मनमोहन मिश्र

मनमोहन मिश्र
"राजनैतिक विश्लेषक"

शनिवार, 15 अक्टूबर 2011

क्या? तथा कथित एवं छतिग्रस्त "लोकतंत्र" और "कालाधन" ही भारतीय महाद्वीप की "दुर्दशा" के लिए जिम्मेदार है ?

क्या? तथा कथित एवं छतिग्रस्त "लोकतंत्र" और "कालाधन" ही भारतीय महाद्वीप की "दुर्दशा" के लिए जिम्मेदार है ? तो इसका एक ही जबाब है "हाँ, हाँ, हाँ, एकमात्र, भ्रष्टाचारियो द्वारा देश में तथा बिदेशी बैंको में छुपाया "कालाधन" ही जिम्मेदार है प्रत्येक घंटे में हो रहे दो किसानो की आत्महत्या के लिए", "हाँ, हाँ, हाँ, एकमात्र, भ्रष्टाचारियो द्वारा देश में तथा बिदेशी बैंको में छुपाया "कालाधन" ही जिम्मेदार है प्रत्येक घंटे में ८३३ आम नागरिको के भूख और कुपोषण से मरने के लिए", "हाँ, हाँ, हाँ, एकमात्र भ्रष्टाचारियो द्वारा देश में तथा बिदेशी बैंको में छुपाया "कालाधन" ही जिम्मेदार है ८४ करोड़ देश वासिओ को २० रूपये से कम आय में जीवन की मुलभुत सुभिधाओ से वंचित जीवन जीने के लिए", "हाँ, हाँ, हाँ, एकमात्र भ्रष्टाचारियो द्वारा देश में तथा बिदेशी बैंको में छुपाया "कालाधन" ही जिम्मेदार है ११५ करोड़ लोगो के कम पढ़े लिखे, तथा ६० करोड़ लोगो के अनपढ़ होने के लिए" "गरीबी, बेरोजगारी, अशिक्छा, अभाव, जैसी सारी समस्याओ के लिए सिर्फ और सिर्फ दलालों, भ्रष्टाचारियो द्वारा देश का धन बिदेशो में छुपा कर रखना है, और देश के सारे भ्रष्टाचारी, दलाल, देशद्रोही, तथा गद्दार अनैतिक उपज है हमारे तथा कथित एवं छतिग्रस्त "लोकतंत्र" के या यु कहे तो ठीक रहेगा की जिस तंत्र में हम जी रहे है वो अंग्रेजो द्वारा हमें गुलाम बनाये रखने के लिए बनाया गया था, दुर्भाग्य बस सिक्छा, कानून, वितरण, न्याय और स्वास्थ सारी ब्यव्स्थाये ज्यू की त्यु आज भी लागु है तथा उसका परिणाम भी वही है जो १९४७ से पहले था "लुट की खुली छुट" फर्क बस इतना है कि पहले गोरे लूटते थे अब काले लूटते है, गोरे लुट कर अपने देश ले जाते थे अब काले लुट कर भी उन्ही के देश ले जाते है आज भी गोरे हमारे पैसे से यैस कर रहे है हम भूख और गरीबी झेल रहे है, ये भ्रष्टाचारी, दलाल, देशद्रोही, गद्दार, और लुटेरे कितने भयानक, न्रिसंस, निर्दई और दुर्दांत है कि आप के सुन कर रोंगटे खड़े हो जायेगे, अफजल गुरु, अजमल कसाई, दाउद इब्राहीम, जैसे सारे खूंखार अपराधी मिल कर भी अब तक कि अपनी उम्र में प्रत्यक्छ या परोक्छ दोनों तरह से जितने आम लोगो को मारा होगा उतने आदमी तो देश के ये भ्रष्टाचारी, दलाल, देशद्रोही, गद्दार, और लुटेरे हर एक दिन मार देते है, हर घंटे में ८३५ आदमी और हर एक दिन में २००४० आदमी मार देते है, देश के भ्रष्टाचारी, दलाल, देशद्रोही, गद्दार, और लुटेरे प्रतिदिन बीस हजार चालीस भारतियो को मौत के घाट उतार देते है, हमारे जैसे आम आदमी के लिए तो ये प्रतिदिन अजमल, अफजल, दाउद बन कर उतर आते है, देश के भ्रष्टाचारी, दलाल, देशद्रोही, गद्दार, और लुटेरे किसी भी आतंकवादी, नसलवादी,.से अधिक क्रूर और भयानक है और हमारी न्याय ब्यवस्था उनको बचाने में तथा उनकी सुरक्छा में लगी हुई है, हममे से ही कुछ लोग उनके जैकार के नारे लगा रहे है हमारी इसी नासमझियो का फायदा देश के भ्रष्टाचारी, दलाल, देशद्रोही, गद्दार, और लुटेरे, काले धन कुबेर उठाते है...जरी..ॐ जयहिंद बंदेमातरम
ॐ जय भारत जय हिंद बन्दे मातरम

कोई टिप्पणी नहीं: