मनमोहन मिश्र

मनमोहन मिश्र
"राजनैतिक विश्लेषक"

मंगलवार, 15 नवंबर 2011

तुम्हारे खून में नहीं है क्रांति की बाते

तुम्हारे खून में नहीं है क्रांति की बाते तुम्हारी अचकन पर लाल गुलाब ही फबते है मत करो तुम हमसे अहिंसा की बाते हम गाँधी को हमारी जेब में रखते है तुम कभी जान न पाओगे प्रेम की परिभाषा तुम्हारी नजरो में सिर्फ देह के सांचे नपते है गर तुम्हे गर्व है की तुम गांधी के वंशज हो तो हमारे सिलसिले भी सुभाष से मिलते है तुम घर में सजा कर रखते हो बन्दुक और तलवार हम हमारी कलम को भी तलवार सी पैनी रखते है,,लेखक राजबाला ...धन्यवाद राजबाला बहन आपकी कबिता दिल को छू गई 
ॐ जय भारत जय हिंद बन्दे मातरम

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