देश को मांगने की आदत हो गयी है कुछ भी मांग लेते है कर्ज, शान्ती, और इस्तीफा भी ये जानते हुए भी की मिलना तो है नहीं ख़ैर लोगो का क्या "कुछ तो लोग कहेंगे, लोगो का काम है कहना" लेकिन चोरो, दलालों, भ्र्स्ताचारियो का भला है चुप रहना अगर छोटी मोती बातो पर इस्तीफा देने लगे तो हो चूका, ये अलग बात है की यदि इस देश में कानून होता, देश स्वतंत्र होता तो सारे कंग्रेशी साथ में उनके भाई बंद भी जेल में ब्यास्थित हो गए होते, २०१४ आते आते सारे कंग्रेशी तिहर जेल में होगे और बाबा रामदेव इन्हें वहा भी नहीं छोड़ेगे योग की कच्छा लगायेगे का .....
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