मनमोहन मिश्र

मनमोहन मिश्र
"राजनैतिक विश्लेषक"

गुरुवार, 13 अक्टूबर 2011

"बाबारामदेव को काले झंडे और अंग्रेजी दलालों, गद्दारों, देशद्रोहियो, काले धनकुबेरो, और भ्रष्टाचारियो की जै"


"बाबारामदेव" इतिहास से उपर उठकर अध्यात्म के दरवाजे पर खड़े एक यैसे "युगपुरुष" है जिनकी उपमा के लिए तिन सौ सालो के इतिहास में कोई नहीं मिलता, मानव परिपूर्ण तभी होता है जब कर्म, धर्म, योग, और ज्ञान चारो समान रूप से समाहित हो, वो सिर्फ बाबारामदेव मे है, "सतयुग" में भी अत्याचारी राक्छ्सों का आतंक बढ़ जाने पर भगवान विष्णु को धरती पर रामावतार लेना पड़ा था और उन्हें भी राक्छ्सों का अंत सारी मानव लीलाओ के तहत करना पड़ा था फिर ये तो "कलियुग" है तो "रामदेव" की राह इतनी आसन कैसे हो सकती है, बाबारामदेव देश के लिए जो भी कर रहे है वो देशभक्ती की पराकाष्ठा है और बहुत सी मुस्किलो को झेलते हुए उन्हें सफलता जरुर मिलेगी, देश वास्तव में आर्थिक और सामरिक दोनों मायनो में आजाद होगा, रहा कुछ लोगो के रामदेव को काले झंडे दिखाने का सवाल तो यदि कांग्रेस रामदेव जैसे योगी को जान से मार देने के षड्यंत्र तक कर सकती है वहां काले झंडे दिखाना कोई मायने नहीं रखता, इस देश के हम जैसे आम लोगो का क्या, चार सौ सालो तक मुठ्ठी भर मुगलों और दो सौ सालो तक गिनती के गोरो की गुलामी हमने यू ही नहीं झेली है, हमेसा से हमको ही हमारे खिलाफ इस्तेमाल किया गया है अगर हमने मुगलों के लिए अपनों पर तीर, तलवार और तोपे चलाई है, तो अंग्रेजो के लिए अपनों पर लाठी, गोली, और गोले चलाये है और फिर आज भी तो वही कर रहे है, जिस तरह अंग्रेजों ने देश पर हुकूमत करने के लिए भारतियों के हाथों में डंडे थमा दिए और कन्धों पर बंदूक रख दिए उसि तरह वैचारिक तथा सामाजिक दमन के लिए क्रान्तिकारिओं के बढते दबाव को खत्म करने के लिए अंग्रेजों ने कुछ दरबारी, चाटुकार, भारतियों को मिलाकर अपनी हि अध्यछ्ता में संस्थागत दलालों का एक समूह खड़ा कर दिया जो समय समय पर क्रान्तिकारिओं के आजादि कि ओर बढ़ते कदमों को रोकने से लेकर अंग्रेजों के हर मंसूबों को पूरा करने में सहभागि रहे, कालान्तर मे सुबाश चन्द्र बोश जैसे क्रान्तिकारिओं के जीवन कि सौदेबाजि से लेकर भगत सिंह जैसे क्रान्तिकारिओं कि मौत तक का सौदा बडी बेरहमि और बेसर्मि से किया, आजादि का सपना तो सपना हि रह गया देश का बिभाजन शौगात में मिला अंग्रेजों ने जाते जाते दरबारी, चाटुकार, दलाल भारतियों का एक ऎसा जाल बना दिया कि देश "आजादि के एक दिन" तो क्या "आजादि के एक पल" के लिये तरस गया, लेकिन दलालों ने खूब धन कमाया देश तो नहि बिदेशी बैंको को पाट दिया, अंग्रेज भले हि दूर हो गये पर दलाल अंग्रेजी और एक अंग्रेजन कि जी हुजुरी से खुश हैं, कोशिश मे है कि फिर से ईटलि कि महारानि भारत कि गद्दि सभालें, हम आज भी एसे लोगो के लिए "जैकार" लगा रहे है और बाबारामदेव जो जान हथेली पर लेकर देश के गद्दारों, देशद्रोहियो, काले धनकुबेरो, और भ्रष्टाचारियो से लोहा ले रहे है उन्हें काले झंडे दिखा रहे है, इस्वर यैसे लोगो को सद्बुद्धि दे .... ॐ जयहिंद बंदेमातरम                          


ॐ जय भारत जय हिंद बन्दे मातरम

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