ एक मात्र  एक आदमी "बाबारामदेव जी" हि सही दिशा में ब्यवस्था परिवर्तन के लिए कार्य कर रहे है, दिग्भ्रमित करने के लिए "अन्नाहजारे" जैसे लोग भी सामने लाये जायेगे जो टुकडो में बदलाव की बात करेगे, चुकी इस "ब्यवस्था" को टुकडो में बदला ही नहीं जा सकता इस लिए एसे लोगो से या तो दूर रहना है या फिर उनको अपनी बात समझानी पड़ेगी, वैसे तो पूंजीवादी अर्थब्यवस्था अर्थात विकृत लोकतंत्र अमानवीयता के चरम पर पहुँच चूका है इस ब्यवस्था की पराकाष्ठ ही इसके विनास का द्योतक है, "भ्रष्टाचार और कालेधन के खिलाफ यस आई टी गठित करने के कोर्ट के आदेश को कोर्ट में चुनौती देना" इस ब्यवस्था के नंगेपन का एक छोटा सा उदाहरन भर है, विकृत लोकतंत्र का सबसे अधिक लाभ उठाने वाली कांग्रेस के नंगेपन का तमासा तो सारा देश देख रहा है, बाकी भी कमोबेस येसे हि है, अब ये पूरी तरह साबित हो चूका है की इस विकृत लोकतंत्र को मिटा कर सच्चे लोकतंत्र की स्थापना भी इसी लोकतंत्र मे है, और वो है "१०० प्रतिसत मतदान" यह एक मात्र येसा ब्रह्मास्त्र है जो पूंजीवादी अर्थब्यवस्था के इस विकृत लोकतंत्र को ख़त्म कर सच्चे लोकतंत्र की स्थापना कर सकता है....जारी....ॐ बंदेमातरम जयहिंद                    
ॐ जय भारत जय हिंद बन्दे मातरम

कोई टिप्पणी नहीं: