मनमोहन मिश्र

मनमोहन मिश्र
"राजनैतिक विश्लेषक"

शुक्रवार, 19 अगस्त 2011

एक पैगाम श्री अन्नाहजारे जी के नाम

श्री अन्ना हजारे जी, आज पूरे देश का एक साथ उठ खड़े होना, देशद्रोहियो और भ्रष्टाचारियो के जुल्म की पराकास्ठा को दर्शाता है, १८५७ के क्रांति की ज्वाला और १९४७ के स्वतंत्रता की ललक दोनों एक साथ देश वासिओ की आँखों में देखा जा सकता है, ध्यान से देखा जाय तो १५४ सालो में आम आदमी के लिए कुछ भी नहीं बदला है बल्कि लोगो के विस्वास और भावनाओ को छला ही गया है

श्री अन्ना हजारे जी, आप गाँधीवादी है लेकिन आप १९४७ की सशर्त आजादी लेने वाली गलती नहीं करेगे जिशका परिणाम देश आज भी भुगत रहा है और आपको अनसन पर बैठना पड़ा है, जनलोकपाल बिल एक प्रभावशाली कानून हो सकता है भ्रष्टाचार पर रोक लगाने के लिए, जिसे आप भी मानते है कि ६५% तक कारगर हो सकता है, लेकिन यदि आप श्री बाबा रामदेव जी द्वारा उठाये गए मुद्दे जैसे काले धन को राष्ट्रिय संपत्ति घोषित करना, देश से लूटे हुए पैसे को बिदेशो में जमा करने को देशद्रोह करार देना, ब्यवस्था परिवर्तन (शिछा, चिकत्सा, कानून, अर्थ और कृषि) इत्यादि को अपनी मागो में आत्मसात कर लेते तो न केवल १००% देश को पूर्ण आजादी मिल जाती बल्कि देश को देशद्रोहियो और भ्रष्टाचारियो से हमेसा के लिए छुटकारा मिल जाता, फिर कभी आप जैसे महापुरुषों को जेल और रामलीला मैदान कि खाक न छाननी पड़ती और श्री महात्मा गाँधी जी द्वारा देश के लिए देखे हुए "रामराज्य" के सपने भी साकार हो जाते, आशा ही नहीं पूर्ण विस्वास है कि आप देश के आम आदमी कि प्रार्थना स्वीकार करेगे क्युकी आप गाँधीवादी है


आपका सेवक और समर्थक

आम आदमी (मनमोहन मिश्र)

ॐ जय भारत जय हिंद बन्दे मातरम

कोई टिप्पणी नहीं: