क्या जस्न अग्निवेश की साजिश की सफलता के लिये मनाया जा रहा है तब तो ठीक नहीं है क्युकी अग्निवेश तो तिन दसक से सरकारी गलियारों में "नीरा राडिया" बन के घूम रहे है दलाली ही उनका धंधा है, उनकी उपस्थिति ही साजिश का होना प्रमाणित हो जाता है, तिस पर उनके पीछे खिलाडियो के खिलाडी कपिल सिब्बल जो थे, बात भी की और विडियो भी चलवा दिया, दलाली के इस धंधे में तो यैसा होता ही रहता है जस्न जैसी तो कोई बात नहीं है! क्या जस्न आम आदमी की जीत को लेकर है तो भी ठीक नहीं है क्युकी देश और देश का "मुद्दा" तो छ महीने पहले जहा खड़ा था वहा से एक कदम भी आगे नहीं बढ़ा है, रहा नारा लगाने, खुश होने तो आंसू पीकर सैकड़ो साल से देस की जनता यही तो करती आ रही है उम्मीद बस उम्मीद लेकिन धूर्तो से प्रार्थना है अवाम की भावनाओ से मत खेलो बस वर्ना भीड़ का कोई चेहरा नहीं होता भड़क जाय तो दुनिया के बड़े से बड़े तानासाह को पंचतत्व में मिला दिया है! क्या जस्न श्री अन्नाहजारे जी की जीत का है तो भी बात समझ में नहीं आ रही है क्युकी "गाँधीवादी" श्री अन्नाहजारे जी को आज नहीं तो कल इस बात का जबाब देश को देना ही पड़ेगा की पुजीपतियो की बपौती सरकार की डुगडुगी (मिडिया) २४ घंटे "अन्ना" दर्शन बिलाश राव देशमुख के निर्देसन में अनचाहे ही कराती रही और सच्चाई तो अब अनचाहे ही देशमुख जी के ही मुखारबिंद से ("परदे के पीछे हर पल मै सुरु से अन्ना जी से जुड़ा रहा") बाहर आ चुकी है ! हाँ आज चाहे तो कांग्रेस जरुर जस्न मना सकती है क्युकी मुद्दा न तो लोकपाल का था और न ही देस की भोली भाली जनता के हित का था, मुद्दा सिर्फ और सिर्फ कांग्रेस मुक्ति का था (जो घोटालो, भ्रष्टाचारो, दलालियो, में सभी शीर्ष नेताओ के नाम उन्ही के सिपहसालारो जो अब जेल में है द्वारा भरी अदालत में लिया जाने लगा था) और "अन्ना" बंदना (श्री अन्नाहजारे जी को "अन्ना" बनाने में फायदा सिर्फ और सिर्फ कांग्रेस को हुआ है) का था उसमे कांग्रेस पूरी तरह से सफल रही है नाचे गाये बल्ले बल्ले करे अंत में इस्वर
"किरन बेदी", "अरविन्द केजरीवाल" और "देश की आम जनता" को दिल टूटने पर सहन करने की छमता प्रदान करे क्युकि यही तीनो तो गांधीजी के त्रिमूर्ति सिधान्तो को गाँधीवादी अन्नाहजारे जी का आशीर्वाद मान कर ढो रहे है
ॐ जय भारत जय हिंद बन्दे मातरम
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