मनमोहन मिश्र

मनमोहन मिश्र
"राजनैतिक विश्लेषक"

बुधवार, 10 अगस्त 2011

" हमेसा से भ्रष्ट कम्पनी "कांग्रेस" के सबसे भ्रष्ट आदमी "मन मोहन सिंह"" है

में कहू या न कहू, आप कहे या न कहे, कुछ लोग माने या न माने पर मन मोहन सिंग जानते भी है, कहते भी है, और मानते भी है की वे ही देश के सबसे भ्रष्ट आदमी है

पहला तथ्य- देशी कहावत है "मोनम स्वीकार लक्षणं" देश जलता है जल जाय, लुटता है लुट जाय, बिकता बिक जाय वो चुप रहेगे
दूसरा तथ्य- सवा सो साल से देश को लूटने, बेचने, दलाली करने वाली कम्पनी "कांग्रेस" के वर्तमान मुखिया है
तीसरा तथ्य- भ्रष्टाचारी, दुराचारी, अत्याचारी, चोरी दलाली, बेईमानी में लिप्त अपनी कम्पनी "कांग्रेस" के कारिंदों को जानते हुए छुपाते है और बचाते भी है
चौथा तथ्य- भ्रष्टाचार, अत्याचार, दुराचार, और दलाली, में सर तक डूबी अपनी कम्पनी "कांग्रेस" की तरफ कोई उगली तो क्या आँख उठा कर देखे उन्हें बर्दास्त नहीं होता चाहे बाबा रामदेव हो या अन्नाहजारे बस क्या दिन का दोपहर हो या आधी रात, ओरत हो या मर्द, सबका सबकुछ तोडवा देते है और शर्माते भी नहीं
पांचवा तथ्य- उपरोक्त सभी घटनाओ दुर्घटनाओ के बावजूद मौन होकर कुसासन की डोर थामे देस के न जाने किसका किसका क्या क्या लूट लेने को आतुर दुसासनो को खुली छुट देकर धिर्त्राष्ट्र रूपी मनमोहन सिंह आसन पर बैठ कर इस देश के सौ करोड़ लोगो को आंख बंद रखने, मुह न खोलने, और कान में ऊँगली डालने के लिए सलाह भी दे रहे है और धमकी भी दे रहे है


क्या अब भी आप नहीं मानेगे कि " हमेसा से भ्रष्ट कम्पनी "कांग्रेस" के सबसे भ्रष्ट आदमी "मन मोहन सिंह"" है


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