मनमोहन मिश्र

मनमोहन मिश्र
"राजनैतिक विश्लेषक"

सोमवार, 29 अगस्त 2011

जस्न?????????

क्या जस्न अग्निवेश की साजिश की सफलता के लिये मनाया जा रहा है तब तो ठीक नहीं है क्युकी अग्निवेश तो तिन दसक से सरकारी गलियारों में "नीरा राडिया" बन के घूम रहे है दलाली ही उनका धंधा है, उनकी उपस्थिति ही साजिश का होना प्रमाणित हो जाता है, तिस पर उनके पीछे खिलाडियो के खिलाडी कपिल सिब्बल जो थे, बात भी की और विडियो भी चलवा दिया, दलाली के इस धंधे में तो यैसा होता ही रहता है जस्न जैसी तो कोई बात नहीं है! क्या जस्न आम आदमी की जीत को लेकर है तो भी ठीक नहीं है क्युकी देश और देश का "मुद्दा" तो छ महीने पहले जहा खड़ा था वहा से एक कदम भी आगे नहीं बढ़ा है, रहा नारा लगाने, खुश होने तो आंसू पीकर सैकड़ो साल से देस की जनता यही तो करती आ रही है उम्मीद बस उम्मीद लेकिन धूर्तो से प्रार्थना है अवाम की भावनाओ से मत खेलो बस वर्ना भीड़ का कोई चेहरा नहीं होता भड़क जाय तो दुनिया के बड़े से बड़े तानासाह को पंचतत्व में मिला दिया है! क्या जस्न श्री अन्नाहजारे जी की जीत का है तो भी बात समझ में नहीं आ रही है क्युकी "गाँधीवादी" श्री अन्नाहजारे जी को आज नहीं तो कल इस बात का जबाब देश को देना ही पड़ेगा की पुजीपतियो की बपौती सरकार की डुगडुगी (मिडिया) २४ घंटे "अन्ना" दर्शन बिलाश राव देशमुख के निर्देसन में अनचाहे ही कराती रही और सच्चाई तो अब अनचाहे ही देशमुख जी के ही मुखारबिंद से ("परदे के पीछे हर पल मै सुरु से अन्ना जी से जुड़ा रहा") बाहर आ चुकी है ! हाँ आज चाहे तो कांग्रेस जरुर जस्न मना सकती है क्युकी मुद्दा न तो लोकपाल का था और न ही देस की भोली भाली जनता के हित का था, मुद्दा सिर्फ और सिर्फ कांग्रेस मुक्ति का था (जो घोटालो, भ्रष्टाचारो, दलालियो, में सभी शीर्ष नेताओ के नाम उन्ही के सिपहसालारो जो अब जेल में है द्वारा भरी अदालत में लिया जाने लगा था) और "अन्ना" बंदना (श्री अन्नाहजारे जी को "अन्ना" बनाने में फायदा सिर्फ और सिर्फ कांग्रेस को हुआ है) का था उसमे कांग्रेस पूरी तरह से सफल रही है नाचे गाये बल्ले बल्ले करे अंत में इस्वर 
"किरन बेदी",  "अरविन्द केजरीवाल" और "देश की आम जनता" को दिल टूटने पर सहन करने की छमता प्रदान करे क्युकि यही तीनो तो गांधीजी के त्रिमूर्ति सिधान्तो को गाँधीवादी अन्नाहजारे जी का आशीर्वाद मान कर ढो रहे है


ॐ जय भारत जय हिंद बन्दे मातरम

शुक्रवार, 26 अगस्त 2011

श्री अन्नाहजारे जी अब बस भी करो

"श्री अन्नाहजारेजी" आप कइ दिनो से अनसन पर है अब हमारे जैसे आम आदमी को भि आपके स्वास्थ कि चिन्ता होने लगी है, भले हि हम आपके सामने बैठने वाली भीड मे से एक आम आदमि है, पर आपकि बगल मे बैठकर तस्वीर लेकर उसका फ़ायदा उठाने वालो मे से तो बिलकुल नहि है, इसलिये इस्वर से प्रार्थना है कि ओ आपको अनसन छोड देने कि प्रेरणा दे, क्युकि आपको, आम आदमी को, सत्ताधारी कान्ग्रेस को, और सत्ता कि आश लगाये बिपक्छ को जो मिलना था वो मिल चुका है अगर इस बात को खुल कर बोले तो "देश के आम आदमी को न कुछ मिलना था न मिला है न मिलेगा" "आप तो गान्धीवादी है आपको देश का "अन्ना" बनना था सो बन हि गये है" "बिपक्छ पर कान्ग्रेस पहले हि ब्रह्मास्त्र (साम, दाम, दन्ड, भेद) चला कर मूक, बधिर, और द्रिश्टि हीन बना चुकि है" "रही बात कान्ग्रेस कि तो वो सात सालो से एक सूत्री कार्यक्रम में लगी हुई है वर्ण शंकर के युवराज को देश की गद्दी सौपना, क्युकी कौरवो (कांग्रेश) के खेमे बाकि सब सिखंडी ही बचे है ये हम नहीं कहते ये कांग्रेसी खुद कहते है, पचास पचास साल के अनुभवी योधा (हम तो उन्हें भीष्म पितामह, या फिर ध्रितराष्ट ही मानते है) जिश सेना में हो पर खुद को लाचार मान ले तो हम क्या कहेगे, ख़ैर आज के संसद की कार्यवाही के कुछ अंश देखे तो हमारी बात समझ जायेगे" "श्री अन्नाहजारेजी"......


ॐजय भारत जय हिंद बन्दे मातरम

पांचवा पैगाम श्री अन्नाहजारे के नाम

"श्री अन्नाहाजारेजी" आपके स्वस्थ रहने कि कामना करते हुए इस्वर से प्रार्थना है कि आपको लम्बी उम्र प्रदान करे, आपका अदम्भ्य साहस, आपका गाँधीवादी ब्यक्तित्व, और आपका अहिंसावादी सिद्धांत हमेसा आपको अमर रखेगा, इश देश के लिए तो आप "अन्ना" है ही कांग्रेस के लिए तो आप प्राणदायी, जीवनदायी, मुक्तिदाता है, माफ़ कीजियेगा जब भी हम आपसे अपने दिल की बात कहना चाहते है तो श्री गांधीजी का सहारा लेना ही पड़ता है क्युकि आप गाँधीवादी है गाँधी का ब्यक्तित्व आसमान से भी ऊँचा, महानता हिमालय से भी बिशाल और दिल शागर से भी चौड़ा था, लेकिन जब उनके शिद्धान्तो, और नीतिओ को राष्ट्रवादी निगाह से आम आदमी के हितो को सामने रख कर देखा जाय तो लगता है गाँधीजी अपने पुरे राजनैतिक जीवन में अपने आप से ही लड़ते रहे, खुद को बनाते और बिगाड़ते रहे, अपने शिद्धान्तो को लोगो से मनवाते और खुद तोड़ते रहे जिसका परिणाम है हमारी आज की गुलामी और "आपका अनशन मानना और मनवाना सब कुछ" इतिहास के रोचक पन्ने को पढने जैसा लगता है, "कांग्रेस और आप" आज जो भी कर रही है थोडा बहुत इतिहास जानने वाला भी क्या? कैसे? और क्यों? को समझ सकता है "अहिंसा परमोधर्म" सबसे बड़ा सिद्धांत गाँधीजी का था लेकिन दोनो विश्वयुद्धों में अंग्रेजों का साथ देने, भारत की स्वतंत्रता के बाद नेहरू को प्रधानमंत्री का दावेदार बनाने के परिणाम स्वरूप देश का बटवारा इत्यादि उनके अपने ही सिद्धांतो की धज्जिया बिखेर देता है पुरे भारतीय उपमहाद्वीप में जितने लोग १६०० से लेकर १९४७ तक स्वतंत्रता संग्राम में नहीं मरे थे उससे ज्यादा गाँधीजी के अहिंसावादी राजनैतिक फैसलों से मारे गए और ये हम नहीं इतिहास कहता है चौरी चौरा कांड का बिरोध, शुबास चन्द्र बोस का बिरोध, इरविन समझोता, क्रान्तिकारियो का बिरोध, खिलाफत आन्दोलन इत्यादि बहुत से उनके निर्णयों को उनके अपने ही शिद्धान्तो को कुचलता हुआ लगता है ठीक उसी तरह आज २०११ में एक क़ानूनी मसले को लेकर जो देश कि लगभग १०० समस्याओ कि एक पूरक समस्या है, आपका आगे आना देश की आम जनता को तो कुछ नहीं बल्कि कांग्रेस को ही जीवन दान दिया है, दुसरे शब्दों में कहा जाय तो देश कि समस्याओ के बट ब्रिक्ष के समूचे पेड़ से एक टहनी तोड़ने कि कोशिश कर रहे है और आप जानते ही नहीं मानते भी है कि इससे ६५% तक भ्रष्टाचार ख़त्म होगा, आप भ्रष्टाचारी को सजा दिलाने कि बात कर रहे है जिसके लिए लोकपाल बिल चाहते है लेकिन देश कि समस्या भ्रष्टाचारी नहीं भ्रष्टाचार है, आपके कारण "समग्र ब्यवस्था परिवर्तन और काले धन का मुद्दा जो आम आदमी के लिए पूर्ण स्वराज्य के बरार है बाबारामदेव द्वारा की हुई सालो की मेहनत लोगो में जग रहा समग्र क्रांति का उत्साह सब कुछ पर आपने पानी फेर दिया, अगर आपने दो अनसन और एक साल में लोकपाल बिल बनवा भी लेते है (जो की असंभव है ये आप भी जानते है और कांग्रेस भी) तो एसी ही १०० समस्याओ के लिए २०० बार अनसन और १०० साल की जरुरत होगी क्या देश इस बात के लिए तैयार है देश की जनता २१११ तक इस ब्यवस्था को झेलेगी ?, आप गाँधीवादी है, "श्री अन्नाहाजारेजी" किशी के ब्यक्तित्व की महानता या उसके द्वारा किये राजनैतिक निर्णय किसी देश को पूरी धरती पर छिड़े पूजीवादी युद्ध में एक कदम भी आगे नहीं ले जा सकता, यदि आप गाँधीवादी है, गाँधीजी जितने महान और आदर्शवादी है तो आप द्वारा किये गए निर्णयों का असर भी उतना ही प्रभावसाली होगा, "श्री अन्नाहाजारेजी" आपसे छमा मागते हुए अंतिम लाइन लिखना चाहता हु कि मै सिर्फ एक राजनैतिक बिष्लेसक हु इस नाते बहुत सीधे शब्दों में कहू तो बाबा रामदेवजी द्वारा चलाया जा रहा आन्दोलन ही इस देश को पूर्ण स्वराज्य दिला सकता है और उनसे आप पहले जुड़े भी रहे है, अगर इतिहास कि नजर से देखे तो आप गाँधीजी और बाबा रामदेवजी श्री सुबाश चन्द्र बोश कि भूमिका है आप महान गाँधीवादी है लेकिन गाँधीजी द्वारा कि हुई भूल न दुहराए यही देश हित मै होगा | जाय हिंद बंदेमातरम
ॐ जय भारत जय हिंद बन्दे मातरम

बुधवार, 24 अगस्त 2011

चौथा पैगाम अन्नाहजारे के नाम

"श्री अन्नाहाजारेजी" के स्वस्थ रहने कि कामना करते हुए इस्वर से प्रार्थना है कि उन्हें लम्बी उम्र प्रदान करे क्युकि "गाँधीवादी" देश में बहुत कम ही बचे है, ये और बात है कि उनकी मुर्तियो पर मालाये चड़ा कर उनके आदर्शो का खून करने वालो का ही आज बोलबाला है, हो सकता है मेरी सोच गलत हो, वैसे दिल से मै भी चाहता हु की मेरी सोच गलत हो लेकिन आंदोलनों के इतिहास को अतीत में जब भी पलट कर देखते है तो साफ दीखता है कि हमेसा यही हुआ है जो आज हो रहा है, बहुत पीछे १६०० के ब्रिटिश ईस्ट इण्डिया कम्पनी से लेकर फ़्रांसिसी, प्लासी, टीपू सुल्तान, मराठा, और सिख, युद्ध के पन्ने पलटकर देखे तो, तब भी यही हुआ था जो आज हो रहा है, लेकिन १८५७ कि हकीकत बताने वाले हर घर में अपने पिता द्वारा बताये तथ्यों के जानने वाले होगे, भारतीय स्वतंत्रता का प्रथम संग्राम १८५७ जिसने अंग्रेजो को अंदर तक हिला कर रख दिया था, अंग्रेजो को उनका सूर्यास्त लगने लगा था इस आन्दोलन कि तिन मुख्य विशेसताये थी पहला ये आन्दोलन अहिंसावादी सत्याग्रह नहीं, सशस्त्र बिद्रोह था, दूसरा पुरे भारतीय उपमहाद्वीप में एक साथ सुरु हुआ था, तीसरा नेत्रित्व से लेकर आर्थिक ब्यवस्था तक सब कुछ क्रान्तिकारियो के हाथो हुआ था जो आम आदमी थे, १८५७ का भारतीय विद्रोह के पांच मुख्य कारण थे राजनैतिक, आर्थिक, धार्मिक, सैनिक तथा सामाजिक (ब्यवस्था) लेकिन बहुत दुःख होता है जान कर कि जिन कारणों को लेकर इतनी बड़ी क्रांति हुई उन्ही कारणों को लेकर असफलता हाँथ लगी और अगले ९० सालो तक गोरे अंग्रेज हम पर अत्याचार करने में कामयाब रहे, असफलता के कारणों को थोडा बिस्तार से लिखना चाहता हु क्युकि तभी आप १८५७ और २०११ कि समानता को समझ पायेगे, पहला राजनैतिक:- क्रान्तिकारियो और बिद्रोहियो के मकसद एक होते हुए भी तथाकथित नायको (न क्रन्तिकारी थे और नहीं ही बिद्रोही थे) के "मुद्दे" अलग अलग थे, जैसा कि आज २०११ में है, दूसरा आर्थिक;- काले अंग्रेज (गोरे तो करने से रहे) पुजीपतियो ने एक रूपये कि मदत नहीं कि बल्कि गोरो के साथ मिलकर क्रांति का दमन करने में पूरी ताकत झोक दी क्युकि बिद्रोह में उन्हें अपना आर्थिक नुकसान दिखाई दे रहा था, जो आज २०११ में भी हो रहा है, तीसरा धार्मिक:- गोरो द्वारा सभी धार्मिक आस्थाओ पर चोट पहुचाने के कारण क्रांति हुई लेकिन "फूट डालो राज्य करो" के सिधांत को लागु करने में धर्म ही गोरो का सबसे बड़ा हथियार बना, जो आज २०११ में भी हो रहा है, चौथा सैनिक:- सिपहिओ और सैनिको में उठे बिद्रोह को सबसे ज्यादा उनके अधिकारिओ ने दबाया जो गोरो से ज्यादा काले थे, २०११ में भी वही हो रहा है किसानो के भूमि अधिग्रहण से लेकर रामलीला मैदान तक लाठिया और गोलिया चला रहे लोग और चलवाने वाले हमारे अपने ही काले अंग्रेज है हमारे लिए आन्दोलन करने से तो रहे हां घाव पर नमक छिडकने के लिए साथ बैठ कर नमक रोटी खाकर फोटो खिचवाने जरुर आ जाते है, पांचवा सामाजिक (ब्यवस्था):- गोरो द्वारा स्थापित ब्यवस्था दमनकारी, सोसनकारी तथा पुरे सामाजिक ढाचे को नष्ट कर देने वाली थी १८५७ का क्रन्तिकारी बिद्रोह मूलतया ब्यवस्था परिवर्तन को लेकर ही हुआ था लेकिन बड़े अफ़सोस के साथ कहना पड़ता है कि आज तक हम उसी ब्यवस्था में जी रहे है यहाँ तक कि पूरी कि पूरी सबैधानिक ब्यवस्था १८५७ से लेकर १९४७ के बिच प्रतिपादित और स्थापित कि हुई है जिसका मकसद ही पूजीवादी अर्थतंत्र को पोषित और सुरछित रखना था जिसे आज २०११ में हम तथाकथित लोकतंत्र कहते है


आज भी हमारी लड़ाई पूरी कि पूरी ब्यवस्था परिवर्तन को लेकर होनी चाहिए लेकिन एक अनुच्छेद, तथा कुछेक कड़े कानून को बनाकर हम क्या कर लेगे, पूजीवादी अर्थतंत्र द्वारा उत्पादित "कालेधन" कि ताकत जब तक भ्र्स्ताचारियो, देशद्रोहियो, के हाँथ में है, तब तक आदमी का हाँथ खाली ही रहेगा जिस काले धन के बल पर पूरे लोकतंत्र को बंधक बना कर रक्खा है उसी काले धन से लोकपाल को भी बड़ी आसानी से खरीद लेगे, लोकपाल बिल पर "गाँधीवादी" "श्री अन्नाहाजारेजी" कि लड़ाई उतनी ही निरर्थक है जितनी "श्री महात्मा गांधीजी" द्वारा स्वीकृत १९४७ कि स्वतंत्रता


देश के काले अंग्रेज कांग्रेसियो ने १२७ साल गोरे अंग्रेजो के बगल में बैठ कर के कूटनीति सीखी है, १८८५ में स्थापित कांग्रेस और गोरो कि नीतिओ कि समानता आम आदमी और क्रान्तिकारियो को समझ में आने लगा था तभी कांग्रेसियो ने १९२१ में गांधीजी को आगे करके कांग्रेस कि कमान सौप दी गांधीजी युगपुरुष तो थे ही उनकी देव वाणी पूरा देश सुनने लगा लेकिन सबसे दुखद बात है कि गांधीजी द्वारा संकल्पित सौ वादों (नारी उत्थान, ब्यवस्था परिवर्तन, साकाहार, गोरक्षा, भाषा, सिक्छा, स्वास्थ इत्यादि) में से एक वादा भी आज तक पूरा नहीं किया सिर्फ और सिर्फ उनके ब्यक्तित्व का इस्तेमाल किया ख़ैर एक बार फिर कांग्रेस को एक और गाँधी कि जरुरत महसूस हुई, जब २००७ से लेकर २०११ तक भ्रस्ताचार और घोटाला कि बाढ़ आ गई उधर बाबारामदेव ने गांधीजी द्वारा संकल्पित सभी वादों को मुद्दा बनाकर कालेधन भ्रस्ताचार, और दूषित ब्यवस्था को जड़ से उखाड़ फेकने के लिए कमर कश कर खड़े हो गए तो बैठे बिठाये गाँधीवादी "श्री अन्नाहजारेजी" कांग्रेस के हाथो में गांधीजी कि लाठी बन कर आ गए, ब्यक्तित्व एक बार फिर जित गया, आम आदमी का "मुद्दा" हार गया, देश को एक और गाँधी भले ही मिल गया हो लेकिन आजादी और गांधीजी के सपनों का रामराज्य कुछ दूर और खिसक गया
ॐ जय भारत जय हिंद बन्दे मातरम

सोमवार, 22 अगस्त 2011

तीसरा पैगाम श्री अन्नाहजारे जी के नाम

"श्री अन्नाहजारे जी" आप गाँधीवादी है, और धीरे धीरे बात साफ होती जा रही है कि आप कांग्रेसी भी है, जिस तरह गांधीजी युगपुरुष, महात्मा, और देश के बापू बन गये अपने गांधीवाद के चलते, बल्कि उनकी तुलना देवता से कि जाय तो कम है, लेकिन "वो" नहीं कर पाये जो करना चाहिए था, या वो खुद करना चाहते थे, क्युकी गांधीवाद किशी ब्यक्ति के ब्यक्तित्व को आसमान कि ऊंचाई तो दे सकता है पर किसी देश को कुछ नहीं दे सकता, आम आदमी का भला नहीं कर सकता, आम आदमी कि मुलभुत समस्याओ का समाधान नहीं कर सकता | "श्री अन्नाहजारे जी" आप जो भी कर रहे है, और आपका ये गांधीवाद आपके ब्यक्तित्व को तो भले ही सातवे आसमान पर पहुचादे लेकिन देश का हाँथ फिर भी खाली रह जायेगा १८५७, १९४२-४७ और १९७५ कि तरह २०११ का भी इतिहाश एक बार कागज के पन्नो में सिमट कर रह जायेगा, मै ऐ नहीं कहना चाहता कि आप जो भी कर रहे है उसके पीछे कांग्रेश का दिमाग है लेकिन आप वही कर रहे है जो कांग्रेस चाहती है ये बिलकुल साफ है कांग्रेस आपसे नहीं बाबा रामदेव जी द्वारा उठए गये मुद्दों से डरती है अगर सीधे कहा जाय तो चार साल से जिन मुद्दों को लेकर बाबा रामदेव जी पुरे देश में घूम घूम कर अलख जगा रहे थे तो पुरे देश कि मिडिया सो रही थी क्युकी कांग्रेश एसा चाहती थी, बाबा रामदेव जी का आन्दोलन जब अंतिम चरण में था तो आप लोकपाल बिल जो सैकड़ो समस्याओ में से एक है को लेकर अनसन पर बैठ गये जिसे देश कि मिडिया ने हाथो हाथ उठा लिया और आपको मना भी लिया, और आप मान भी गये क्युकि कांग्रेस एसा चाहती थी, लेकिन बाबा रामदेव जी द्वारा चलाये आन्दोलन को ४ जून कि रात को बर्बरता से कुचल दिया गया और देश का दुर्भाग्य ये कि मिडिया उल्टा रामदेव को ही निशाना बनाने लगी क्युकि कांग्रेस एसा चाहती थी, आज आप अनसन पर बैठे है देश कि मिडिया ने हाथो हाथ उठा लिया है आपको सामियाना लगा के सरकार ने दिया और लोकपाल बिल के मुद्दे पर गोल गोल घुमा रही है और आज नहीं तो कल कुछ आप पीछे आकरके कुछ सरकार आगे बढकर मान भी जायेगे क्युकि कांग्रेस एसा चाहती है, ख़ैर अब तो आप समझ गये होगे कि बाबा रामदेव जी द्वारा उठाये गये मुद्दे और आप द्वारा उठाया मुद्दा कांग्रेस के लिए क्या अहमियत रखता है जो भी हो कांग्रेस और देश कि मिडिया आप पर मेहरबान है तो क्यों न बाबा रामदेव जी द्वारा उठाये गये मुद्दे पर आप अपना आन्दोलन केन्द्रित करे या फिर देश को ये बता दे कि बाबा रामदेव जी द्वारा उठाये गये मुद्दे गलत है देश हित में नहीं है, मै जनता हु आप एसा नहीं बोल सकते क्युकि आप गाँधीवादी है आप भी जानते है आम आदमी अपने सपनो को लेकर आशा भरी निगाह से आपकी और देख रहा है वो इस अकेले लोकपाल बिल से पूरा नहीं हो सकता इस देश का सपना इश और देश कि आशाये सिर्फ और सिर्फ बाबा रामदेव जी द्वारा उठाये गये मुद्दों को पूरा का पूरा एक साथ लागू करने से ही हो सकता है आगे आप खुद सोचिये और अग्निवेश जी से बचिए...
ॐ जय भारत जय हिंद बन्दे मातरम

दूसरा पैगाम श्री अन्नाहजारे जी के नाम

मोहनदास करमचंद गाँधीजी को ये देश युगपुरुष, महात्मा, और बापू तो बना लिया लेकिन इस देश को पूर्ण स्वराज्य, पूर्ण आजादी नहीं दिला पाये, येसा गाँधीजी ही मानते थे, चरखा कात कर स्वदेशी का नारा देने वाले गाँधीजी के टूटे दिल के दिये की ज्योति तो वैसे ही डगमगा रही थी की काल की आँधी के ऐक झोके ने पूरी तरह बुझा दिया देश बहुत रोया और आज भी रो रहा है, देश के चाचाओ ने गाँधीजी को देश के चोराहो से लेकर नोटों तक बिठा कर उनके सपनो का खून किया, उनके आदर्शो को रोंद डाला, उनकी आत्मा (चरखा) तक को देश के किसी संग्रहालय में पंहुचा दिया देश का वो हाल कर दिया कि गाँधीजी खुद को इस देश में ढूढ़ते रह जायेगे लेकिन ? ख़ैर कल ये देश आपको देश का अन्ना(बड़ा भाई) भले ही बनाले आम आदमी का हाँथ तो फिर भी खाली रहेगा क्युकी श्री अन्नाहजारे जी आप, जहाँ आकर समस्याए ख़त्म होती है वहां से आपने लड़ाई कि सुरुआत कि है दुसरे शब्दों में कहा जाय तो देश कि समस्याओ के बट ब्रिक्ष के समूचे पेड़ से एक टहनी तोड़ने कि कोशिश कर रहे है और आप जानते ही नहीं मानते भी है कि इससे ६५% तक भ्रष्टाचार ख़त्म होगा, आप भ्रष्टाचारी को सजा दिलाने कि बात कर रहे है जिसके लिए लोकपाल बिल चाहते है लेकिन देश कि समस्या भ्रष्टाचारी नहीं भ्रष्टाचार है जो देश कि लगभग १०० समस्याओ कि एक पूरक समस्या इसको और साफ शब्दों में कहे तो देश कि समस्याओ को एक बट ब्रिक्ष मान लिया जाय तो "कालाधन इस ब्रिक्ष कि जड़े है और उसकी बेले जो टहनियो से जमीन तक लटकी रहती है वो है काले धन का श्रोत, इस ब्रिक्ष का तना है इस देश कि ब्यवस्था और टहनी फूल पत्ते सभी है इसके पोषक काले अंग्रेज अब आप सोचिये अपने अभियान के बारे में ? सो श्री अन्नाहजारे जी एक बार फिर सोचिये और देश कि समस्याओ के बट ब्रिक्ष को जड़ से उखाड़ने का संकक्ल्प लीजिये |ॐ जय भारत जय हिंद बन्दे मातरम

शुक्रवार, 19 अगस्त 2011

एक पैगाम श्री अन्नाहजारे जी के नाम

श्री अन्ना हजारे जी, आज पूरे देश का एक साथ उठ खड़े होना, देशद्रोहियो और भ्रष्टाचारियो के जुल्म की पराकास्ठा को दर्शाता है, १८५७ के क्रांति की ज्वाला और १९४७ के स्वतंत्रता की ललक दोनों एक साथ देश वासिओ की आँखों में देखा जा सकता है, ध्यान से देखा जाय तो १५४ सालो में आम आदमी के लिए कुछ भी नहीं बदला है बल्कि लोगो के विस्वास और भावनाओ को छला ही गया है

श्री अन्ना हजारे जी, आप गाँधीवादी है लेकिन आप १९४७ की सशर्त आजादी लेने वाली गलती नहीं करेगे जिशका परिणाम देश आज भी भुगत रहा है और आपको अनसन पर बैठना पड़ा है, जनलोकपाल बिल एक प्रभावशाली कानून हो सकता है भ्रष्टाचार पर रोक लगाने के लिए, जिसे आप भी मानते है कि ६५% तक कारगर हो सकता है, लेकिन यदि आप श्री बाबा रामदेव जी द्वारा उठाये गए मुद्दे जैसे काले धन को राष्ट्रिय संपत्ति घोषित करना, देश से लूटे हुए पैसे को बिदेशो में जमा करने को देशद्रोह करार देना, ब्यवस्था परिवर्तन (शिछा, चिकत्सा, कानून, अर्थ और कृषि) इत्यादि को अपनी मागो में आत्मसात कर लेते तो न केवल १००% देश को पूर्ण आजादी मिल जाती बल्कि देश को देशद्रोहियो और भ्रष्टाचारियो से हमेसा के लिए छुटकारा मिल जाता, फिर कभी आप जैसे महापुरुषों को जेल और रामलीला मैदान कि खाक न छाननी पड़ती और श्री महात्मा गाँधी जी द्वारा देश के लिए देखे हुए "रामराज्य" के सपने भी साकार हो जाते, आशा ही नहीं पूर्ण विस्वास है कि आप देश के आम आदमी कि प्रार्थना स्वीकार करेगे क्युकी आप गाँधीवादी है


आपका सेवक और समर्थक

आम आदमी (मनमोहन मिश्र)

ॐ जय भारत जय हिंद बन्दे मातरम

शुक्रवार, 12 अगस्त 2011

baba ramdev or anna hajare

आज देश के हर आम आदमी को आगे आकर अपनी भूमिका तय करना होगा क्योकि पूंजीवादी अर्थब्यवस्था और लोकतंत्र के बीच युद्ध सुरु हो चूका है सदीओ में कोई ऐसा पैदा होता है जो गुलामी के किलाफ आवाज उठता है बाबा रामदेवजी ऐसे ही एक आम आदमी है जिन्होंने इतने बड़े पूंजीवादी साम्राज्य से लोहा लिया है आज देश के हर आदमी को बाबा रामदेव कोन है? जानने के बजाय, क्या कर रहे है और क्यों कर रहे है जान कर, कंधे से कन्धा मिलाकर इस लड़ाई में सामिल होना चाहिए वर्ना इस देश के पूंजीवादी चोर, भ्रस्त्ताचारी, दलाल रामदेव जी को ख़त्म करदेगे हमे फिर सदीओ किसी और रामदेवजी का इंतजार करना होगा और इसी भ्रष्ट ब्यवस्था में सिसक कर मरना होगा



१- अन्ना हजारे जी और उनके साथियो द्वारा आन्दोलन, अनसन, सफलता और असफलता और अब आने वाला १६ अगस्त का अनसन सब कुछ, भ्रस्टाचार के खिलाफ देश भर मे चलाये जा रहे बहु आयामी ब्यापक आन्दोलन और आम आदमी में भ्रस्टाचार के खिलाफ उबलते गुस्से को ख़त्म करने की कांग्रेसियो ने साजिश रची है, रामदेव जी द्वारा चलाये जा रहे देश ब्यापी आन्दोलन की धार को कुंद करना चाहते है कांग्रेसी


२- रामदेव जी का आन्दोलन भ्रस्टाचार के पुरे पेड़ को जड़ सहित उखाड़ देने की ही नहीं बल्कि पूरी ब्यवस्था में परिवर्तन लाने

की है यदि रामदेव जी सफल हो जायं तो ज्यदातर कांग्रेसी या तो देश छोड़ कर भाग जायेगे या फांसी चडेगे या बाकी उम्र जेल में गुजारेगे
आन्दोलन का दमन करना कांग्रेसियो द्वारा आत्मरक्षा में उठाया गया कदम था कांग्रेसियो ने ये बात बिलकुल सच बोली थी पूजीवादी अर्थब्यवस्था बिना काले धन के चल ही नहीं सकती और काला धन जिसके पास है वही अपने लिए फांसी का फन्दा कैसे बनाते


३- अन्ना हजारे जी एक इमानदार समाजसेवक है इसमें कोई दो राय नहीं है लेकिन कांग्रेसियो को १२६ साल का अंग्रेजी नीति का अनुभव है उन्होंने कब और कैसे अन्ना जी का हथियार की तरह इस्तेमाल कर लिया इसका पता रामदेव जी को और लोगो को तो क्या अन्ना हजारे जी को ही नहीं चला, अन्ना जी का इस्तेमाल करके बाबा रामदेव के आन्दोलन को कुछ महीने पीछे करने में भले ही कामयाब हो गयी लेकिन एक अन्नाहजारे जैसे गाँधीवादी हठी को छेड़ कर कांग्रेस अपने ही बनाये षड्यंत्र में बुरी तरह से फँस गई है, अन्ना हजारे जी और रामदेव जी आज एक साथ नहीं है इसके पीछे भी कांग्रेसियो की साजिश है जबकि ओ किसी की भी बात मानने की स्थिति में नहीं है


४- अन्ना हजारे जी अगर १५ अगस्त को आन्दोलन करेगे तो कांग्रेश ४ जून से भी आगे बढ़ कर दमन करेगी लाठी आंशु गैश गोली कुछ भी चलाएगी लेकिन आन्दोलन को सफल नहीं होने देगी, कांग्रेश सोचती है दमन करना उसका अधिकार भी है और जीत भी, लेकिन ये घटना गाँधीवादी अन्ना हजारे की चेतना जगाने के लिए काफी होगा तब उन्हें भगतसिंह, शुभाष चन्द्र बोश और चन्द्रसेखर आजाद जैसे क्रान्तिकारियो की बहुत याद आयेगी और अन्ना हजारे जी को अहसास भी होगा जाने अनजाने की हुई गलतियो का और अनचाही कही बातो का


५- जो भी हो बाबारामदेव जी को आगे आना ही होगा फिर क्या, पूरा देश जब एक साथ भ्रस्टाचार के खिलाफ आन्दोलन में उतर जायेगा तब कांग्रेस "एमरजेंशी" लगा देगी ये उसका अंतिम वार होगा भ्रस्ताचारियो को बचाने के लिए, और यही कांग्रेश का अंत होगा


६- रामदेव जी तथा अन्ना हजारे जैसे मार्गदर्शको को, भ्रष्टाचारी नेताओ के बीच अपनी अंतरात्मा का गला घोटकर बैठे नेताओ को तथा देश के हर आम आदमी को एक साथ मिल कर इस लम्बी लड़ाई को लड़ना होगा क्युकी भ्रस्ताचारी काले धनकुबेर किसी भी पार्टी में होगे या जहा कही भी होगे लड़ाई में सामने आयेगे इसलिए ये युद्ध जीतना ही होगा


बुधवार, 10 अगस्त 2011

" हमेसा से भ्रष्ट कम्पनी "कांग्रेस" के सबसे भ्रष्ट आदमी "मन मोहन सिंह"" है

में कहू या न कहू, आप कहे या न कहे, कुछ लोग माने या न माने पर मन मोहन सिंग जानते भी है, कहते भी है, और मानते भी है की वे ही देश के सबसे भ्रष्ट आदमी है

पहला तथ्य- देशी कहावत है "मोनम स्वीकार लक्षणं" देश जलता है जल जाय, लुटता है लुट जाय, बिकता बिक जाय वो चुप रहेगे
दूसरा तथ्य- सवा सो साल से देश को लूटने, बेचने, दलाली करने वाली कम्पनी "कांग्रेस" के वर्तमान मुखिया है
तीसरा तथ्य- भ्रष्टाचारी, दुराचारी, अत्याचारी, चोरी दलाली, बेईमानी में लिप्त अपनी कम्पनी "कांग्रेस" के कारिंदों को जानते हुए छुपाते है और बचाते भी है
चौथा तथ्य- भ्रष्टाचार, अत्याचार, दुराचार, और दलाली, में सर तक डूबी अपनी कम्पनी "कांग्रेस" की तरफ कोई उगली तो क्या आँख उठा कर देखे उन्हें बर्दास्त नहीं होता चाहे बाबा रामदेव हो या अन्नाहजारे बस क्या दिन का दोपहर हो या आधी रात, ओरत हो या मर्द, सबका सबकुछ तोडवा देते है और शर्माते भी नहीं
पांचवा तथ्य- उपरोक्त सभी घटनाओ दुर्घटनाओ के बावजूद मौन होकर कुसासन की डोर थामे देस के न जाने किसका किसका क्या क्या लूट लेने को आतुर दुसासनो को खुली छुट देकर धिर्त्राष्ट्र रूपी मनमोहन सिंह आसन पर बैठ कर इस देश के सौ करोड़ लोगो को आंख बंद रखने, मुह न खोलने, और कान में ऊँगली डालने के लिए सलाह भी दे रहे है और धमकी भी दे रहे है


क्या अब भी आप नहीं मानेगे कि " हमेसा से भ्रष्ट कम्पनी "कांग्रेस" के सबसे भ्रष्ट आदमी "मन मोहन सिंह"" है


मंगलवार, 9 अगस्त 2011

"देश के गद्दार, देश द्रोही"

"देश के गद्दार, देश द्रोही" -- देश हित की बात न सोचे, गरीबो, मजदूरो, मेहनत कस लोगो, यहा तक की भिखारिओ से भी टेक्स के रूप में उगाही कर के बिदेसी बेंको में पैसा जमा करे, देश को बिदेसियो और बिदेसी कंपनियो के हाथो में बेचे, देश के १२० करोर आम आदमी को, उनके हितो को बिदेसियो के हाथो में बेच दे, जमाखोरी, कालाबाजारी, मिलावट, दलाली, अपराध, भ्रस्ताचार को सुरक्छा प्रदान करे तथा उक्त बातो का बिरोध करने वालो पर लाठी, आँसुगेश, और गोली चलवाए, दमन करे, अनेको प्रकार से सताये, भारत में येसा कोन है? बताने की जरुरत नहीं फिर भी बता देता हु, १२६ साल पहले एक अंग्रेज द्वारा अस्थापित कांग्रेस का गठन ही इसी काम के लिए किया गया था, उस अंग्रेज से लेकर आज की एक अंग्रेजन तक, अगर ध्यान से देखा जाय तो कांग्रेसियों ने अपनी जिम्मेदारी निभाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है, क्रान्तिकारियो के जीवन की सोदेबाजी से लेकर देश के अंतिम आम आदमी के म्रत्यु तक में दलाली तक, समय गुजरने के साथ साथ नाम बदले, पार्टी बदली लेकिन काम वही किया आज देखा जाय तो लगभग हर पार्टी में कांग्रेसी ही शीर्ष पर बैठे है


कहने की जरुरत नहीं है आज दलाली, चोरी भ्रस्ताचार, जमाखोरी, कालाबाजारी के खिलाफ चलाये जा रहे बाबा रामदेव और अन्ना हजारे के मुहीम के बिरोध में खड़ी कांग्रेश तो नंगी हो चुकी है साथ में ओ भी नंगे हो चके है जो मोन है भले ही दूसरी पार्टियो में है पर चुप है क्युकी ओ भी कांग्रसी है ओ भी देश के गद्दार, और देश द्रोही है आज देश देख और समझ रहा है पूरा देश दो भाग, दो सम्प्रदाय, दो जाती, दो सोच, दो धर्म में बट चूका है पहला है बाबारामदेव, अन्नाहजारे का दूसरा है कांग्रेस और दुसरे दलों में छुपे कांग्रेसियो का
जितना चाहे जोर लगालो, जुल्म ढालो, ओ दिन आने वाला है जब तुम्हे आना ही पड़ेगा तिहार जेल में या जाना ही पड़ेगा अपने आकाओ के देश...

शनिवार, 6 अगस्त 2011

"sheela"

देश को मांगने की आदत हो गयी है कुछ भी मांग लेते है कर्ज, शान्ती, और इस्तीफा भी ये जानते हुए भी की मिलना तो है नहीं ख़ैर लोगो का क्या "कुछ तो लोग कहेंगे, लोगो का काम है कहना" लेकिन चोरो, दलालों, भ्र्स्ताचारियो का भला है चुप रहना अगर छोटी मोती बातो पर इस्तीफा देने लगे तो हो चूका, ये अलग बात है की यदि इस देश में कानून होता, देश स्वतंत्र होता तो सारे कंग्रेशी साथ में उनके भाई बंद भी जेल में ब्यास्थित हो गए होते, २०१४ आते आते सारे कंग्रेशी तिहर जेल में होगे और बाबा रामदेव इन्हें वहा भी नहीं छोड़ेगे योग की कच्छा लगायेगे का .....

शुक्रवार, 5 अगस्त 2011

"भारत के केंसर"

"भारत के केंसर" को केंसर कभी नहीं हो सकता होँ २०१४ आते आते भ्रष्टाचारी, दलाल, जमाखोर, चोर, इलाज के बहाने भारत जरुर छोड़ देगे

लोकपाल बिल का भूत कांग्रेसी दलालों को इमरजेंसी लगाने पर मजबूर कर देगा, इस देश की १२१ करोर जनता बाबा रामदेव और अन्ना हजारे बनकर इन दलालों पर टूट पड़ेगी फिर दुनिया की कोई ताकत इन्हें बचा नहीं पायेगी इनकी उलटी गिनती सुरु हो चुकी है

मंगलवार, 2 अगस्त 2011

'शर्मिंदगी भरे राज'

मनमोहन सिंह जी आपने आज ना ही कुछ नया किया है, ना ही कुछ नया कहा है और ना ही इसमें आपकी कोई गलती है आप जिस कम्पनी के मुखिया है वो १२६ सालो से इसी दलाली के धंधे में लगी है

आप तो जानते है ईस्ट इंडिया कम्पनी के कलान्तरिय कारिंदे द्वारा स्थापित कांग्रेस का गठन ही 'शर्मिंदगी भरे राज' छुपाने बेचने और सौदे बाजी करने के लिए किया गया था और कांग्रेस ने समय समय पर क्रान्तिकारिओं के आजादि कि ओर बढ़ते कदमों को रोकने से लेकर अंग्रेजों के हर मंसूबों को पूरा करने में सहभागि रहे, कालान्तर मे सुबाश चन्द्र बोश जैसे क्रान्तिकारिओं के जीवन कि सौदेबाजि से लेकर भगत सिंह जैसे क्रान्तिकारिओं कि मौत तक का सौदा बडी बेरहमि और बेसर्मि से किया
मनमोहन सिंह जी आपने इतनी बड़ी बात 'शर्मिंदगी भरे राज' का उपयोग बहुत छोटे से सन्दर्भ में करके आपने कांग्रेसी होने का सबूत तो दे दिया लेकिन उनके दिल को ठेस जरुर लगेगी जो आपके बारे में अच्छे ख्याल रखते है मेरा मतलब उनसे है जिन्होंने आपको "बेईमान सरकार के इमानदार प्रधानमंत्री" कहा था ख़ैर कोई कुछ भी कहे ए देश जान चूका है "सारे राज" आपका भी और आपकी कांग्रेश का भी तथा साथ में आपके मोसेरे भाई (बिरोधी पार्टियों) का भी
मनमोहन सिंह जी आप तो मोन रहते है............