मनमोहन मिश्र

मनमोहन मिश्र
"राजनैतिक विश्लेषक"

मंगलवार, 9 अगस्त 2011

"देश के गद्दार, देश द्रोही"

"देश के गद्दार, देश द्रोही" -- देश हित की बात न सोचे, गरीबो, मजदूरो, मेहनत कस लोगो, यहा तक की भिखारिओ से भी टेक्स के रूप में उगाही कर के बिदेसी बेंको में पैसा जमा करे, देश को बिदेसियो और बिदेसी कंपनियो के हाथो में बेचे, देश के १२० करोर आम आदमी को, उनके हितो को बिदेसियो के हाथो में बेच दे, जमाखोरी, कालाबाजारी, मिलावट, दलाली, अपराध, भ्रस्ताचार को सुरक्छा प्रदान करे तथा उक्त बातो का बिरोध करने वालो पर लाठी, आँसुगेश, और गोली चलवाए, दमन करे, अनेको प्रकार से सताये, भारत में येसा कोन है? बताने की जरुरत नहीं फिर भी बता देता हु, १२६ साल पहले एक अंग्रेज द्वारा अस्थापित कांग्रेस का गठन ही इसी काम के लिए किया गया था, उस अंग्रेज से लेकर आज की एक अंग्रेजन तक, अगर ध्यान से देखा जाय तो कांग्रेसियों ने अपनी जिम्मेदारी निभाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है, क्रान्तिकारियो के जीवन की सोदेबाजी से लेकर देश के अंतिम आम आदमी के म्रत्यु तक में दलाली तक, समय गुजरने के साथ साथ नाम बदले, पार्टी बदली लेकिन काम वही किया आज देखा जाय तो लगभग हर पार्टी में कांग्रेसी ही शीर्ष पर बैठे है


कहने की जरुरत नहीं है आज दलाली, चोरी भ्रस्ताचार, जमाखोरी, कालाबाजारी के खिलाफ चलाये जा रहे बाबा रामदेव और अन्ना हजारे के मुहीम के बिरोध में खड़ी कांग्रेश तो नंगी हो चुकी है साथ में ओ भी नंगे हो चके है जो मोन है भले ही दूसरी पार्टियो में है पर चुप है क्युकी ओ भी कांग्रसी है ओ भी देश के गद्दार, और देश द्रोही है आज देश देख और समझ रहा है पूरा देश दो भाग, दो सम्प्रदाय, दो जाती, दो सोच, दो धर्म में बट चूका है पहला है बाबारामदेव, अन्नाहजारे का दूसरा है कांग्रेस और दुसरे दलों में छुपे कांग्रेसियो का
जितना चाहे जोर लगालो, जुल्म ढालो, ओ दिन आने वाला है जब तुम्हे आना ही पड़ेगा तिहार जेल में या जाना ही पड़ेगा अपने आकाओ के देश...

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