प्रसान्त भूसन पर किया गया हमला अलोकतांत्रिक है, तो देश कि एकता, अखंडता, संप्रभुता पर प्रसान्त भूसन का हमला क्या है ?, क्या? महात्मा अन्ना हजारे देश के एक और बिभाजन के मुद्दे पर अपने सिस्य का समर्थन करते है ?, क्या? महात्मा अन्ना हजारे के बाकी सिस्य केजरीवाल, किरण बेदी, सिस्योदिया इत्यादि भी अपने सहयोगी प्रसान्त भूसन से सहमत है ? अगर नही तो अब तक चुप क्यों है ?, अगर हाँ तो फिर कोई आश्चर्य कि बात नहीं महात्मा अन्नाहजारे के आदर्श महात्मा गाँधी ने भी तो यही किया था | कांग्रेसी सोच, कांग्रेसी विचारधारा और कांग्रेसी नीतियों पर चलते हुए महात्मा अन्ना हजारे और उनकी कम्पनी देश को कबतक भ्रस्टाचार बिरोधी नारे से गुमराह करती रहेगी कहना मुस्किल है, क्युकी भ्रस्टाचार एक बड़ी समस्या है येसी ही सौ समस्याओ या यु कहिये देश कि सारी समस्याओ कि जड़ है "कालाधन" और सारी समस्याओ का हल है "कालाधन" लेकिन बड़े अफसोस के साथ कहना पड़ता है कि मिडिया कि सहायता से अन्नाहजारे जैसे लोगो को आगे करके कांग्रेस बड़ी आसानी से देस को गुमराह करने में कामयाब हो रही है ख़ैर चाहे जो भी हो प्रसान्त भूसन कि घटना से एक बात तो साफ हो गई है कि देश को अब अन्नाहजारे जैसे गाँधीवादी अफीम से सुलाया नहीं जा सकता हाँ बात समझ में आने कि देर है, देश कि सारी समस्याए "कालेधन" से सुरु होकर "कालेधन" पर ख़त्म होती है, "कालेधन" को रखने वाला, "कालेधन" से हटकर किसी भी मुद्दे पर बात करने वाला, मुद्दे को भटकाने वाला देशद्रोही है और "कालेधन" को वापस लाने कि बात करने वाला, "कालेधने" को मुद्दा बनाने वाला ही एक मात्र देश भक्त है | जारी..... जयहिंद बंदेमातरम
ॐ जय भारत जय हिंद बन्दे मातरम
ॐ जय भारत जय हिंद बन्दे मातरम
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