मनमोहन मिश्र

मनमोहन मिश्र
"राजनैतिक विश्लेषक"

शुक्रवार, 29 जुलाई 2011

स्वाभाविक परिवर्तन को रोकना किसी के बस में नहीं है

स्वाभाविक परिवर्तन को रोकना किसी के बस में नहीं है तथाकथित लोकतंत्र अब सक्रमण काल से गुजर रहा है, पूजीवादी अर्थ ब्यवस्था लोकतंत्र के चारो खम्भों ( बिधाइका, कार्यपालिका, न्यायपालिका, और सुचना तंत्र ) को दीमक की तरह चाट कर खोखला कर दिया है, चाहे जितना जोर लगाले देश के कांग्रेसी दलाल क्रांति की आंधी को रोक नहीं पाएंगे बाबा रामदेव, अन्नाहजारे या उनके सहयोगियो पर उलटे सीधे आरोप लगा कर ये दलाल भ्रष्टाचार के खिलाफ उठ रहे तूफान को रोक नहीं पांएगे अपितु वे खुद अपनी असलियत देश की जनता को बता रहे है आज देश का हर सच्चा नागरिक बाबा रामदेव और अन्नाहजारे बन चूका है सच्चे लोग कभी चुप नहीं रहेगे यदि अगली बार देश के दलालों ने चार जून की रावन लीला दुहराने की कोशिश की तो देश का सच्चा सिपाही लंका दहन से लेकर रावन बध से भी पीछे नहीं हटेगा, देश में आज भी माये बाबा रामदेव और अन्ना हजारे जैसे गाँधीवादी के आलावा भगतसिंह, शुभाष चन्द्र बोश और चन्द्रसेखर आजाद भी पैदा करती है

भारत का पूरा लोकतंत्र ( बिधाइका, कार्यपालिका, न्यायपालिका, और सुचना तंत्र ) आज कुछ हजार लोगों द्वारा काले धन के बल पर बंधक बना लिया गया है १२१ करोर देश वासिओ को तय करना है की वे आजादी चाहते है या गुलामी.....

कोई टिप्पणी नहीं: