मनमोहन मिश्र

मनमोहन मिश्र
"राजनैतिक विश्लेषक"

बुधवार, 12 दिसंबर 2012

जैसी करनी वैसी भरनी पूज्य श्री स्वामी रामदेव जी के पीठ में छुरा मारने वाले अन्ना हजारे के पीठ में उन्ही के चेले अरविन्द केजरीवाल ने छुरा मारा


दिनांक ६ दिसंबर को अन्ना हजारे जी ने अरविन्द केजरीवाल के विरुद्ध जो वक्तव्य दिया उससे अरविन्द केजरीवाल की निष्ठा सन्दिग्ध हुई है। अन्नाजी ने कहा कि अरविन्द केजरीवाल सत्ता और धन के लिए राजनीति कर रहे हैं और वे कभी भी केजरीवाल की आम आदमी पार्टी के पक्ष में वोट नहीं डालेंगे। अन्नाजी कोई दिग्विजय सिंह नहीं हैं जिनके कथन को हवा में उड़ा दिया जाय। अन्नाजी के कारण ही केजरीवाल ज़ीरो से हीरो बने। उन्होंने यश और प्रसिद्धि के लिए अन्ना जी का भरपूर दोहन किया। अन्नाजी को जब केजरीवाल की असली मन्शा का पता लगा तो उन्होंने अविलंब केजरीवाल से संबन्ध तोड़ लिया। अन्ना के जन आन्दोलन के साथ अरविन्द केजरीवाल की निष्ठा आरंभ से ही सन्दिग्ध रही है। कांग्रेस के एजेन्ट स्वामी अग्निवेश केजरीवाल की ही अनुशंसा पर अन्ना की कोर कमिटी के सदस्य बने। अग्निवेश के चरित्र को सबसे पहले किरण बेदी ने पहचाना और वीडियो के माध्यम से आम जनता के सामने रखा। किरण बेदी और केजरीवाल के बीच मतभेदों की यही शुरुआत थी। आज भी स्वामी अग्निवेश से केजरीवाल के संबन्ध पूर्ववत हैं। सन २००५-०६ में केजरीवाल ने स्वामी अग्निवेश के माध्यम से सोनिया गांधी तक उनकी राष्ट्रीय सलाहकार परिषद की सदस्यता पाने के लिए जोरदार लाबिंग की थी। किसी तरह आमंत्रित सदस्य के रूप में दिनांक ४ अप्रिल २००११ को स्वामी अग्निवेश के साथ राष्ट्रीय सलाहकार परिषद की बैठक में सोनिया गांधी के साथ चाय पीने की उनकी आकांक्षा सफल हो पाई।
केजरीवाल के दादा हरियाणा के एक सफल व्यवसायी थे। धन के प्रति केजरीवाल का लोभ भी जगजाहिर हो चुका है। अन्नाजी ने उनके इस लोभ को सार्वजनिक किया है। केजरीवाल अपने और अपने एनजीओ के लिए देसी या विदेशी, कहीं से भी धन लेने में तनिक भी परहेज़ नहीं करते। वे घोषित रूप से मुख्यतया ‘परिवर्तन’ और ‘कबीर’ नामक दो एनजीओ से संबन्धित हैं। उनकी संस्था ‘कबीर’ ने अमेरिका के फोर्ड फाउन्डेशन से वर्ष २००५ मे १,७२००० एवं वर्ष २००६ में १,९७,००० डालर प्राप्त किए। इसके पर्याप्त साक्ष्य हैं। उन्होंने वर्ष २०१० में भी लाखों डालर फोर्ड फाउन्डेशन से प्राप्त किए। इन सभी अनुदानों का क्या उपयोग हुआ और और किन उद्देश्यों के लिए प्राप्त किए गए, आज तक रहस्य बने हुए हैं। फोर्ड एक मज़े हुए व्यवसायी हैं। बिना लाभ के वे एक धेला भी खर्च नहीं कर सकते। उनके माध्यम से अमेरिका विदेशों में अपने हित साधन करता है। अमेरिका में ‘आवाज़’ नामक एक एनजीओ है जिसे वहां के उद्योगपति चलाते हैं। इस संस्था ने विश्व में अमेरिका के हित में कार्य करते हुए अनेक संस्थाओं को प्रत्यक्ष वित्तीय अनुदान दिया है। मिस्र के तहरीर चौक में आन्दोलन चलाने के लिए इसने करोड़ों डालर खर्च किए, लीबिया में तख्ता पलट के लिए उसने सारे खर्चे उठाए और अब सीरिया में गृह युद्ध के लिए यह संस्था दोनों हाथों से धन ऊलीच रही है। केजरीवाल के दोनों एनजीओ ‘आवाज़’ से संबद्ध हैं।
केजरीवाल को कांग्रेस तथा सरकार में तबतक कोई बुराई या भ्रष्टाचार दिखाई नहीं पड़ा जबतक वे सोनिया गांधी के नेतृत्व में कार्यरत राष्ट्रीय सलाहकार परिषद की सदस्यता के प्रति आशान्वित थे। वे सरकार के आशीर्वाद से ही लगभग २० वर्षों तक आयकर विभाग में वे दिल्ली में ही पदस्थापित थे। दिल्ली के बाहर उनका एक बार भी स्थानान्तरण नहीं हुआ। जबकि उनके स्तर के अन्य अधिकारियों को इतनी ही अवधि में पूरा देश दिखा दिया जाता है। उनकी पत्नी श्रीमती सुनीता केजरीवाल जो उनकी बैचमेट हैं, आज भी विगत २० वर्षों से अतिरिक्त इन्कम टैक्स कमिश्नर के पद पर दिल्ली में ही जमी हुई हैं। उनका भी आज तक दिल्ली के बाहर एक बार भी तबादला नहीं हुआ है। ये उनकी कुछ ऐसी कमजोरियां हैं जिनका केन्द्रीय सरकार जब चाहे अपने पक्ष में इस्तेमाल करती हैं। भाजपा के नेताओं पर केजरीवाल ने कांग्रेस के इशारे पर ही आरोप लगाए थे। वे मुकेश अंबानी, अनु पटेल इत्यादि के चुटकी भर धन के विदेशी बैंकों में जमा होने का भंडाफोड़ करते हैं। मुकेश अंबानी एक अन्तराष्ट्रीय व्यवसायी हैं, उनके यदि सौ करोड़ विदेशी बैंकों में जमा हैं, तो कौन सी आश्चर्य की बात है? केजरीवाल ऐसे ही रहस्योद्घाटन करते हैं। विदेशों में कार्यरत या वहां से वापस आने वाले भारत के लाखों इन्जीनियरों, डाक्टरों, प्रबन्धकों, वैज्ञानिकों और उद्यमियों के खाते विदेशी बैंकों में हैं। क्या उनके द्वारा जमा धन काला धन है? केजरीवाल सोनिया गांधी और राजीव गांधी के विदेशी बैंकों में जमा लाखों करोड़ रुपयों पर रहस्यमयी चुप्पी साध लेते हैं। बाबा रामदेव पूरे हिन्दुस्तान में प्रमाणों के साथ चिल्ला-चिल्ला कर यह बात कहते हैं, सुब्रहमण्यम स्वामी ने प्रधानमंत्री को भेजी अपनी २५६ पेज की याचिका में प्रमाणों के साथ इन तथ्यों का खुलासा किया है, लेकिन केजरीवाल सोनिया जी पर एक शब्द भी नहीं बोलते।
१९७४-७५ में इन्दिरा सरकार और कांग्रेस आज की तरह ही भ्रष्टाचार और निरंकुशता का प्रतीक बन चुकी थी। इन्दिरा गांधी के लोकसभा के चुनाव को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अवैध घोषित कर दिया था, जय प्रकाश नारायण की संपूर्ण क्रान्ति का देशव्यापी आन्दोलन अपने चरम पर था। इन्दिरा जी ने आपात्काल लागू करके अपनी सत्ता बचा ली और लोकतंत्र का गला घोंट दिया। उस समय कांग्रेस के कुशासन और तानाशाही से देश की मुक्ति के लिए सभी विरोधी दलों का एकीकरण अत्यन्त आवश्यक था। जयप्रकाश नारायण ने यह असंभव कार्य कर दिखाया और १९७७ में पहली बार मोरारजी भाई के नेतृत्व में एक प्रभावी और भ्रष्टाचारमुक्त गैरकांग्रेसी सरकार बनी। अपने ढाई साल के कार्यकाल में उस सरकार ने जिस तरह महंगाई, भ्रष्टाचार और तानाशाही के विरुद्ध प्रभावशाली नियंत्रण स्थापित किया उसे हिन्दुस्तान की जनता आज भी याद करती है। अल्प समय में ही वह सरकार कांग्रेस के षडयंत्र का शिकार बन गई। उस समय राजनारायण और चौधरी चरण सिंह ने इन्दिरा जी के इशारे पर जनता के साथ जो विश्वासघात किया, वही कार्य सोनिया जी के इशारे पर आज अरविन्द केजरीवाल और मनीष सिसोदिया कर रहे हैं। अगर २०१४ के आम चुनावों के बाद भ्रष्ट और निकम्मी कांग्रेस पुनः सत्ता में वापस आती है, तो इसका पूरा श्रेय राहुल-सोनिया को नहीं, अरविन्द केजरीवाल को जाएगा जो विपक्ष की विश्वसनीयता को सन्देह के घेरे में लाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रहे हैं


ॐ जय भारत जय हिंद बन्दे मातरम

सोमवार, 22 अक्टूबर 2012


नेहरु खानदान बनाम (सीआईए एजेंट) सोनिया मैनो:-
मोतीलाल नेहरु और जवाहर लाल नेहरु अंग्रेजो की दलाली करते रहे, अंग्रेजो को सत्ता चलाने में और उनके जाने के बाद उनके अधिपत्य को कायम रखने में अपनी पूरी ताक़त लगा दी नेहरु खानदान वस्तुतः मुसलमान था देश को धोखा देने की नियत से हिन्दू बना वर्ण शंकर होने के बाद दोनों का न रहा अंग्रेजो की वफ़ादारी में इसाइयत को आगे बढ़ाने का काम किया अन्दर से हमेसा मुसलमान होने के नाते पाकिस्तान का साथ देता रहा आइ एस आइ (पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी) के लिए काम करता रहा लेकिन अंतर्राष्ट्रीय बिरादरी में रूश और अमेरिका में खीचा तानी होने के नाते भारत का झुकाव रुष के पक्छ में रहता था, नेहरु का खुनी खेल २३ जून १९५३ में श्यामा प्रसाद मुखर्जी के खून से ही सुरु हो गया था बाद में मरने के बाद इंदिरा ने सत्ता के लिए लालबहादुर शास्त्री को के जी बी (रूशी ख़ुफ़िया एजेंसी) से मिलकर ११ जनवरी १९६६ को तासकंद में मरवा दिया इसके बाद तो जो भी इनके रास्ते में आया या प्रधानमंत्री बनने के सपने पाले मार दिए गए, संजय गाँधी को इंदिरा ने खुद २३ जून १९८० में  मरवा दिया और इंदिरा गाँधी को सोनिया मैनो ने मरवाया यहाँ से सोनिया मैनो ने खुनी खेल की कमान सभाली फिर भी आगे बढने से पहले सोनिया के बारे में बताना चाहूँगा,
सोनिया मैनो सीआईए (अमेरिकन खुपिया एजेंसी) एजेंट कैसे बनी? और नेहरु खानदान में कैसे आई? जानने के लिए सोनिया मैनो है कौन?
तो पहले अंतर्राष्ट्रीय पहलू जानना होगा, तथा कथित आजादी के बाद भारत का झुकाव हमेसा रूस के तरफ रहा जो अमेरिका को नागवार गुजरता था सो अमेरिका ने एक दूरगामी साजिस के तहत सोनिया के बाप को जो के जी बी (रूशी ख़ुफ़िया एजेंसी) का एजेंट था उसे सीआईए (अमेरिकन खुपिया एजेंसी) में सामिल करवाया और फिर उसके उपर डबल एजेंट होने का आरोप लगा कर उसकी बेटी सोनिया मैनो को सीआईए (अमेरिकन खुपिया एजेंसी) में सामिल करके भारत को अपने बस में करने की साजिस रची, यहाँ से सीआईए एजेंट सोनिया मैनो का काम सुरु हुआ सोनिया ने खुद को राजीव के सामने परोसा वर्ण संकरी संस्कार बिहीन राजीव सोनिया के जाल में फस कर सादी कर ली तो सोनिया का अगला सिकार इंदिरा गाँधी बनी जिसे सीआईए और खालिस्तानी मिलिटेंट के द्वारा ३१ अक्तूबर १९८४ को मरवा दिया आगे राजीव गाँधी के प्रधानमंत्री बन जाने पर भी भारत रूस की तरफ ही रहा तो उधर रूस बिखर रहा था इधर सीआईए और लिट्टे से मिल कर राजीव गाँधी को २१ मई १९९१ में अपना दूसरा सिकार बना दिया यही से भारत में अमेरिका का सिक्का चलना सुरु हुआ गुजराल, देव गौडा, नरसिंह राव को मोहरे की तरह इस्तेमाल करते हुए सोनिया ने भारत को अमेरिका का पिछलग्गू बना दिया इस बिच जिसने भी सोनिया की हकीकत समझने और प्रधानमंत्री बनने की कोसिस की जैसे राजेस पायलट को ११ जून २००० में कार एक्सीडेंट में मरवा दिया और माधव राव सिंधिया को ३० सितम्बर २००१ में प्लेन क्रेश में मरवा दिया मनमोहन सिंह जैसे टट्टू को प्रधानमंत्री बना कर सरकार चला रही सीआईए एजेंट सोनिया के जरिये अमेरिका भारत पर राज्य कर रहा है                 

ॐ जय भारत जय हिंद बन्दे मातरम

मंगलवार, 2 अक्टूबर 2012


भारत दुनिया का बिश्व गुरु था, आज भी है और आगे भी रहेगा, लाखो वर्सो से पूरी दुनिया पर भारत ने राज्य किया है, सिर्फ पिछले ३०० सालो में मुग़ल लुटेरो, अंग्रजो और अंग्रेजो के भारतीय दलालों ने हमारी संस्कृती को नष्ट करने की कोशिस की, इतिहास को तोड़ मरोड़ कर गलत तरीके से पेस किया, सब कुछ भूगोल को नष्ट करने, बदलने और लुटने के लिए हमें गुमराह किया, हम कभी भी आतताई और दुराचारी नहीं थे लेकिन असुरो, नराधमो और दुष्टों का नास हमेसा से करते आये है हमारी रगों में "धनुर्धर राम" और " चक्र धारी कृष्ण" का खून तथा "खड्ग धारी माँ दुर्गा" और "बिनासिनी काली" का ढूध दौड़ता है, हमारे तो देवी देवता भी शस्त्र धारी थे, हम अहिंसावादी कायरो की नहीं दुष्ट विनासक बीरो की संतान है, हमें आज के "अधर्मी वर्ण शंकरो" के बिनास के लिए शस्त्र धारण करना ही होगा
ॐ जय भारत जय हिंद बन्दे मातरम

बुधवार, 25 जनवरी 2012

जब तक इस देश में नेहरु खानदान का एक भी ब्यक्ति रहेगा तबतक देस नहीं कह सकता अंग्रेज देश छोड़ कर चले गए,

जब तक इस देश में नेहरु खानदान का एक भी ब्यक्ति रहेगा तबतक देस नहीं कह सकता अंग्रेज देश छोड़ कर चले गए, और जबतक देस में एक भी कांग्रेसी रहेगा तबतक देस स्वतंत्र नहीं हो सकता "यह अटल सत्य है" १५ अगस्त और २६ जनवरी तो बस एक दिन है देश की ७० प्रतिसत भूखी, नंगी जनता का उपहास करने के लिए
ॐ जय भारत जय हिंद बन्दे मातरम

शुक्रवार, 20 जनवरी 2012

यदि अन्नाहजारे और उनके सदस्य, पांच राज्यों में हो रहे चुनाव में कांग्रेस का सीधे बिरोध नहीं करते तो यह देस के साथ सीधे सीधे वादा खिलाफी होगी

यदि अन्नाहजारे और उनके सदस्य, पांच राज्यों में हो रहे चुनाव में कांग्रेस का सीधे बिरोध नहीं करते तो यह देस के साथ सीधे सीधे वादा खिलाफी होगी, आम आदमी के साथ धोखा होगा ये बात पूरी तरह से साबित हो जाएगी कि अन्नाहजारे और उनके सदस्य पूंजीपतियो, काले धन कुबेरों, देशद्रोहियो, भ्रष्टाचारियो और कांग्रेसियो के द्वारा प्रायोजित थे जिसे मै दस महीनो से लिखते आ रहा हूँ 
ॐ जय भारत जय हिंद बन्दे मातरम