मनमोहन मिश्र

मनमोहन मिश्र
"राजनैतिक विश्लेषक"

शनिवार, 10 सितंबर 2011

"सात सितम्बर के सहीदो को कोटि कोटि नमन, और नपुंसक सरकार और उनके कर्णधारो को साधुवाद"

"सात सितम्बर के सहीदो को कोटि कोटि नमन, और नपुंसक सरकार और उनके कर्णधारो को साधुवाद" दिल्ली हाईकोर्ट के सामने मारे गए सहीद देस के यैसे सिपाही थे जिन्हें बिना हथियार और बिना सुरक्षा के "हथियार बंद आतंकियो" से लड़ने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है, आतंकियो और उनके हिमायतियो को खुला छोड़ दिया गया है और जो पकडे गए है उनकी खातिरदारी की जा रही है, १९४७ से पहले की तरह सजा कम, सजा का नाटक किया जा रहा है जो अंग्रेज अपने "अंग्रेज" गुनहगारो को बचाने के लिए किया करते थे, "देश के कायर कर्णधारो ने तो कमांडो के बीच खड़े हो कर अफसोस जताने की खानापूर्ती की, लासो और आंसुओ की कीमत भी तय कर दी और देस को और भी आंसू बहाने पड़गे रोका नहीं जा सकता बोल कर अपना कर्तब्य भी निभा दिया" जो भी हो इससे ज्यादा की उम्मीद देश को इनसे करनी भी नहीं चाहिए, लेकिन देश के बीर जन नायको, कर्णधारो से मेरा अनुरोध है की आप अपनी या अपने परिवार की सुरक्छा हटा दीजिये, आधे से ज्यादा सुरक्छा ब्यवस्था को आपने कुछ हजार अपने लोगो के लिए फसा रखा है, आप बीच से हट जाइये देश की सेना और देश की पुलिश पूरी तरह से समर्थ है देश की रक्छा के लिए, और देश के हर गावं, गली, मोहल्ले में माँ भारती के लालो को हथियार देकर पुलिश के संरक्छन में "बंदेमातरम" सुरक्छा टोली तैयार कीजिये, किसी भी भारतीय का एक बूंद खून धरती पर गिर जाय तो ..............?
ॐ जय भारत जय हिंद बन्दे मातरम

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