मनमोहन मिश्र

मनमोहन मिश्र
"राजनैतिक विश्लेषक"

मंगलवार, 18 अक्टूबर 2011

"अन्ना हजारे देश से धोखा कर रहे है, भ्रष्टाचारी, दलाल, देशद्रोही, गद्दार, और लुटेरो से लबा लब भरी पार्टी के लिए २०१२ के पांच राज्यों के चुनाव में कांग्रेस के लिए वोट मागेगे एसा अन्ना हजारे का कहना है मेरा नहीं"

"अन्ना हजारे देश से धोखा कर रहे है, भ्रष्टाचारी, दलाल, देशद्रोही, गद्दार, और लुटेरो से लबा लब भरी पार्टी के लिए २०१२ के पांच राज्यों के चुनाव में कांग्रेस के लिए वोट मागेगे एसा अन्ना हजारे का कहना है मेरा नहीं" अन्ना हजारे ने एक पत्रकार से पूछे गए सवाल "क्या कांग्रेश और प्रधानमंत्री अपने ख़त में लिखे अनुसार सीत कालीन सत्र में मजबूत लोकपाल बिल लाते है तो आप उनके लिए २०१२ के चुनाव में वोट मागेगे ?" अन्ना हजारे का जबाब था हाँ पांचो राज्यों में कांग्रेश के पच्छ में वोट डालने के लिए लोगो से अपील करूँगा" यही असली चेहरा है अन्ना हजारे का, संघ जैसे राष्ट्रवादी व आध्यात्मवादी संघटन अन्ना हजारे के लिए अछूत है और बाबा रामदेव जैसे युगपुरुष अछूत है जो सही मायने में ब्यवस्था परिवर्तन और काले धन की लड़ाई लड़ रहे है, प्रसान्त भूसन जैसे देशद्रोही देश का सर काटने की इच्छा रखने वाले आपके सहयोगी आज भी आपके साथ है फिर भी आप देश भक्त है, भ्रष्टाचार सौ समस्याओ में से देश की एक बड़ी समस्या जरुर है लेकिन "लोकपाल बिल" उसका पूर्ण समाधान कत्तई नहीं है फिर आप लोकपाल के लालीपाप पर देश को कैसे दाव पर लगा सकते है, आपको कांग्रेस का चुनाव प्रचार करना है करिए, आपको "गाँधी" बनना है बनिये लेकिन देश को बकरा बनाकर कांग्रेस के हांथो कटवाना क्यों चाहते है आप, हिसार चुनाव तो एक भूमिका थी आपकी "गाँधी" बनने की आकान्छाओ और कांग्रेस को २०१२ में बिधानसभाओ के चुनाव और २०१४ लोक सभा के चुनाव में जिताने की, आप रालेगावं से कांग्रेस के इशारे पर बाबा रामदेव की ऊँगली पकड़ कर दिल्ली पहुँच गए तो कांग्रेस को इशारा करके बाबा रामदेव को उठवा कर हरिद्वार फेकवा दिया तो क्या ये धोका नहीं था ?, "गाँधी" बनने की नौटंकी में कांग्रेस के इशारे पर मिडिया देश को मुर्गा बना कर आपके लिए बाँग लगवाया और आपको गाँधी बनाया अब आपका देस की गर्दन काटने की कोसिस करना देस के साथ धोका नहीं तो क्या है ?, अब आपको किसी की जरुरत नहीं है कांग्रेस के लिए वोट मागिये, कोई बात नहीं वो तो आपको करना ही था क्युकी आप कांग्रेसी है, गाँधी बनना था सो बन गए कोई बात नहीं आम आदमी के लिए लड़ने से आम आदमी के लिए लड़ने का ढोंग करना आसान होता है, लेकिन देश को १९४७ के चौराहे पर लाने की कोशिश मत कीजिये क्युकी उस चौराहे से निकला कोई भी रास्ता उजाले की और नहीं गया था | ॐ बन्दे मातरम जयहिंद
ॐ जय भारत जय हिंद बन्दे मातरम

शनिवार, 15 अक्टूबर 2011

क्या? तथा कथित एवं छतिग्रस्त "लोकतंत्र" और "कालाधन" ही भारतीय महाद्वीप की "दुर्दशा" के लिए जिम्मेदार है ?

क्या? तथा कथित एवं छतिग्रस्त "लोकतंत्र" और "कालाधन" ही भारतीय महाद्वीप की "दुर्दशा" के लिए जिम्मेदार है ? तो इसका एक ही जबाब है "हाँ, हाँ, हाँ, एकमात्र, भ्रष्टाचारियो द्वारा देश में तथा बिदेशी बैंको में छुपाया "कालाधन" ही जिम्मेदार है प्रत्येक घंटे में हो रहे दो किसानो की आत्महत्या के लिए", "हाँ, हाँ, हाँ, एकमात्र, भ्रष्टाचारियो द्वारा देश में तथा बिदेशी बैंको में छुपाया "कालाधन" ही जिम्मेदार है प्रत्येक घंटे में ८३३ आम नागरिको के भूख और कुपोषण से मरने के लिए", "हाँ, हाँ, हाँ, एकमात्र भ्रष्टाचारियो द्वारा देश में तथा बिदेशी बैंको में छुपाया "कालाधन" ही जिम्मेदार है ८४ करोड़ देश वासिओ को २० रूपये से कम आय में जीवन की मुलभुत सुभिधाओ से वंचित जीवन जीने के लिए", "हाँ, हाँ, हाँ, एकमात्र भ्रष्टाचारियो द्वारा देश में तथा बिदेशी बैंको में छुपाया "कालाधन" ही जिम्मेदार है ११५ करोड़ लोगो के कम पढ़े लिखे, तथा ६० करोड़ लोगो के अनपढ़ होने के लिए" "गरीबी, बेरोजगारी, अशिक्छा, अभाव, जैसी सारी समस्याओ के लिए सिर्फ और सिर्फ दलालों, भ्रष्टाचारियो द्वारा देश का धन बिदेशो में छुपा कर रखना है, और देश के सारे भ्रष्टाचारी, दलाल, देशद्रोही, तथा गद्दार अनैतिक उपज है हमारे तथा कथित एवं छतिग्रस्त "लोकतंत्र" के या यु कहे तो ठीक रहेगा की जिस तंत्र में हम जी रहे है वो अंग्रेजो द्वारा हमें गुलाम बनाये रखने के लिए बनाया गया था, दुर्भाग्य बस सिक्छा, कानून, वितरण, न्याय और स्वास्थ सारी ब्यव्स्थाये ज्यू की त्यु आज भी लागु है तथा उसका परिणाम भी वही है जो १९४७ से पहले था "लुट की खुली छुट" फर्क बस इतना है कि पहले गोरे लूटते थे अब काले लूटते है, गोरे लुट कर अपने देश ले जाते थे अब काले लुट कर भी उन्ही के देश ले जाते है आज भी गोरे हमारे पैसे से यैस कर रहे है हम भूख और गरीबी झेल रहे है, ये भ्रष्टाचारी, दलाल, देशद्रोही, गद्दार, और लुटेरे कितने भयानक, न्रिसंस, निर्दई और दुर्दांत है कि आप के सुन कर रोंगटे खड़े हो जायेगे, अफजल गुरु, अजमल कसाई, दाउद इब्राहीम, जैसे सारे खूंखार अपराधी मिल कर भी अब तक कि अपनी उम्र में प्रत्यक्छ या परोक्छ दोनों तरह से जितने आम लोगो को मारा होगा उतने आदमी तो देश के ये भ्रष्टाचारी, दलाल, देशद्रोही, गद्दार, और लुटेरे हर एक दिन मार देते है, हर घंटे में ८३५ आदमी और हर एक दिन में २००४० आदमी मार देते है, देश के भ्रष्टाचारी, दलाल, देशद्रोही, गद्दार, और लुटेरे प्रतिदिन बीस हजार चालीस भारतियो को मौत के घाट उतार देते है, हमारे जैसे आम आदमी के लिए तो ये प्रतिदिन अजमल, अफजल, दाउद बन कर उतर आते है, देश के भ्रष्टाचारी, दलाल, देशद्रोही, गद्दार, और लुटेरे किसी भी आतंकवादी, नसलवादी,.से अधिक क्रूर और भयानक है और हमारी न्याय ब्यवस्था उनको बचाने में तथा उनकी सुरक्छा में लगी हुई है, हममे से ही कुछ लोग उनके जैकार के नारे लगा रहे है हमारी इसी नासमझियो का फायदा देश के भ्रष्टाचारी, दलाल, देशद्रोही, गद्दार, और लुटेरे, काले धन कुबेर उठाते है...जरी..ॐ जयहिंद बंदेमातरम
ॐ जय भारत जय हिंद बन्दे मातरम

गुरुवार, 13 अक्टूबर 2011

"बाबारामदेव को काले झंडे और अंग्रेजी दलालों, गद्दारों, देशद्रोहियो, काले धनकुबेरो, और भ्रष्टाचारियो की जै"


"बाबारामदेव" इतिहास से उपर उठकर अध्यात्म के दरवाजे पर खड़े एक यैसे "युगपुरुष" है जिनकी उपमा के लिए तिन सौ सालो के इतिहास में कोई नहीं मिलता, मानव परिपूर्ण तभी होता है जब कर्म, धर्म, योग, और ज्ञान चारो समान रूप से समाहित हो, वो सिर्फ बाबारामदेव मे है, "सतयुग" में भी अत्याचारी राक्छ्सों का आतंक बढ़ जाने पर भगवान विष्णु को धरती पर रामावतार लेना पड़ा था और उन्हें भी राक्छ्सों का अंत सारी मानव लीलाओ के तहत करना पड़ा था फिर ये तो "कलियुग" है तो "रामदेव" की राह इतनी आसन कैसे हो सकती है, बाबारामदेव देश के लिए जो भी कर रहे है वो देशभक्ती की पराकाष्ठा है और बहुत सी मुस्किलो को झेलते हुए उन्हें सफलता जरुर मिलेगी, देश वास्तव में आर्थिक और सामरिक दोनों मायनो में आजाद होगा, रहा कुछ लोगो के रामदेव को काले झंडे दिखाने का सवाल तो यदि कांग्रेस रामदेव जैसे योगी को जान से मार देने के षड्यंत्र तक कर सकती है वहां काले झंडे दिखाना कोई मायने नहीं रखता, इस देश के हम जैसे आम लोगो का क्या, चार सौ सालो तक मुठ्ठी भर मुगलों और दो सौ सालो तक गिनती के गोरो की गुलामी हमने यू ही नहीं झेली है, हमेसा से हमको ही हमारे खिलाफ इस्तेमाल किया गया है अगर हमने मुगलों के लिए अपनों पर तीर, तलवार और तोपे चलाई है, तो अंग्रेजो के लिए अपनों पर लाठी, गोली, और गोले चलाये है और फिर आज भी तो वही कर रहे है, जिस तरह अंग्रेजों ने देश पर हुकूमत करने के लिए भारतियों के हाथों में डंडे थमा दिए और कन्धों पर बंदूक रख दिए उसि तरह वैचारिक तथा सामाजिक दमन के लिए क्रान्तिकारिओं के बढते दबाव को खत्म करने के लिए अंग्रेजों ने कुछ दरबारी, चाटुकार, भारतियों को मिलाकर अपनी हि अध्यछ्ता में संस्थागत दलालों का एक समूह खड़ा कर दिया जो समय समय पर क्रान्तिकारिओं के आजादि कि ओर बढ़ते कदमों को रोकने से लेकर अंग्रेजों के हर मंसूबों को पूरा करने में सहभागि रहे, कालान्तर मे सुबाश चन्द्र बोश जैसे क्रान्तिकारिओं के जीवन कि सौदेबाजि से लेकर भगत सिंह जैसे क्रान्तिकारिओं कि मौत तक का सौदा बडी बेरहमि और बेसर्मि से किया, आजादि का सपना तो सपना हि रह गया देश का बिभाजन शौगात में मिला अंग्रेजों ने जाते जाते दरबारी, चाटुकार, दलाल भारतियों का एक ऎसा जाल बना दिया कि देश "आजादि के एक दिन" तो क्या "आजादि के एक पल" के लिये तरस गया, लेकिन दलालों ने खूब धन कमाया देश तो नहि बिदेशी बैंको को पाट दिया, अंग्रेज भले हि दूर हो गये पर दलाल अंग्रेजी और एक अंग्रेजन कि जी हुजुरी से खुश हैं, कोशिश मे है कि फिर से ईटलि कि महारानि भारत कि गद्दि सभालें, हम आज भी एसे लोगो के लिए "जैकार" लगा रहे है और बाबारामदेव जो जान हथेली पर लेकर देश के गद्दारों, देशद्रोहियो, काले धनकुबेरो, और भ्रष्टाचारियो से लोहा ले रहे है उन्हें काले झंडे दिखा रहे है, इस्वर यैसे लोगो को सद्बुद्धि दे .... ॐ जयहिंद बंदेमातरम                          


ॐ जय भारत जय हिंद बन्दे मातरम

प्रसान्त भूसन पर किया गया हमला अलोकतांत्रिक है, तो देश कि एकता, अखंडता, संप्रभुता पर प्रसान्त भूसन का हमला क्या है ?

प्रसान्त भूसन पर किया गया हमला अलोकतांत्रिक है, तो देश कि एकता, अखंडता, संप्रभुता पर प्रसान्त भूसन का हमला क्या है ?, क्या? महात्मा अन्ना हजारे देश के एक और बिभाजन के मुद्दे पर अपने सिस्य का समर्थन करते है ?, क्या? महात्मा अन्ना हजारे के बाकी सिस्य केजरीवाल, किरण बेदी, सिस्योदिया इत्यादि भी अपने सहयोगी प्रसान्त भूसन से सहमत है ? अगर नही तो अब तक चुप क्यों है ?, अगर हाँ तो फिर कोई आश्चर्य कि बात नहीं महात्मा अन्नाहजारे के आदर्श महात्मा गाँधी ने भी तो यही किया था | कांग्रेसी सोच, कांग्रेसी विचारधारा और कांग्रेसी नीतियों पर चलते हुए महात्मा अन्ना हजारे और उनकी कम्पनी देश को कबतक भ्रस्टाचार बिरोधी नारे से गुमराह करती रहेगी कहना मुस्किल है, क्युकी भ्रस्टाचार एक बड़ी समस्या है येसी ही सौ समस्याओ या यु कहिये देश कि सारी समस्याओ कि जड़ है "कालाधन" और सारी समस्याओ का हल है "कालाधन" लेकिन बड़े अफसोस के साथ कहना पड़ता है कि मिडिया कि सहायता से अन्नाहजारे जैसे लोगो को आगे करके कांग्रेस बड़ी आसानी से देस को गुमराह करने में कामयाब हो रही है ख़ैर चाहे जो भी हो प्रसान्त भूसन कि घटना से एक बात तो साफ हो गई है कि देश को अब अन्नाहजारे जैसे गाँधीवादी अफीम से सुलाया नहीं जा सकता हाँ बात समझ में आने कि देर है, देश कि सारी समस्याए "कालेधन" से सुरु होकर "कालेधन" पर ख़त्म होती है, "कालेधन" को रखने वाला, "कालेधन" से हटकर किसी भी मुद्दे पर बात करने वाला, मुद्दे को भटकाने वाला देशद्रोही है और "कालेधन" को वापस लाने कि बात करने वाला, "कालेधने" को मुद्दा बनाने वाला ही एक मात्र देश भक्त है | जारी..... जयहिंद बंदेमातरम                            
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