"श्री अन्नाहाजारेजी" आपके स्वस्थ रहने कि कामना करते हुए इस्वर से प्रार्थना है कि आपको लम्बी उम्र प्रदान करे, आपका अदम्भ्य साहस, आपका गाँधीवादी ब्यक्तित्व, और आपका अहिंसावादी सिद्धांत हमेसा आपको अमर रखेगा, इश देश के लिए तो आप "अन्ना" है ही कांग्रेस के लिए तो आप प्राणदायी, जीवनदायी, मुक्तिदाता है, माफ़ कीजियेगा जब भी हम आपसे अपने दिल की बात कहना चाहते है तो श्री गांधीजी का सहारा लेना ही पड़ता है क्युकि आप गाँधीवादी है गाँधी का ब्यक्तित्व आसमान से भी ऊँचा, महानता हिमालय से भी बिशाल और दिल शागर से भी चौड़ा था, लेकिन जब उनके शिद्धान्तो, और नीतिओ को राष्ट्रवादी निगाह से आम आदमी के हितो को सामने रख कर देखा जाय तो लगता है गाँधीजी अपने पुरे राजनैतिक जीवन में अपने आप से ही लड़ते रहे, खुद को बनाते और बिगाड़ते रहे, अपने शिद्धान्तो को लोगो से मनवाते और खुद तोड़ते रहे जिसका परिणाम है हमारी आज की गुलामी और "आपका अनशन मानना और मनवाना सब कुछ" इतिहास के रोचक पन्ने को पढने जैसा लगता है, "कांग्रेस और आप" आज जो भी कर रही है थोडा बहुत इतिहास जानने वाला भी क्या? कैसे? और क्यों? को समझ सकता है "अहिंसा परमोधर्म" सबसे बड़ा सिद्धांत गाँधीजी का था लेकिन दोनो विश्वयुद्धों में अंग्रेजों का साथ देने, भारत की स्वतंत्रता के बाद नेहरू को प्रधानमंत्री का दावेदार बनाने के परिणाम स्वरूप देश का बटवारा इत्यादि उनके अपने ही सिद्धांतो की धज्जिया बिखेर देता है पुरे भारतीय उपमहाद्वीप में जितने लोग १६०० से लेकर १९४७ तक स्वतंत्रता संग्राम में नहीं मरे थे उससे ज्यादा गाँधीजी के अहिंसावादी राजनैतिक फैसलों से मारे गए और ये हम नहीं इतिहास कहता है चौरी चौरा कांड का बिरोध, शुबास चन्द्र बोस का बिरोध, इरविन समझोता, क्रान्तिकारियो का बिरोध, खिलाफत आन्दोलन इत्यादि बहुत से उनके निर्णयों को उनके अपने ही शिद्धान्तो को कुचलता हुआ लगता है ठीक उसी तरह आज २०११ में एक क़ानूनी मसले को लेकर जो देश कि लगभग १०० समस्याओ कि एक पूरक समस्या है, आपका आगे आना देश की आम जनता को तो कुछ नहीं बल्कि कांग्रेस को ही जीवन दान दिया है, दुसरे शब्दों में कहा जाय तो देश कि समस्याओ के बट ब्रिक्ष के समूचे पेड़ से एक टहनी तोड़ने कि कोशिश कर रहे है और आप जानते ही नहीं मानते भी है कि इससे ६५% तक भ्रष्टाचार ख़त्म होगा, आप भ्रष्टाचारी को सजा दिलाने कि बात कर रहे है जिसके लिए लोकपाल बिल चाहते है लेकिन देश कि समस्या भ्रष्टाचारी नहीं भ्रष्टाचार है, आपके कारण "समग्र ब्यवस्था परिवर्तन और काले धन का मुद्दा जो आम आदमी के लिए पूर्ण स्वराज्य के बरार है बाबारामदेव द्वारा की हुई सालो की मेहनत लोगो में जग रहा समग्र क्रांति का उत्साह सब कुछ पर आपने पानी फेर दिया, अगर आपने दो अनसन और एक साल में लोकपाल बिल बनवा भी लेते है (जो की असंभव है ये आप भी जानते है और कांग्रेस भी) तो एसी ही १०० समस्याओ के लिए २०० बार अनसन और १०० साल की जरुरत होगी क्या देश इस बात के लिए तैयार है देश की जनता २१११ तक इस ब्यवस्था को झेलेगी ?, आप गाँधीवादी है, "श्री अन्नाहाजारेजी" किशी के ब्यक्तित्व की महानता या उसके द्वारा किये राजनैतिक निर्णय किसी देश को पूरी धरती पर छिड़े पूजीवादी युद्ध में एक कदम भी आगे नहीं ले जा सकता, यदि आप गाँधीवादी है, गाँधीजी जितने महान और आदर्शवादी है तो आप द्वारा किये गए निर्णयों का असर भी उतना ही प्रभावसाली होगा, "श्री अन्नाहाजारेजी" आपसे छमा मागते हुए अंतिम लाइन लिखना चाहता हु कि मै सिर्फ एक राजनैतिक बिष्लेसक हु इस नाते बहुत सीधे शब्दों में कहू तो बाबा रामदेवजी द्वारा चलाया जा रहा आन्दोलन ही इस देश को पूर्ण स्वराज्य दिला सकता है और उनसे आप पहले जुड़े भी रहे है, अगर इतिहास कि नजर से देखे तो आप गाँधीजी और बाबा रामदेवजी श्री सुबाश चन्द्र बोश कि भूमिका है आप महान गाँधीवादी है लेकिन गाँधीजी द्वारा कि हुई भूल न दुहराए यही देश हित मै होगा | जाय हिंद बंदेमातरम
ॐ जय भारत जय हिंद बन्दे मातरम
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