मनमोहन सिंह जी आपने आज ना ही कुछ नया किया है, ना ही कुछ नया कहा है और ना ही इसमें आपकी कोई गलती है आप जिस कम्पनी के मुखिया है वो १२६ सालो से इसी दलाली के धंधे में लगी है
आप तो जानते है ईस्ट इंडिया कम्पनी के कलान्तरिय कारिंदे द्वारा स्थापित कांग्रेस का गठन ही 'शर्मिंदगी भरे राज' छुपाने बेचने और सौदे बाजी करने के लिए किया गया था और कांग्रेस ने समय समय पर क्रान्तिकारिओं के आजादि कि ओर बढ़ते कदमों को रोकने से लेकर अंग्रेजों के हर मंसूबों को पूरा करने में सहभागि रहे, कालान्तर मे सुबाश चन्द्र बोश जैसे क्रान्तिकारिओं के जीवन कि सौदेबाजि से लेकर भगत सिंह जैसे क्रान्तिकारिओं कि मौत तक का सौदा बडी बेरहमि और बेसर्मि से किया
मनमोहन सिंह जी आपने इतनी बड़ी बात 'शर्मिंदगी भरे राज' का उपयोग बहुत छोटे से सन्दर्भ में करके आपने कांग्रेसी होने का सबूत तो दे दिया लेकिन उनके दिल को ठेस जरुर लगेगी जो आपके बारे में अच्छे ख्याल रखते है मेरा मतलब उनसे है जिन्होंने आपको "बेईमान सरकार के इमानदार प्रधानमंत्री" कहा था ख़ैर कोई कुछ भी कहे ए देश जान चूका है "सारे राज" आपका भी और आपकी कांग्रेश का भी तथा साथ में आपके मोसेरे भाई (बिरोधी पार्टियों) का भी
मनमोहन सिंह जी आप तो मोन रहते है............
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें